Sonari Navratri Puja: सोनारी के उपकार संघ में मां कुष्मांडा की आराधना, 181 टोकरियों से सजा दरबार, कल निकलेगी बाना अगवानी

सोनारी के बुधराम मोहल्ला स्थित उपकार संघ में नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की भव्य पूजा संपन्न हुई। 181 जवारा टोकरी और 75 ज्योति कलशों की चमक के बीच छत्तीसगढ़ी संस्कृति के रंग बिखरे। कल होने वाली विशेष 'बाना अगवानी' और बजरंगबली के ध्वजारोहण की पूरी जानकारी यहाँ देखें।

Mar 23, 2026 - 19:47
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Sonari Navratri Puja: सोनारी के उपकार संघ में मां कुष्मांडा की आराधना, 181 टोकरियों से सजा दरबार, कल निकलेगी बाना अगवानी
Sonari Navratri Puja: सोनारी के उपकार संघ में मां कुष्मांडा की आराधना, 181 टोकरियों से सजा दरबार, कल निकलेगी बाना अगवानी

जमशेदपुर/सोनारी, 23 मार्च 2026 – लौहनगरी के सोनारी स्थित बुधराम मोहल्ला, कमल चौक इन दिनों चैत्र नवरात्रि के पावन रंग में सराबोर है। यहाँ के प्रसिद्ध उपकार संघ में रविवार को शक्ति स्वरूपा मां कुष्मांडा की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धा और भक्ति का संगम यहाँ तब देखने को मिला जब 181 जवारा टोकरियों के बीच माता रानी का दरबार जगमगा उठा। छत्तीसगढ़ी परंपराओं को जीवंत रखते हुए आयोजित इस महा-अनुष्ठान में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। संध्या आरती के बाद गूंजे जसगीत भजनों ने पूरे सोनारी क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया है। संघ के अध्यक्ष सतपाल साहू ने बताया कि यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज की एकजुटता का प्रतीक है।

कुष्मांडा पूजन और 75 ज्योति कलशों की दिव्य चमक

नवरात्रि के चौथे दिन का महत्व आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष माना जाता है, जो सृष्टि की आदि-शक्ति को समर्पित है।

  • अखंड ज्योति का प्रताप: उपकार संघ के दरबार में इस वर्ष 75 अखंड ज्योति कलश प्रज्वलित किए गए हैं। इन कलशों की लौ भक्तों की अटूट आस्था का प्रमाण है, जो नौ दिनों तक लगातार प्रज्वलित रहती हैं।

  • 181 जवारा टोकरियाँ: छत्तीसगढ़ी संस्कृति में 'जवारा' बोने की परंपरा बहुत प्राचीन है। इसे समृद्धि और प्रकृति की शक्ति का प्रतीक माना जाता है। 181 टोकरियों में उगते जवारे माता के दरबार की शोभा बढ़ा रहे हैं।

  • सुरेश शर्मा जी की आरती: शाम 7 बजे संघ के पुरोहित श्री सुरेश शर्मा ने भव्य संध्या आरती प्रारंभ करवाई। शंख और घंटों की ध्वनि के बीच श्रद्धालुओं ने माता के चरणों में शीश नवाया।

जसगीत का जादू और छत्तीसगढ़ी समाज की उपस्थिति

उपकार संघ की अपनी जसगीत भजन मंडली ने आरती के पश्चात माता रानी के गौरव का गान किया।

  1. सांस्कृतिक मेलजोल: चतुर्थी के अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ी साहू समाज की प्रमुख सदस्य जया साहू, लक्ष्मी साहू, गीतांजलि साहू और सरस्वती साहू उपस्थित रहीं।

  2. जसगीत की गूँज: जसगीत छत्तीसगढ़ का पारंपरिक भजन रूप है, जो माता की शक्ति और लीलाओं का बखान करता है। देर रात तक भक्त इन भजनों की धुन पर झूमते नजर आए।

कल का खास आकर्षण: बाना अगवानी और बजरंगबली का ध्वज

कल यानी महापंचमी के दिन उपकार संघ में एक बहुत ही दुर्लभ और भव्य कार्यक्रम होने जा रहा है, जिसे देखने के लिए दूर-दराज से लोग पहुँचते हैं।

  • बाना अगवानी (शाम 4 बजे): लोहार के घर से माता का 'बाना' लाया जाएगा। यह एक प्राचीन रस्म है जिसे 'बाना अगवानी' कहा जाता है। बाना को माता के शक्ति के प्रतीक के रूप में पूजा स्थल तक लाया जाता है।

  • विशेष श्रृंगार और ध्वजारोहण: बाना पहुँचने के बाद माता रानी का विशेष श्रृंगार पूजन होगा। इसके साथ ही, परिसर में बजरंग बली के विशेष ध्वज की स्थापना की जाएगी और उपकार संघ क्लब के ध्वज का ध्वजारोहण होगा।

  • महा-अनुष्ठान की टीम: इस पूरे कार्यक्रम को सफल बनाने में अध्यक्ष सतपाल साहू के साथ उमाशंकर शर्मा (उपाध्यक्ष), विश्वकर्मा वर्मा (महासचिव), राजीव वर्मा (सचिव), नरेंद्र साहू (कोषाध्यक्ष), साहिल शर्मा (सह कोषाध्यक्ष) और बालकृष्ण साहू दिन-रात जुटे हुए हैं।

सोनारी का ऐतिहासिक महत्व और उपकार संघ की सेवा

जमशेदपुर का सोनारी इलाका अपनी विविध संस्कृति के लिए जाना जाता है। उपकार संघ दशकों से यहाँ धार्मिक और सामाजिक कार्यों का नेतृत्व कर रहा है।

  • धार्मिक सद्भाव: यहाँ की नवरात्रि पूजा में न केवल साहू समाज बल्कि पूरे सोनारी क्षेत्र के विभिन्न समुदायों के लोग अपनी निष्ठा दिखाते हैं।

  • प्राचीन परंपरा: जवारा और बाना अगवानी जैसी रस्में जमशेदपुर के शहरी जीवन में ग्रामीण संस्कृति की मिठास घोलती हैं, जो नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ रही हैं।

सोनारी के उपकार संघ में मां कुष्मांडा की पूजा ने भक्तों के मन में नई ऊर्जा का संचार किया है। 181 जवारा टोकरियों का दर्शन और जसगीत की मधुर गूँज ने माहौल को दिव्य बना दिया है। अब सबकी नजरें कल होने वाली 'बाना अगवानी' पर टिकी हैं, जो इस महा-अनुष्ठान का सबसे मुख्य और रोमांचक हिस्सा होने वाला है। यदि आप भी माता के आशीर्वाद और छत्तीसगढ़ी परंपरा के साक्षी बनना चाहते हैं, तो कल शाम 4 बजे कमल चौक पहुँचकर इस भव्य आयोजन का हिस्सा जरूर बनें।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।