Sundarnagar Tragedy: दरनगर में पटरी पार करते वक्त बुजुर्ग की दर्दनाक मौत, नंदूप गांव में मातम, रेलवे ट्रैक पर बिखरीं खुशियां
जमशेदपुर के सुंदरनगर में ट्रेन की चपेट में आने से 65 वर्षीय बुजुर्ग की मौत हो गई है। नंदूप गांव के पास हुई इस हृदयविदारक घटना और रेलवे ट्रैक की सुरक्षा पर उठते सवालों की पूरी इनसाइड रिपोर्ट यहाँ देखें।
जमशेदपुर/सुंदरनगर, 14 अप्रैल 2026 – लौहनगरी के बाहरी इलाके सुंदरनगर थाना क्षेत्र स्थित नंदूप गांव में मंगलवार की सुबह एक भीषण ट्रेन हादसा सामने आया है। रोजमर्रा की तरह सुबह की शुरुआत करने निकले 65 वर्षीय सिदयू सोय के लिए आज का सूरज काल बनकर आया। रेलवे लाइन पार करने के दौरान एक तेज रफ्तार ट्रेन की चपेट में आने से उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना ने पूरे नंदूप गांव को झकझोर कर रख दिया है। परिजनों की चीख-पुकार और ग्रामीणों के आक्रोश के बीच सुंदरनगर पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
खौफनाक सुबह: 5 बजे पटरी पर टूटी सांसें
हादसे की दास्तान रूह कंपा देने वाली है, जो बताती है कि एक सेकंड की चूक कैसे जानलेवा साबित होती है।
-
सुबह का नित्यकर्म: मृतक के पुत्र कमल सोय ने बताया कि उनके पिता सिदयू सोय हर दिन की तरह सुबह करीब 5 बजे घर से शौच के लिए निकले थे।
-
अचानक आई मौत: घर के पास ही रेलवे लाइन पार करते समय अचानक एक तेज रफ्तार ट्रेन वहां पहुँच गई। ट्रेन की गति इतनी अधिक थी कि बुजुर्ग सिदयू को संभलने या पीछे हटने का मौका तक नहीं मिला।
-
जोरदार टक्कर: ट्रेन की सीधी टक्कर लगते ही सिदयू काफी दूर जाकर गिरे और घटनास्थल पर ही उन्होंने दम तोड़ दिया।
पुलिस की कार्रवाई: एमजीएम अस्पताल भेजा गया शव
घटना के तुरंत बाद ग्रामीणों की भीड़ रेलवे ट्रैक पर जमा हो गई, जिसके कारण कुछ देर के लिए वहां तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
-
मौके पर पहुँची टीम: सूचना मिलते ही सुंदरनगर थाना पुलिस दल-बल के साथ घटनास्थल पर पहुँची और आक्रोशित लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराया।
-
पोस्टमार्टम: पुलिस ने पंचनामा करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल भेज दिया है।
-
जांच का दायरा: पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वह कौन सी ट्रेन थी और क्या चालक ने इमरजेंसी ब्रेक या हॉर्न का इस्तेमाल किया था।
रेलवे ट्रैक और ग्रामीण जीवन का संघर्ष
सुंदरनगर और नंदूप का इलाका ऐतिहासिक रूप से टाटा-खड़गपुर और टाटा-चाईबासा रेल खंड के बीच एक महत्वपूर्ण ग्रामीण बेल्ट रहा है।
-
औद्योगिक विस्तार की मार: जमशेदपुर के विस्तार के साथ ही इन इलाकों में रेल ट्रैफिक कई गुना बढ़ गया है। इतिहास गवाह है कि सुंदरनगर और आसपास के गांवों के लोग दशकों से इन पटरियों का इस्तेमाल आवाजाही के लिए करते रहे हैं।
-
बुनियादी सुविधाओं का अभाव: नंदूप जैसे गांवों में आज भी उचित ड्रेनेज या शौचालयों की कमी के कारण बुजुर्गों को रेलवे ट्रैक के आसपास जाने पर मजबूर होना पड़ता है। पूर्व में भी सुंदरनगर थाना क्षेत्र के विभिन्न रेल खंडों पर इस तरह के दर्जनों हादसे दर्ज किए जा चुके हैं।
-
सुरक्षा और फेंसिंग की मांग: ग्रामीणों का आरोप है कि रिहायशी इलाकों से गुजरने वाली इन पटरियों के किनारे न तो उचित फेंसिंग है और न ही कोई फुट-ओवरब्रिज, जिससे हर साल 'नंदूप' जैसे गांवों के लोग अपनी जान गंवाते हैं।
रेलवे और स्थानीय प्रशासन पर उठते सवाल
इस हादसे के बाद एक बार फिर रेलवे ट्रैक की सुरक्षा और स्थानीय जागरूकता पर बहस छिड़ गई है।
-
परिजनों का दर्द: कमल सोय और अन्य परिजनों का कहना है कि यदि वहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होते या पटरियों के किनारे घेराबंदी होती, तो उनके पिता आज जीवित होते।
-
पुलिस की अपील: सुंदरनगर पुलिस ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे रेलवे ट्रैक पार करते समय ईयरफोन का इस्तेमाल न करें और बेहद सावधानी बरतें।
-
रेलवे की भूमिका: अब देखना यह होगा कि क्या रेलवे प्रशासन इस 'डेंजर जोन' को सुरक्षित करने के लिए कोई ठोस कदम उठाता है या फिर एक और बुजुर्ग की मौत केवल फाइलों में दबकर रह जाएगी।
सुंदरनगर के नंदूप गांव में हुई यह घटना समाज और प्रशासन दोनों के लिए एक चेतावनी है। 65 साल के सिदयू सोय की मौत केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि उन व्यवस्थाओं की विफलता है जो ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी पटरी पार करने को मजबूरी बनाए हुए हैं। एक परिवार ने अपने मुखिया को खो दिया है और गांव में सन्नाटा पसरा है। सुंदरनगर पुलिस अपनी कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रही है, लेकिन पटरी पर बिखरा खून इस बात की गवाही दे रहा है कि सुरक्षा के बिना विकास अधूरा है।
What's Your Reaction?


