Sini Terror: जंगल से भालू ने गांव में मचाया आतंक, ग्रामीण पर जानलेवा हमला!
झारखंड के सीनी ओपी क्षेत्र में जंगली भालू के हमले से हड़कंप! खतुआकुदर गांव में ग्रामीण पर जानलेवा हमला, वन विभाग ने मोर्चा संभाला। जानिए पूरी घटना।

झारखंड के सीनी ओपी क्षेत्र के खतुआकुदर गांव में जंगली भालू की दस्तक ने लोगों को दहशत में डाल दिया है। बुधवार शाम करीब 4 बजे गांववालों ने जब भालू को घूमते देखा, तो पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई।
इस दौरान गांव के बुजुर्ग गंजला हांसदा पर भालू ने हमला कर दिया, जिससे वे बुरी तरह घायल हो गए। वन विभाग और पुलिस की टीम तुरंत हरकत में आई और भालू की खोज शुरू कर दी।
कैसे हुआ हमला? जानिए डरावनी कहानी
बुधवार शाम 4 बजे: खतुआकुदर गांव के पास ग्रामीणों ने पहली बार भालू को देखा।
अचानक भालू गांव के अंदर घुस आया, जिससे गांववाले इधर-उधर भागने लगे।
गंजला हांसदा अपने घर के बाहर बैठे थे, तभी भालू ने उन पर हमला कर दिया।
गंजला के नाक पर गहरी चोट आई, पर किस्मत से उनकी जान बच गई।
चीख-पुकार सुनकर लोग लाठी-डंडे लेकर दौड़े, जिसके बाद भालू जंगल की ओर भाग गया।
गांव में डर का माहौल, वन विभाग अलर्ट!
भालू के हमले के बाद गांववालों में खौफ है। सीनी ओपी प्रभारी राजेंद्र कुमार ने बताया कि वन विभाग की टीम लगातार इलाके में गश्त कर रही है और भालू को ट्रैक करने की कोशिश जारी है।
ग्रामीणों को सतर्क रहने और रात में घर से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है।
वन विभाग ने इलाके में पिंजरे और जाल लगाने की योजना बनाई है।
घायल गंजला हांसदा का इलाज कराया गया, फिलहाल उनकी हालत स्थिर है।
भालू के हमले! झारखंड में यह पहली बार नहीं
झारखंड के जंगलों में भालुओं का इंसानी बस्तियों में घुसना और हमला करना नया नहीं है।
2022 में लातेहार में भालू ने 3 ग्रामीणों पर हमला किया था, जिनमें से 2 की मौत हो गई थी।
2020 में गुमला जिले में भी भालू ने एक महिला को मार डाला था।
2018 में रांची के पास जंगल से आए भालू को पकड़ने में वन विभाग को 3 दिन लगे थे।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि भोजन और पानी की कमी के कारण भालू अब गांवों की ओर आ रहे हैं।
क्यों बढ़ रहे हैं भालू के हमले?
मानव अतिक्रमण: जंगलों में गांवों और सड़कों के बढ़ने से भालुओं के लिए जगह कम हो रही है।
भोजन की तलाश: जंगलों में भोजन की कमी होने से जंगली जानवर गांवों में घुस रहे हैं।
अवैध कटाई और खनन: जंगलों के नष्ट होने से भालू इंसानी बस्तियों की ओर बढ़ने लगे हैं।
वन विभाग का कहना है कि गांववालों को सतर्क रहने की जरूरत है और भालू दिखने पर तुरंत सूचना देनी चाहिए।
अब आगे क्या? वन विभाग की रणनीति
भालू को पकड़ने के लिए ट्रैप कैमरे और पिंजरे लगाए जाएंगे।
गांववालों को सतर्क करने के लिए वन विभाग जागरूकता अभियान चलाएगा।
भालू को पकड़कर सुरक्षित जंगल में छोड़ा जाएगा, ताकि गांववालों को कोई नुकसान न हो।
कब रुकेगी ऐसी घटनाएं?
झारखंड में भालुओं के हमले बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन समस्या का असली कारण जंगलों का घटता दायरा और इंसानी दखल है।
क्या सरकार जंगलों के संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाएगी?
क्या वन विभाग भालुओं को वापस जंगलों तक सीमित रख पाएगा?
जब तक वन्यजीव और इंसानों के बीच सही संतुलन नहीं बनेगा, तब तक ऐसी घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी।
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