Baharagora Sand Raid: सुवर्णरेखा घाट पर अवैध उत्खनन, दो ट्रैक्टर जब्त, माफियाओं में हड़कंप
मधुआबेड़ा सुवर्णरेखा नदी घाट पर अवैध बालू उत्खनन करते दो ट्रैक्टर जब्त, ‘सिंडिकेट’ का खुलासा, चंदे के नाम पर वसूली, प्रशासन की बड़ी कार्रवाई।
Baharagora Big Action: बहरागोड़ा प्रखंड अंतर्गत मधुआबेड़ा स्थित सुवर्णरेखा नदी घाट पर शनिवार को अंचल प्रशासन ने बड़ी छापामार कार्रवाई की। अवैध बालू उत्खनन और परिवहन में लिप्त दो ट्रैक्टरों को रंगे हाथ जब्त कर लिया गया। एक ट्रैक्टर चालक वाहन सहित भागने में सफल रहा। इस कार्रवाई से बालू माफियाओं में हड़कंप मच गया है।
गुप्त सूचना के आधार पर दबिश
अंचल प्रशासन को एक गुप्त सूचना मिली कि मधुआबेड़ा घाट पर बड़े पैमाने पर अवैध बालू उत्खनन हो रहा है और ट्रैक्टरों से उसे ले जाया जा रहा है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने आकस्मिक दबिश दी। घाट पर मौजूद माफिया पनपे हुए थे। पुलिस और अंचल टीम को देखते ही अफरा-तफरी मच गई।
दो ट्रैक्टर जब्त, एक फरार
घाट पर तैनात माफियाओं ने भागने की कोशिश की, लेकिन प्रशासन ने तीन में से दो ट्रैक्टरों को दबोच लिया। एक ट्रैक्टर चालक किसी तरह वाहन सहित फरार हो गया। पुलिस उसकी तलाश कर रही है। जब्त ट्रैक्टरों पर भारी मात्रा में बालू लदा हुआ था। दोनों वाहनों को जब्त कर कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
चंदे और देवी-देवता के नाम पर वसूली
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यहाँ माफियाओं ने एक शातिर सिंडिकेट बना रखा है। कुछ स्थानीय युवक उनके साथ मिलकर काम कर रहे हैं। विभिन्न चौक-चौराहों पर देवी-देवताओं और चंदे के नाम पर बालू लदे वाहनों से अवैध वसूली का धंधा धड़ल्ले से चलता था। यानी माफिया न सिर्फ बालू चुरा रहे थे, बल्कि उसे ले जाने वालेों से भी चंदा मांग रहे थे। यह पूरा नेटवर्क पूरी तरह से अवैध था।
सुवर्णरेखा का सांस्कृतिक और पारिस्थितिकी महत्व
सुवर्णरेखा नदी झारखंड और पश्चिम बंगाल की जीवन रेखा मानी जाती है। इसकी उत्पत्ति रांची जिले से होती है और यह बहरागोड़ा होते हुए बंगाल की खाड़ी में मिलती है। इस नदी का नाम ‘सुवर्ण’ (सोना) और ‘रेखा’ (रेखा) के मेल से बना है – माना जाता है कि कभी इसके किनारे सोने के कण मिलते थे। यह नदी भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित है और इसके पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। लेकिन पिछले कुछ दशकों में अवैध बालू उत्खनन ने नदी के अस्तित्व को खतरे में डाल दिया है। नदी का जलस्तर गिर रहा है और आसपास के क्षेत्रों में भूजल भी प्रभावित हो रहा है।
सिंडिकेट कैसे काम करता था?
बालू माफियाओं ने मधुआबेड़ा घाट पर एक ऑर्गनाइज्ड सिस्टम बना रखा था। वे रातों-रात लाखों रुपये का बालू निकाल लेते थे। फिर ट्रैक्टरों और ट्रकों में लोड कर दूसरे राज्यों भेज देते थे। विभिन्न नाकों पर स्थानीय युवक चौकीदारी करते थे और पुलिस-प्रशासन को सूचना दे देते थे। इसके अलावा, देवी-देवताओं के नाम पर वसूली की जाती थी। यानी बालू लदे वाहनों से हर बार कुछ पैसे चंदे के नाम पर लिए जाते थे। यह एक धंधा ही बन चुका था।
ग्रामीणों ने जताई नाराजगी
स्थानीय लोगों ने प्रशासन का स्वागत तो किया, लेकिन साथ ही नाराजगी भी जताई कि इतने दिनों के बाद कार्रवाई हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यह अवैध खनन नदी को बर्बाद कर रहा था, लेकिन प्रशासन आंखें बंद किए बैठा था। एक किसान का कहना है, “हम सिंचाई के लिए नदी पर निर्भर हैं। अब पानी भी कम है और आसपास की जमीन भी कमजोर हो रही है। अगर ऐसे चलता रहा तो नदी का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा।”
सिंडिकेट को ध्वस्त करने की चेतावनी
प्रशासन ने इस बार सख्त रुख अख्तियार किया है। अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि अवैध खनन के इस नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जाएगा। जो भी इस अवैध कारोबार में शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल राजस्व और पर्यावरण से जुड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
अब क्या होगा?
प्रशासन ने बालू माफियाओं के खिलाफ छापेमारी तेज कर दी है। जब्त ट्रैक्टरों के मालिकों से पूछताछ की जा रही है। फरार ट्रैक्टर चालक की भी तलाश की जा रही है। इस कार्रवाई के बाद इलाके में बालू माफिया सहम गया है। लेकिन प्रशासन को इसी तरह लगातार निगरानी रखनी होगी, ताकि सिंडिकेट फिर से सक्रिय न हो पाए।
आपकी राय क्या है – क्या अवैध बालू उत्खनन रोकने के लिए नदी किनारे CCTV कैमरे लगाने चाहिए? कमेंट में बताएं।
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