Dhanbad Tragedy: कोयला डंपिंग की चपेट में युवक की दर्दनाक मौत, पुलिस को घेरे ग्रामीण!
धनबाद के झरिया में कोयला डंपिंग की चपेट में आने से युवक संजय मल्लाह की दर्दनाक मौत! ग्रामीणों ने पुलिस को रोका, उच्च अधिकारियों को बुलाने की मांग। झरिया में कब रुकेगा मौत का सिलसिला? पढ़ें पूरी खबर।

धनबाद, झरिया: कोयला नगरी धनबाद में एक और दर्दनाक हादसा हुआ है। झरिया के गोल्डन पहाड़ी इलाके में मंगलवार को कोयला डंपिंग की चपेट में आकर युवक संजय मल्लाह की मौत हो गई। हादसा इतना भयावह था कि जब तक आसपास के लोग कुछ समझ पाते, तब तक संजय की जान जा चुकी थी। घटना की सूचना मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे और शव की शिनाख्त की।
लेकिन जब पुलिस संजय का शव उठाने पहुंची, तो ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया। उन्होंने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए सीनियर अधिकारियों को बुलाने की मांग की। देखते ही देखते घटनास्थल पर भीड़ इकट्ठा हो गई और हालात तनावपूर्ण हो गए।
कैसे हुआ हादसा?
झरिया का गोल्डन पहाड़ी इलाका कोयला खनन और अवैध डंपिंग के लिए कुख्यात है। यहां बीसीसीएल और कोल माफिया के गठजोड़ के कारण सुरक्षा मानकों को दरकिनार कर कोयला डंप किया जाता है। बताया जा रहा है कि संजय मल्लाह कोयला डंपिंग स्थल के पास मौजूद था, तभी अचानक कोयले का बड़ा हिस्सा खिसक गया और वह उसकी चपेट में आ गया।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस तरह की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं, लेकिन प्रशासन और खनन कंपनियों ने कभी कोई ठोस कदम नहीं उठाया। अवैध खनन और डंपिंग की वजह से इलाके में कई बार हादसे हो चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
गुस्साए ग्रामीणों ने पुलिस को रोका
घटना की सूचना मिलते ही झरिया पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाने की कोशिश की। लेकिन इस दौरान ग्रामीणों ने पुलिस का घेराव कर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन की लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ और जब तक उच्च अधिकारी मौके पर नहीं आएंगे, वे शव उठाने नहीं देंगे।
ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि अगर इलाके में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होते, तो यह हादसा नहीं होता। उनका कहना था कि खनन कंपनियां सिर्फ मुनाफे की परवाह करती हैं और मजदूरों या स्थानीय लोगों की सुरक्षा के लिए कोई कदम नहीं उठाती।
झरिया: कोयला खदानों का 'काल'!
धनबाद का झरिया इलाका कोयला खदानों के लिए मशहूर है, लेकिन यहां मौत हर कदम पर मंडराती है। कोयले की काली कमाई से भले ही कई लोग अमीर बने हैं, लेकिन इसी कोयले ने सैकड़ों जिंदगियां लील ली हैं। झरिया में अवैध खनन, गैस रिसाव और जमीन धंसने की घटनाएं आम हैं।
-
2019 में भी गोल्डन पहाड़ी इलाके में एक मजदूर की कोयले के ढेर में दबकर मौत हो गई थी।
-
2022 में लोयाबाद क्षेत्र में इसी तरह का हादसा हुआ था, जिसमें दो लोगों की जान चली गई थी।
बावजूद इसके, प्रशासन और कोल इंडिया ने कभी इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया। बीसीसीएल (भारत कोकिंग कोल लिमिटेड) की लापरवाही के कारण झरिया के कई इलाकों में हर साल दर्जनों लोग अपनी जान गंवा देते हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी?
हादसे को लेकर प्रशासन ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है। झरिया थाना प्रभारी के अनुसार, "हम घटनास्थल पर पहुंचे थे, लेकिन स्थानीय लोगों ने विरोध किया। स्थिति को शांत करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को बुलाया गया। मामले की जांच के बाद ही किसी पर कार्रवाई की जाएगी।"
वहीं, बीसीसीएल अधिकारियों का कहना है कि "कोयला डंपिंग एरिया में आम लोगों का जाना प्रतिबंधित है। हम मामले की जांच करेंगे कि संजय वहां कैसे पहुंचा और सुरक्षा मानकों में कहां चूक हुई।"
ग्रामीणों ने की मुआवजे की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि संजय मल्लाह गोल्डन पहाड़ी इलाके में रहता था और मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालता था। उसकी अचानक मौत से परिवार सदमे में है। ग्रामीणों ने प्रशासन से परिवार को उचित मुआवजा देने और अवैध कोयला डंपिंग पर रोक लगाने की मांग की है।
कब रुकेगा झरिया में मौत का खेल?
धनबाद का झरिया इलाका देश के सबसे बड़े कोयला भंडारों में से एक है, लेकिन यहां मौत का साया कभी नहीं हटता। अवैध खनन, कोयला डंपिंग और गैस रिसाव के कारण हर साल कई लोग अपनी जान गंवा रहे हैं।
-
प्रशासन सिर्फ हादसे के बाद बयान जारी करता है, लेकिन अवैध खनन और डंपिंग पर कोई ठोस कदम नहीं उठाता।
-
कोयला माफिया हर साल करोड़ों का अवैध धंधा करते हैं, लेकिन गरीब मजदूरों की जान की कोई कीमत नहीं होती।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द ही सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए गए, तो आने वाले दिनों में झरिया में और भी मौतें होंगी। प्रशासन को चाहिए कि वह इस हादसे से सबक ले और झरिया में कोयला डंपिंग और अवैध खनन को पूरी तरह बंद करे।
What's Your Reaction?






