Mohanpur Fraud: बैंक अधिकारी बनकर लाखों की ठगी, साइबर ठग गिरफ्तार!
मोहनपुर के बांक गांव में साइबर ठग गिरफ्तार! बैंक अधिकारी बनकर लाखों रुपये की ठगी करने वाला अपराधी पुलिस के शिकंजे में। जानें कैसे पकड़ में आया शातिर ठग।

झारखंड के मोहनपुर थाना क्षेत्र के बांक गांव में बुधवार की देर रात लातेहार पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक कुख्यात साइबर ठग को गिरफ्तार किया। यह ठग बैंक अधिकारी बनकर लोगों को झांसे में लेकर लाखों रुपये की ठगी कर चुका था।
पुलिस ने ठग को मोबाइल लोकेशन ट्रैक कर उसके घर से दबोच लिया। इस कार्रवाई में मोहनपुर पुलिस ने भी लातेहार पुलिस का सहयोग किया। फिलहाल, पुलिस उससे पूछताछ कर रही है और ठगी के अन्य मामलों से भी जोड़कर जांच की जा रही है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर ये ठग इतने आसानी से लोगों को कैसे बेवकूफ बना रहे हैं और इनके गिरोह की जड़ें कहां तक फैली हैं?
कैसे हुई ठगी? बैंक अधिकारी बनकर उड़ाए लाखों!
गिरफ्तार साइबर ठग फोन कॉल के जरिए लोगों को झांसा देता था। वह बैंक अधिकारी बनकर लोगों से उनका ओटीपी, डेबिट कार्ड डिटेल और पिन पूछता और फिर उनके खातों से लाखों रुपये उड़ा लेता।
इस बार भी उसने एक व्यक्ति को बैंक अधिकारी बनकर फोन किया, भरोसे में लेकर उसका ओटीपी हासिल किया और कुछ ही मिनटों में उसके खाते से लाखों रुपये निकाल लिए। पीड़ित ने जब बैंक से संपर्क किया, तब उसे ठगी का अहसास हुआ और फौरन पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने कैसे पकड़ा साइबर ठग?
पुलिस ने ठगी की शिकायत मिलने के बाद तकनीकी निगरानी (Cyber Tracking) शुरू की।
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सबसे पहले पुलिस ने ठग का मोबाइल नंबर ट्रेस किया।
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फिर लेन-देन के डिजिटल रिकॉर्ड खंगाले, जिससे लोकेशन की पुष्टि हुई।
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साइबर ठग के फोन की GPS लोकेशन बांक गांव में पाई गई।
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इसके बाद लातेहार पुलिस और मोहनपुर पुलिस ने संयुक्त ऑपरेशन कर रात में ही उसके घर पर दबिश दी और उसे गिरफ्तार कर लिया।
झारखंड में साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क!
झारखंड खासतौर पर जामताड़ा, देवघर, गिरिडीह और दुमका जैसे जिलों में साइबर ठगी का गढ़ बन चुका है। यहां से देशभर में ठगी के कॉल किए जाते हैं।
कैसे काम करता है साइबर गिरोह?
फर्जी बैंक अधिकारी बनकर लोगों को फोन करते हैं।
एटीएम ब्लॉक होने या केवाईसी अपडेट का झांसा देते हैं।
ओटीपी या बैंक डिटेल लेते ही खाते से पैसे निकाल लेते हैं।
पैसे को कई खातों में ट्रांसफर कर बैंक ट्रेसिंग से बचते हैं।
अब क्या करेगी पुलिस?
पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि गिरफ्तार ठग किसी बड़े साइबर गैंग का हिस्सा तो नहीं।
उसके मोबाइल और बैंक ट्रांजेक्शन की गहराई से जांच की जा रही है।
पुलिस को उम्मीद है कि इस ठग के पकड़े जाने से कई और साइबर अपराधी बेनकाब हो सकते हैं।
साइबर ठगों से बचने के लिए क्या करें?
कभी भी किसी को अपना OTP, डेबिट/क्रेडिट कार्ड नंबर, पिन या पासवर्ड न बताएं।
बैंक अधिकारी बनकर कॉल करने वाले से सतर्क रहें।
अगर आपको कोई संदिग्ध कॉल आता है, तो तुरंत बैंक या साइबर क्राइम सेल में शिकायत करें।
ठगी का गढ़ बनता झारखंड, सतर्क रहने की जरूरत!
झारखंड में साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। कई गांवों में यह अपराध एक अंडरग्राउंड इंडस्ट्री बन चुका है, जहां युवा फर्जी कॉल कर लाखों रुपये कमा रहे हैं।
लातेहार पुलिस की इस कार्रवाई से साइबर अपराधियों में डर जरूर पैदा होगा, लेकिन जनता को भी सतर्क रहने की जरूरत है। अगर हम चौकस रहेंगे तो इन ठगों का खेल जल्द खत्म हो सकता है।
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