Jharkhand Discovery: 10 करोड़ साल पुराने जीवाश्म से उठा रहस्य, वैज्ञानिक भी हैरान!

झारखंड के पाकुड़ जिले में मिली 10 करोड़ साल पुरानी जीवाश्मकृत लकड़ी! वैज्ञानिक भी हैरान, इस खोज से भू-वैज्ञानिक इतिहास पर नया प्रकाश पड़ेगा। जानिए पूरी खबर।

Feb 27, 2025 - 10:31
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Jharkhand Discovery: 10 करोड़ साल पुराने जीवाश्म से उठा रहस्य, वैज्ञानिक भी हैरान!
Jharkhand Discovery: 10 करोड़ साल पुराने जीवाश्म से उठा रहस्य, वैज्ञानिक भी हैरान!

पाकुड़: झारखंड के वैज्ञानिकों और इतिहास प्रेमियों के लिए बड़ी खबर है! पाकुड़ जिले के बरमसिया गांव में एक अद्भुत खोज सामने आई है। यहां भूवैज्ञानिक डॉ. रंजीत कुमार सिंह और वन रेंजर रामचंद्र पासवान की टीम ने एक विशाल वृक्ष का जीवाश्म खोज निकाला है, जिसकी उम्र 10 से 14.5 करोड़ वर्ष बताई जा रही है।

यह खोज न सिर्फ वैज्ञानिक समुदाय के लिए बल्कि स्थानीय लोगों के लिए भी गर्व की बात है। यह झारखंड की प्राकृतिक विरासत को उजागर करता है और भू-वैज्ञानिक इतिहास को समझने के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। इस खोज के बाद वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने इस क्षेत्र का गहन अध्ययन करने की योजना बनाई है, जिससे झारखंड की छुपी हुई भू-समृद्धि को दुनिया के सामने लाया जा सके।

क्या है यह खोज और क्यों है इतनी खास?

झारखंड की धरती में पेट्रोफाइड जीवाश्म यानी पत्थर में बदल चुके पेड़ के अवशेष मिलने की खबरें पहले भी आई हैं, लेकिन इस बार की खोज बेहद दुर्लभ और महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशाल वृक्ष के जीवाश्मकृत अवशेष दिखाते हैं कि यह इलाका लाखों-करोड़ों साल पहले घने जंगलों से भरा हुआ था।

डॉ. रंजीत कुमार सिंह ने बताया कि इस जीवाश्म की सही उम्र और पर्यावरणीय संदर्भ को समझने के लिए और भी शोध की जरूरत है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि इस क्षेत्र को संरक्षित किया जाना चाहिए ताकि भविष्य की पीढ़ियां भी इस प्राकृतिक खजाने का अध्ययन कर सकें।

झारखंड का भूगर्भीय इतिहास और इसकी छिपी धरोहर

अगर इतिहास की बात करें तो झारखंड की धरती हमेशा से भू-विज्ञानियों के लिए एक रहस्यमयी जगह रही है। यहां कोयला, लौह अयस्क और अन्य खनिजों की प्रचुरता पहले से ही दुनिया को आकर्षित करती रही है। लेकिन अब पाकुड़ की यह नई खोज दिखाती है कि यह क्षेत्र सिर्फ खनिजों के लिए ही नहीं, बल्कि जीवाश्मों के लिए भी बेहद खास है।

ऐसा माना जाता है कि करोड़ों साल पहले इस क्षेत्र में घने जंगल हुआ करते थे, जहां विशाल वृक्ष और अजीबोगरीब वनस्पतियां पाई जाती थीं। समय के साथ प्राकृतिक आपदाओं, ज्वालामुखी विस्फोट और जलवायु परिवर्तन के कारण ये जंगल धीरे-धीरे दबकर जीवाश्म में बदल गए।

स्थानीय लोगों की दिलचस्पी और अंधविश्वास

डॉ. सिंह ने बताया कि दशकों से स्थानीय ग्रामीण इस जीवाश्म को पूजते रहे हैं, क्योंकि यह आसपास की चट्टानों से अलग है। लोगों का मानना था कि यह किसी दिव्य शक्ति से जुड़ा हुआ है।

वन रेंजर रामचंद्र पासवान ने भी स्थानीय समुदाय से इस क्षेत्र की सुरक्षा में सहयोग करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अगर इस क्षेत्र को सुरक्षित रखा जाए तो यहां इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिल सकता है और इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा होगा।

झारखंड में बनेगा नया जियोपार्क?

झारखंड वन विभाग के प्रभागीय वनाधिकारी मनीष तिवारी के साथ मिलकर एक भू-विरासत विकास योजना (Geo-Heritage Development Plan) का प्रस्ताव रखा जा रहा है। इसके तहत इस क्षेत्र को एक "जियोपार्क" के रूप में विकसित करने पर विचार किया जा रहा है, जहां लोग आकर इन प्राचीन जीवाश्मों को देख सकें और उनके महत्व को समझ सकें।

डॉ. सिंह और उनकी टीम ने झारखंड सरकार, वन विभाग और इको-टूरिज्म विभाग के साथ मिलकर इस क्षेत्र के व्यवस्थित विकास की योजना बनाई है। उनका मानना है कि झारखंड में ऐसे और भी कई रहस्यमयी स्थान छुपे हो सकते हैं, जिन्हें खोजने की जरूरत है।

क्या होगा आगे?

  • वैज्ञानिकों की एक टीम इस क्षेत्र का विस्तृत सर्वेक्षण करेगी।
  • जीवाश्मों की सटीक उम्र और भू-वैज्ञानिक महत्व को समझने के लिए शोध किया जाएगा।
  • इस क्षेत्र को संरक्षित और इको-टूरिज्म के लिए विकसित करने की योजना बनाई जा रही है।
  • सरकार और स्थानीय प्रशासन मिलकर एक जियोपार्क विकसित करने पर विचार कर रहे हैं।

झारखंड के इतिहास का नया अध्याय!

झारखंड की यह खोज सिर्फ एक वैज्ञानिक सफलता नहीं, बल्कि इस क्षेत्र की अद्भुत प्राकृतिक धरोहर को दुनिया के सामने लाने का एक बड़ा अवसर है। अगर इस क्षेत्र को संरक्षित और विकसित किया जाता है, तो यह न केवल भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण अध्ययन केंद्र बनेगा, बल्कि झारखंड के पर्यटन और अर्थव्यवस्था को भी एक नई दिशा देगा।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।