Bihar Election 2025: NDA की बढ़त, महागठबंधन को झटका, जानें कौन बनेगा CM?
बिहार चुनाव 2025: कौन बनेगा किंग? ECI की घोषणा शुरू! क्या 66.90% रिकॉर्ड वोटिंग ने बदल दिया समीकरण? जानें NDA और महागठबंधन की महाटक्कर का LIVE हाल, कौन है आगे?
पटना, बिहार: पूरे देश की निगाहें आज बिहार की 243 विधानसभा सीटों पर टिकी हुई हैं। बिहार चुनाव परिणाम 2025 के अंतिम नतीजों का ऐलान भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की तरफ से शुरू हो चुका है, और हर मिनट के साथ राज्य की सियासी धड़कनें तेज होती जा रही हैं। मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ NDA (राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन) और महागठबंधन के बीच है, लेकिन इस बार का चुनाव न सिर्फ कांटे की टक्कर के लिए, बल्कि इतिहास में दर्ज रिकॉर्ड तोड़ मतदान के लिए भी याद किया जाएगा।
आंकड़ों की बात करें तो दो चरणों में हुए चुनाव में 66.90 प्रतिशत का ऐतिहासिक मतदान दर्ज किया गया, जो पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले 9.6 फीसदी ज्यादा है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल ने जानकारी दी कि अंतिम चरण में तो 68.79 प्रतिशत रिकॉर्ड वोटिंग हुई। सवाल यह है कि रिकॉर्ड तोड़ मतदान की यह बंपर लहर किस गठबंधन के पक्ष में गई है?
History of Power - बिहार की सत्ता का इतिहास: क्या है इस बार का समीकरण?
बिहार की राजनीति हमेशा से ही सामाजिक न्याय, जातिगत समीकरण और विकास के दावों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। NDA खेमे में जनता दल यूनाइटेड (JDU), भारतीय जनता पार्टी (BJP), लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) और हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) जैसे दिग्गज दल हैं। वहीं, महागठबंधन में राष्ट्रीय जनता दल (RJD), कांग्रेस, विकासशील इंसान पार्टी (VIP), वाम दल और इंडियन इंक्लूसिव पार्टी (IIP) एक मजबूत चुनौती पेश कर रहे हैं।
पिछले कई दशकों में बिहार ने स्थिर सरकारें भी देखी हैं और राजनीतिक अस्थिरता का दौर भी झेला है। लेकिन 2025 के इस चुनाव में, दो मुख्य बातें निर्णायक साबित हो सकती हैं: एंटी-इनकम्बेंसी और युवाओं का उत्साह, जो रिकॉर्ड मतदान में साफ झलका है।
Exit Polls - एग्जिट पोल का 'रहस्यमय' गणित: कौन आगे, कौन पीछे?
दूसरे चरण के मतदान के तुरंत बाद जारी हुए अधिकांश एग्जिट पोल राज्य में NDA सरकार की वापसी का संकेत दे रहे थे। इन एग्जिट पोल्स ने महागठबंधन को कड़ी चुनौती देते हुए बहुमत के करीब या उससे आगे दिखाया। हालांकि, कम से कम दो एग्जिट पोल ऐसे भी थे जिन्होंने कांटे की टक्कर और किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने की भविष्यवाणी की थी।
जानकार मानते हैं: "66.90% का ऐतिहासिक मतदान, खासकर ग्रामीण और युवा मतदाताओं की बड़ी भागीदारी, एग्जिट पोल के अनुमानों को पूरी तरह से उलट सकती है। बिहार का वोटर इस बार शांत रहा, जिसने अंतिम क्षण तक अपने पत्ते नहीं खोले।"
The Unknown Factors - प्रशांत किशोर और ओवैसी: क्यों रहे कमजोर?
एग्जिट पोल के आंकड़ों में एक और खास बात उभरकर सामने आई: प्रशांत किशोर की अगुवाई वाली जन सुराज पार्टी का डेब्यू काफी कमजोर रहा। वहीं, असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM), जिसने सीमांचल क्षेत्र में पिछली बार कुछ सीटें जीती थीं, इस बार कमजोर प्रदर्शन करती नजर आ रही है। अगर ये क्षेत्रीय दल उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं करते हैं, तो इसका सीधा फायदा NDA या महागठबंधन में से किसी एक को मिलना तय है।
ECI द्वारा अंतिम नतीजों का ऐलान शुरू होते ही, अब सारा ध्यान काउंटिंग सेंटर्स पर है। शुरुआती रुझान हर आधे घंटे में बदल रहे हैं, जिससे साफ है कि यह लड़ाई आखिरी वोट की गिनती तक चलेगी। यह चुनाव बिहार के राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करेगा और यह भी साबित करेगा कि क्या रिकॉर्ड तोड़ मतदान ने वाकई सत्ता के समीकरणों को पलट दिया है।
क्या आप जानना चाहेंगे कि शुरुआती रुझानों में NDA और महागठबंधन के बीच सीटों का अंतर क्या चल रहा है?
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