Jamshedpur Illegal Blue Stone Mining : पोटका के जंगलों में ‘नीले खजाने’ की लूट, RTI एक्टिविस्ट ने पीएमओ को लिखा पत्र!
जमशेदपुर के पोटका इलाके में हो रहा अवैध ‘नीला पत्थर’ उत्खनन! RTI एक्टिविस्ट सिर्मा देवगम ने पीएमओ को पत्र लिखकर उठाई कार्रवाई की मांग। जानिए पूरा मामला।

जमशेदपुर: पोटका अंचल के हरिना पंचायत के धातकीडीह इलाके में पिछले कई वर्षों से कीमती 'नीले पत्थर' का अवैध उत्खनन किया जा रहा है। इस खनन के चलते जहां हजारों पेड़ों की कटाई कर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, वहीं सरकार को भी भारी राजस्व क्षति हो रही है। समाजसेवी व RTI एक्टिविस्ट सिर्मा देवगम ने इस अवैध खनन को रोकने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को पत्र लिखा है।
क्या है ‘नीला पत्थर’ और क्यों की जा रही इसकी खुदाई?
नीला पत्थर एक दुर्लभ खनिज है, जिसका इस्तेमाल निर्माण कार्यों, सजावट और कभी-कभी आभूषणों में भी किया जाता है। पोटका के जंगलों में यह पत्थर बड़ी मात्रा में पाया जाता है। यही कारण है कि खनन माफिया इसे अवैध रूप से निकालकर ऊंचे दामों में बाजार में बेच रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, रवि टुडू नामक व्यक्ति पिछले कई वर्षों से इस धंधे में लिप्त है और उसने बड़े पैमाने पर इस खनन को अंजाम दिया है।
अवैध खनन से हो रहा बड़ा नुकसान
RTI एक्टिविस्ट सिर्मा देवगम ने अपने पत्र में यह दावा किया है कि इस खनन के कारण सरकार को भारी राजस्व हानि हो रही है। साथ ही, जंगलों में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की जा रही है, जिससे पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की अवैध गतिविधियां न केवल जंगलों को बंजर बना देती हैं बल्कि भूजल स्तर भी तेजी से गिरता है।
क्या प्रशासन की मिलीभगत से चल रहा है खेल?
सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि इतने वर्षों से यह अवैध खनन चल रहा है, लेकिन प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की? देवगम के अनुसार, इस खनन में स्थानीय थाना और वन विभाग की मिलीभगत हो सकती है।
उन्होंने आरोप लगाया है कि पुलिस और वन विभाग के अधिकारी इस अवैध खनन से अपनी मोटी कमाई कर रहे हैं और इसी वजह से वे कार्रवाई करने से बचते हैं।
PMO को पत्र लिखकर क्या मांग की गई?
सिर्मा देवगम ने अपने पत्र में तीन मुख्य मांगें रखी हैं:
- अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाई जाए।
- इस धंधे में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।
- पुलिस और वन विभाग की संलिप्तता की गहराई से जांच हो और दोषियों को दंडित किया जाए।
क्या होगा अगला कदम?
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या प्रधानमंत्री कार्यालय इस मामले में कोई कदम उठाता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। फिलहाल, स्थानीय लोग और पर्यावरणविद् इस मुद्दे को लेकर आवाज उठा रहे हैं और सरकार से उचित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
क्या सरकार इस अवैध खनन को रोकने के लिए सख्त कदम उठाएगी, या फिर ‘नीले खजाने’ की यह लूट यूं ही जारी रहेगी?
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