Jamshedpur Suicide : जमशेदपुर के बाबरी बस्ती में नशे के लिए पैसे न मिलने पर मजदूरी करने वाले दयाल ने दी जान, तीन बेटियों के सिर से उठा पिता का साया

जमशेदपुर के सीतारामडेरा थाना क्षेत्र के भुइयांडीह बाबरी बस्ती में नशे के आदि युवक दयाल बाग ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। नशे के लिए पैसे न मिलने पर परिवार के साथ मारपीट और फिर इस आत्मघाती कदम की पूरी हृदयविदारक रिपोर्ट यहाँ देखें।

Mar 25, 2026 - 13:40
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Jamshedpur Suicide : जमशेदपुर के बाबरी बस्ती में नशे के लिए पैसे न मिलने पर मजदूरी करने वाले दयाल ने दी जान, तीन बेटियों के सिर से उठा पिता का साया
Jamshedpur Suicide : जमशेदपुर के बाबरी बस्ती में नशे के लिए पैसे न मिलने पर मजदूरी करने वाले दयाल ने दी जान, तीन बेटियों के सिर से उठा पिता का साया

जमशेदपुर/सीतारामडेरा, 25 मार्च 2026 – लौहनगरी के सीतारामडेरा थाना क्षेत्र अंतर्गत भुइयांडीह बाबरी बस्ती में नशे की लत ने एक और हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है। नशे के लिए पैसे न मिलने से आक्रोशित 35 वर्षीय दयाल बाग ने मंगलवार की देर रात अपने ही घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के वक्त घर में चीख-पुकार मची थी, क्योंकि दयाल ने नशे की हालत में अपनी पत्नी और बच्चों के साथ मारपीट कर उन्हें घर से बाहर निकाल दिया था। जब तक पड़ोसी और परिजन दरवाजा तोड़कर भीतर दाखिल हुए, तब तक दयाल मौत के फंदे पर झूल चुका था। आनन-फानन में उसे एमजीएम अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। तीन छोटी-छोटी बेटियों के सिर से पिता का साया उठने के बाद पूरी बस्ती में सन्नाटा पसरा हुआ है।

नशे की 'खूनी' मांग: जब पिता ही बना हैवान

बाबरी बस्ती में हुई यह घटना नशाखोरी के बढ़ते प्रकोप का एक भयावह उदाहरण है।

  • आधी रात का हंगामा: दयाल बाग भुइयांडीह लकड़ी टाल में मजदूरी का काम करता था, लेकिन उसकी कमाई का बड़ा हिस्सा नशे में उड़ जाता था। मंगलवार रात वह बुरी तरह नशे में धुत होकर घर लौटा।

  • मारपीट और सनक: घर पहुँचते ही उसने और नशा करने के लिए अपनी पत्नी से पैसों की मांग शुरू कर दी। जब परिजनों ने गरीबी और बच्चों का हवाला देकर पैसे देने से इंकार किया, तो दयाल आपा खो बैठा। उसने घर के सदस्यों के साथ मारपीट की और उन्हें धक्का देकर घर से बाहर निकाल दिया।

  • दरवाजा बंद और सन्नाटा: भगीने अमित बाउरी के अनुसार, सबको बाहर निकालने के बाद दयाल ने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। परिजनों के बार-बार दरवाजा पीटने पर भी जब कोई जवाब नहीं मिला, तो अनहोनी की आशंका गहरा गई।

एमजीएम में 'डेथ' डिक्लेरेशन: टूट गया खुशियों का आशियाना

पड़ोसियों की मदद से जब घर का दरवाजा तोड़ा गया, तो अंदर का नजारा देख सबकी रूह कांप गई।

  1. फंदे पर झूलता शव: पत्नी ने जैसे ही भीतर कदम रखा, दयाल को फंदे से लटकता पाया। आनन-फानन में फंदा काटकर उसे नीचे उतारा गया।

  2. अस्पताल में जवाब: पड़ोसी और अमित बाउरी उसे कंधे पर लादकर तुरंत एमजीएम अस्पताल भागे। वहां के इमरजेंसी वार्ड में तैनात डॉक्टरों ने जांच के बाद स्पष्ट कर दिया कि अस्पताल पहुँचने से पहले ही दयाल की सांसें थम चुकी थीं।

  3. तीन बेटियों का भविष्य: दयाल की तीन छोटी बेटियां हैं, जिन्हें यह भी नहीं पता कि उनके पिता अब कभी वापस नहीं लौटेंगे। लकड़ी टाल में मजदूरी कर घर चलाने वाला एकमात्र सदस्य अब इस दुनिया में नहीं रहा।

बाबरी बस्ती का इतिहास और 'सस्ता नशा'

जमशेदपुर के भुइयांडीह और सीतारामडेरा जैसे इलाकों में नशाखोरी एक पुरानी और गंभीर समस्या रही है।

  • मजदूर वर्ग पर असर: लकड़ी टाल और भट्ठों में काम करने वाले मजदूर अक्सर थकान मिटाने के नाम पर नशे की गिरफ्त में आ जाते हैं। बाबरी बस्ती जैसे इलाकों में बिकने वाले अवैध नशे ने कई परिवारों को सड़क पर ला खड़ा किया है।

  • घरेलू हिंसा का ग्राफ: पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, सीतारामडेरा क्षेत्र में होने वाली 60% घरेलू हिंसा की घटनाओं के पीछे शराब या ड्रग्स का हाथ होता है। दयाल की मौत भी इसी कड़ी का एक दुखद हिस्सा है।

  • जागरूकता की कमी: बस्ती के लोगों का कहना है कि अगर समय रहते दयाल की काउंसलिंग कराई जाती या उसे नशा मुक्ति केंद्र भेजा जाता, तो शायद आज तीन मासूम अनाथ न होतीं।

अगला कदम: पोस्टमार्टम और पुलिस की जांच

सीतारामडेरा थाना पुलिस ने मामले की जानकारी मिलते ही अस्पताल पहुँचकर शव को कब्जे में ले लिया है।

  • पोस्टमार्टम की प्रक्रिया: पुलिस ने शव को एमजीएम के शीत गृह (Morgue) में रखवा दिया है। आज शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा, जिसके बाद इसे परिजनों को सौंपा जाएगा।

  • बयान दर्ज: पुलिस ने भगीने अमित बाउरी और दयाल की पत्नी का बयान दर्ज किया है। प्राथमिक तौर पर इसे आत्महत्या का मामला माना जा रहा है, लेकिन पुलिस हर एंगल से जांच कर रही है।

  • बस्ती में चौकसी: घटना के बाद बस्ती में तनाव को देखते हुए पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि दयाल किस तरह का नशा करता था और उसे यह सामान कहाँ से उपलब्ध होता था।

भुइयांडीह बाबरी बस्ती में दयाल बाग की मौत समाज के लिए एक कड़ा सबक है। नशे की एक छोटी सी तलब कैसे इंसान को अपनी जान लेने और परिवार को बर्बाद करने पर मजबूर कर देती है, यह इस घटना से साफ झलकता है। तीन बेटियों की सिसकियाँ और एक बेसहारा पत्नी के आंसू आज पूरे सीतारामडेरा प्रशासन से सवाल पूछ रहे हैं कि बस्तियों में फैल रहे इस जहर पर लगाम कब लगेगी? फिलहाल, पुलिस की कागजी कार्रवाई जारी है और पूरा परिवार गहरे शोक में डूबा है।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।