Ulidih Fire: लाखों की राख, एनएच-33 पर धधक उठा आरओ प्लांट, खाना बनाते वक्त हुई बड़ी अनहोनी
जमशेदपुर के उलीडीह में एनएच-33 पर स्थित एक आरओ प्लांट में भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया है। गैस चूल्हे की एक चिंगारी ने पल भर में लाखों का सामान राख कर दिया और आसमान में धुएं का काला गुबार छा गया। इस भयावह मंजर और दमकल विभाग की कड़ी मशक्कत की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
जमशेदपुर, 19 दिसंबर 2025 – लौहनगरी जमशेदपुर के उलीडीह थाना क्षेत्र में गुरुवार की रात एक भीषण अग्निकांड ने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया। एनएच-33 स्थित डिमना रेजीडेंसी के पास संचालित एक आरओ (रिवर्स ऑस्मोसिस) प्लांट अचानक आग की लपटों में घिर गया। देखते ही देखते आग ने इतना विकराल रूप धारण कर लिया कि आसपास के रिहायशी इलाकों में अफरा-तफरी मच गई। आसमान में उठते धुएं के गुबार और आग की लपटों ने रात के अंधेरे को भयावह बना दिया।
खाना बनाते वक्त भड़की चिंगारी
हादसे की जड़ में एक छोटी सी लापरवाही सामने आई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्लांट के भीतर ही एक कर्मचारी गैस चूल्हे पर खाना बना रहा था। इसी दौरान चूल्हे से निकली एक छोटी सी चिंगारी पास रखे ज्वलनशील सामान पर जा गिरी।
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पल भर में तबाही: प्लांट में प्लास्टिक की जार और रबर के पाइप जैसी सामग्री प्रचुर मात्रा में थी, जिसने आग को ईंधन देने का काम किया। देखते ही देखते आग पूरे प्लांट में फैल गई और कर्मचारी को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
इतिहास की झलक: जमशेदपुर में औद्योगिक अग्नि सुरक्षा
जमशेदपुर का इतिहास उद्योगों और तकनीकी प्रगति से जुड़ा है, लेकिन इसके साथ ही अग्नि सुरक्षा एक बड़ी चुनौती रही है। $1912$ में टाटा स्टील की स्थापना के साथ ही शहर में आधुनिक फायर स्टेशन और सुरक्षा मानकों की शुरुआत हुई थी। हालांकि, हाल के वर्षों में रिहायशी इलाकों के करीब खुले छोटे कमर्शियल प्लांट (जैसे आरओ प्लांट) में सुरक्षा मानकों की अनदेखी एक चिंता का विषय बन गई है। एनएच-33 के किनारे व्यावसायिक गतिविधियों का बढ़ना विकास तो है, लेकिन बिना पुख्ता सुरक्षा इंतजामों के यह किसी बड़े खतरे को दावत देने जैसा है।
लाखों का नुकसान: राख में तब्दील हुआ सपना
आग इतनी भीषण थी कि प्लांट के भीतर रखा लगभग हर कीमती उपकरण जलकर खाक हो गया। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, इस अग्निकांड में लाखों रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ है।
| नष्ट हुआ सामान | विवरण |
| उपकरण | हाई-प्रेशर मोटर और बिजली के पैनल |
| सामग्री | सैकड़ों प्लास्टिक पानी जार और पाइप |
| अन्य | दुकान का फर्नीचर और फिटिंग्स |
| ढांचा | प्लांट की आंतरिक वायरिंग और छत |
दमकल विभाग की 'जंग' और बचाव कार्य
सूचना मिलते ही दमकल विभाग की गाड़ी मौके पर पहुँची। आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दमकल कर्मियों को लपटों पर काबू पाने के लिए करीब एक घंटे तक कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
राहत की सबसे बड़ी बात यह रही कि इस हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ। दमकल विभाग की त्वरित कार्यवाही ने आग को आसपास की दुकानों और डिमना रेजीडेंसी के अन्य हिस्सों में फैलने से रोक लिया, वरना यह हादसा एक बड़ी त्रासदी में बदल सकता था।
प्रशासनिक जांच और सुरक्षा की मांग
घटनास्थल पर उलीडीह थाना पुलिस भी तैनात रही ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। फिलहाल पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी आग लगने के सटीक कारणों और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की जांच कर रहे हैं।
स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि रिहायशी इलाकों और एनएच के किनारे स्थित व्यावसायिक संस्थानों में फायर ऑडिट अनिवार्य किया जाए। गैस चूल्हे का व्यावसायिक परिसर में असुरक्षित उपयोग भविष्य में भी घातक हो सकता है।
सबक लेने की जरूरत
उलीडीह की यह घटना हमें याद दिलाती है कि एक छोटी सी चिंगारी बरसों की मेहनत को मिनटों में खाक कर सकती है। क्या हम अपने कार्यस्थलों पर अग्नि सुरक्षा को लेकर वाकई गंभीर हैं? यह सवाल हर उस व्यापारी के लिए है जो सुरक्षा मानकों को केवल कागजी खानापूर्ति मानता है।
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