Tata Power Innovation – स्कूल के बच्चों ने बनाया 'स्मार्ट ग्रीन होम', जानिए क्या है खास!
जमशेदपुर के सरदार वल्लभभाई पटेल स्कूल के छात्रों ने 'स्मार्ट ग्रीन होम' मॉडल बनाकर विज्ञान प्रतियोगिता में दूसरा स्थान हासिल किया। जानिए कैसे यह नया आविष्कार घरों को ऊर्जा बचाने और पर्यावरण के अनुकूल बनाने में मदद करेगा!

जमशेदपुर: क्या हमारे घर भविष्य में इतने स्मार्ट और ग्रीन हो सकते हैं कि वे खुद ऊर्जा बचाएं और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाएं? इस सवाल का जवाब खोज निकाला है सरदार वल्लभभाई पटेल स्कूल के होनहार छात्रों ने, जिन्होंने 'स्मार्ट ग्रीन होम' मॉडल तैयार कर विज्ञान प्रतियोगिता में दूसरा स्थान हासिल किया। टाटा पावर एलिग फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में लक्ष्मीनगर उत्क्रमित उच्च विद्यालय के छात्रों विक्की कुमार (कक्षा 7) और कृतिका कुमारी (कक्षा 8) के मॉडल को विशेष सराहना मिली।
लेकिन सवाल यह है कि क्या यह मॉडल भविष्य में हमारे घरों की तस्वीर बदल सकता है? और आखिर 'स्मार्ट ग्रीन होम' का असली मतलब क्या है? आइए, जानते हैं पूरी कहानी!
क्या है 'स्मार्ट ग्रीन होम' और क्यों है यह खास?
आज के दौर में तेजी से बढ़ते प्रदूषण और ऊर्जा संकट ने वैज्ञानिकों को इस दिशा में सोचने पर मजबूर कर दिया है कि कैसे घरों को अधिक ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण के अनुकूल बनाया जाए। 'स्मार्ट ग्रीन होम' का मतलब है ऐसे घर जो बिजली की बचत करें, सौर ऊर्जा का उपयोग करें, जल संरक्षण करें और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों को कम करें।
सौर ऊर्जा पैनल – घर की छत पर लगे पैनल सूरज की रोशनी से बिजली उत्पन्न करेंगे।
वर्षा जल संचयन प्रणाली – पानी की बर्बादी रोकने के लिए बारिश के पानी का संचयन किया जाएगा।
स्मार्ट सेंसर लाइटिंग – जब कमरा खाली होगा, तो लाइट अपने आप बंद हो जाएगी, जिससे ऊर्जा की बचत होगी।
गर्मी और ठंडक संतुलन तकनीक – दीवारों और खिड़कियों में ऐसी संरचना होगी, जिससे गर्मी में ठंडक और सर्दी में गर्माहट बनी रहेगी।
प्रतियोगिता में बच्चों ने कैसे पेश किया अपना मॉडल?
टाटा पावर एलिग फाउंडेशन के इस कार्यक्रम में कई स्कूलों के छात्रों ने भाग लिया, लेकिन विक्की कुमार और कृतिका कुमारी के 'स्मार्ट ग्रीन होम' मॉडल ने खास पहचान बनाई।
छात्रों ने एक छोटे प्रोटोटाइप के जरिए दिखाया कि कैसे उनका घर पूरी तरह ऊर्जा कुशल और पर्यावरण-अनुकूल बनाया जा सकता है।
उन्होंने सौर ऊर्जा, पानी बचत तकनीक, और स्वचालित स्मार्ट लाइटिंग सिस्टम जैसी सुविधाओं को अपने मॉडल में शामिल किया।
जजों ने उनके अनूठे और व्यवहारिक विचारों की सराहना की, जिससे वे दूसरे स्थान पर रहे।
क्या कहता है इतिहास? कैसे बदला घरों का स्वरूप?
अगर हम पीछे मुड़कर देखें, तो मानव सभ्यता की शुरुआत से ही घरों के निर्माण की तकनीक बदली है।
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