Golmuri Salute : गोलमुरी में पूर्व सैनिकों ने दी भगत सिंह को शौर्यांजलि, गूंजा इंकलाब का नारा, देश न झुकने देने का लिया महासंकल्प
जमशेदपुर के गोलमुरी शहीद स्मारक पर अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद ने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किया। थल, नभ और जल सेना के रिटायर्ड जांबाजों ने वीर सपूतों को याद कर देश की आन-बान-शान की रक्षा का संकल्प लिया। पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
जमशेदपुर/गोलमुरी, 23 मार्च 2026 – लौहनगरी का गोलमुरी इलाका आज सुबह "भारत माता की जय" और "वीर शहीद अमर रहें" के नारों से गुंजायमान हो उठा। अवसर था शहीद दिवस का, जहाँ अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के तत्वावधान में देश के महान क्रांतिकारी भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को भावभीनी शौर्यांजलि अर्पित की गई। गोलमुरी शहीद स्मारक पर आयोजित इस कार्यक्रम में उन जांबाजों का जमावड़ा लगा, जिन्होंने कभी सरहदों पर देश की रक्षा की थी और आज वे अपने पूर्वजों की शहादत को नमन करने जुटे थे। कार्यक्रम की गरिमा तब और बढ़ गई जब सेना के तीनों अंगों—थल सेना, वायु सेना और नौसेना—के सेवानिवृत्त सैनिकों ने एक साथ खड़े होकर तिरंगे को नमन किया।
शहीद स्मारक पर 'शौर्य' का संगम: मां भारती का पूजन
कार्यक्रम का आगाज पूर्ण सैन्य अनुशासन और देशभक्ति के माहौल में हुआ।
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दीप प्रज्ज्वलन: परिषद के अध्यक्ष श्री विनय कुमार यादव ने मुख्य अतिथि के रूप में दीप जलाकर और मां भारती के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरुआत की।
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पुष्पांजलि अर्पण: स्मारक पर एक-एक कर सभी पूर्व सैनिकों ने पुष्प अर्पित किए। वरिष्ठ सदस्य श्री सुखविंदर सिंह ने इस दौरान उन सभी अनाम शहीदों को भी याद किया, जिन्होंने गुमनामी में रहकर देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।
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भावुक क्षण: जब सेना के बैंड की धुन और शहीदों के जयकारे गूंजे, तो वहां मौजूद कई पूर्व सैनिकों की आंखें नम हो गईं। यह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सैनिक का दूसरे शहीद सैनिक के प्रति सम्मान का प्रतीक था।
एक ऐतिहासिक संकल्प: "देश न कभी झुका है, न झुकेगा"
इस सभा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वह सामूहिक शपथ थी, जिसे परिषद के सभी सदस्यों ने दोहराया।
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अखंडता की शपथ: सभी पूर्व सैनिकों ने हाथ उठाकर संकल्प लिया कि जिस आजादी को भगत सिंह और उनके साथियों ने फांसी के फंदे को चूमकर हासिल किया था, उसकी रक्षा वे आखिरी सांस तक करेंगे।
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नई पीढ़ी को संदेश: विनय कुमार यादव ने अपने संबोधन में कहा कि युवाओं को भगत सिंह के विचारों से सीखना चाहिए। शहादत केवल मरने का नाम नहीं, बल्कि देश के लिए जीने का नाम है।
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संयुक्त सहभागिता: यह दुर्लभ संयोग था कि गोलमुरी के इस छोटे से मैदान में भारतीय सेना के तीनों अंगों के प्रतिनिधि एक साथ मौजूद थे, जो देश की सामूहिक ताकत को दर्शा रहा था।
23 मार्च का इतिहास और जमशेदपुर का जज्बा
23 मार्च 1931 का वह काला दिन भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है, जब अंग्रेजों ने डर के मारे भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को निर्धारित समय से पहले ही फांसी दे दी थी।
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क्रांति की मशाल: जमशेदपुर, जो अपनी औद्योगिक ताकत के लिए जाना जाता है, यहाँ की मिट्टी में हमेशा से देशभक्ति का जज्बा रहा है। गोलमुरी का शहीद स्मारक शहर के उन चुनिंदा स्थानों में से एक है जो हर साल युवाओं को राष्ट्रवाद की याद दिलाता है।
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पूर्व सैनिकों की भूमिका: अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद शहर में न केवल ऐसे आयोजनों के माध्यम से लोगों को जागरूक करती है, बल्कि संकट के समय नागरिक प्रशासन की मदद के लिए भी हमेशा तैयार रहती है।
उपस्थित प्रमुख व्यक्तित्व और एकजुटता
कार्यक्रम को सफल बनाने में शहर के कई सम्मानित पूर्व सैनिकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
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प्रमुख सदस्य: सुखविंदर सिंह, मनोज कुमार सिंह, विश्वजीत, सी.सी. पूरी, उमेश शर्मा, राजीव कुमार, शैलेंद्र कुमार, संजय सिंह, बिरजू, दया भूषण और अनिल कुमार सिंह सहित भारी संख्या में पूर्व सैनिक मौजूद रहे।
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एकजुटता का संदेश: कार्यक्रम के अंत में सभी ने एक स्वर में कहा कि वे सेवानिवृत्त जरूर हुए हैं, लेकिन उनका कर्तव्य आज भी मां भारती के प्रति उतना ही अटूट है जितना वर्दी पहनने के दौरान था।
जमशेदपुर के गोलमुरी में शहीद दिवस का यह आयोजन केवल एक श्रद्धांजलि सभा नहीं थी, बल्कि यह उन मूल्यों का पुनरुद्धार था जिसके लिए भगत सिंह ने अपनी जान दी थी। पूर्व सैनिकों की इस सक्रियता ने शहर के युवाओं को यह संदेश दिया है कि राष्ट्र सर्वोपरि है। जब तक हमारे समाज में शहादत का सम्मान करने वाले लोग मौजूद हैं, तब तक "देश न कभी झुका है, न कभी झुकेगा" का नारा बुलंद रहेगा।
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