Bodam Murder : बोड़ाम के गोबरलाद में नशे में खूनी संघर्ष, पति-पत्नी ने एक-दूसरे पर बरसाईं लाठियां, हीरामणि की मौत, पति सुधीर हिरासत में
बोड़ाम थाना क्षेत्र के गोबरलाद गांव में शराब के नशे में पति-पत्नी के बीच हुई लाठीबाजी में 43 वर्षीय हीरामणि मुर्मू की जान चली गई है। शादी समारोह से लौटकर शुरू हुए इस खूनी विवाद और दुर्गम इलाके में मोबाइल टावर न होने से पुलिस तक सूचना पहुंचने में हुई देरी की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
बोड़ाम/पटमदा, 25 मार्च 2026 – जमशेदपुर के सीमावर्ती बोड़ाम थाना क्षेत्र अंतर्गत बेलडीह पंचायत के गोबरलाद गांव में एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। नशे की लत और आपसी विवाद ने एक हंसते-खेलते वैवाहिक जीवन का हिंसक अंत कर दिया। एक शादी समारोह से लौट रहे दंपती के बीच शुरू हुई मामूली कहासुनी इतनी बढ़ गई कि दोनों ने एक-दूसरे पर लाठियों से जानलेवा हमला कर दिया। इस खूनी संघर्ष में 43 वर्षीय हीरामणि मुर्मू की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि उनका पति सुधीर मुर्मू भी गंभीर रूप से घायल हो गया। शत-प्रतिशत आदिवासी बहुल इस सुदूर गांव में मोबाइल टावर न होने के कारण पुलिस को घटना की भनक तक नहीं लगी, जिससे आरोपी पति को घंटों तक मामले को दबाने का मौका मिल गया।
शादी की खुशियां और 'मौत' का नशा: क्या हुआ उस रात?
गोबरलाद गांव के जंगल के बीच बसे इस इलाके में सोमवार की रात एक भयानक चीख-पुकार मची थी।
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नशे में वापसी: सुधीर मुर्मू और उसकी पत्नी हीरामणि मुर्मू एक शादी समारोह में शामिल होकर घर लौट रहे थे। बताया जा रहा है कि दोनों ने अत्यधिक शराब का सेवन कर रखा था।
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लाठियों से वार: रास्ते में ही किसी बात को लेकर दोनों के बीच बहस शुरू हुई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ा कि दोनों ने पास पड़ी लाठियों से एक-दूसरे पर हमला कर दिया। नशे के जुनून में सुधीर ने अपनी पत्नी के सिर पर कई वार किए, जिससे हीरामणि ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया।
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मामला दबाने की कोशिश: पत्नी की मौत के बाद जख्मी सुधीर ने पूरी घटना को छिपाने का प्रयास किया। मंगलवार दोपहर तक गांव के भीतर ही इस मामले को आपसी पंचायत के जरिए सुलझाने की कोशिश की गई, लेकिन बात नहीं बनी।
चौकीदार की सूचना और 'डेड नेटवर्क' की चुनौती
बोड़ाम पुलिस को इस जघन्य हत्याकांड की खबर मंगलवार दोपहर करीब 2:00 बजे एक स्थानीय चौकीदार के माध्यम से मिली।
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टावर की समस्या: गोबरलाद गांव भुईयांसिनान से भूला मोड़ जाने वाली मुख्य सड़क के किनारे घने जंगलों के बीच बसा है। यहाँ मोबाइल नेटवर्क न होने के कारण ग्रामीणों को पुलिस या एम्बुलेंस बुलाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। यही वजह रही कि हत्या के कई घंटों बाद भी पुलिस बेखबर रही।
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थाना प्रभारी की दबिश: सूचना मिलते ही बोड़ाम थाना प्रभारी नीरज कुमार पुलिस बल के साथ शाम करीब 4:30 बजे ऊबड़-खाबड़ रास्तों को पार करते हुए गांव पहुँचे। पुलिस ने खून से लथपथ हीरामणि के शव को कब्जे में लिया।
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सीएचसी में भर्ती आरोपी: पुलिस ने गंभीर रूप से घायल पति सुधीर मुर्मू को तुरंत हिरासत में लिया और पटमदा के माचा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में भर्ती कराया, जहाँ वह पुलिस की कड़ी निगरानी में इलाज करा रहा है।
गोबरलाद का भूगोल और 'विकास' का इतिहास
बोड़ाम का यह क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ अपनी दुर्गमता के लिए भी जाना जाता है।
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आदिवासी बहुल गांव: गोबरलाद एक ऐसा गांव है जहाँ आज भी पुरानी परंपराएं जीवित हैं, लेकिन शिक्षा और संचार के अभाव में अपराध की सूचनाएं बाहर नहीं आ पातीं।
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नेटवर्क का संकट: स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि मोबाइल टावर न होने से वे दुनिया से कटे रहते हैं। अगर किसी की तबीयत खराब हो जाए या कोई बड़ी वारदात हो जाए, तो मदद पहुँचने में घंटों लग जाते हैं।
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शराब की लत: कोल्हान के ग्रामीण इलाकों में हड़िया और शराब की लत सामाजिक ताने-बाने को लगातार नुकसान पहुँचा रही है। हीरामणि की हत्या भी इसी सामाजिक बुराई का परिणाम है।
अगला कदम: पोस्टमार्टम और कानूनी कार्रवाई
पुलिस ने बुधवार को कानूनी प्रक्रिया पूरी कर हीरामणि मुर्मू के शव का पोस्टमार्टम कराया और उसे अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया है।
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पूछताछ जारी: अस्पताल में सुधीर मुर्मू की स्थिति स्थिर होने के बाद पुलिस उससे विस्तृत पूछताछ करेगी। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या विवाद केवल नशे की वजह से हुआ या इसके पीछे कोई पुरानी रंजिश या पारिवारिक कलह थी।
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गवाहों के बयान: पुलिस ने गांव के उन लोगों के भी बयान दर्ज किए हैं जिन्होंने पंचायत के जरिए मामले को दबाने की कोशिश की थी।
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न्यायिक हिरासत: जैसे ही सुधीर को अस्पताल से छुट्टी मिलेगी, उसे कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया जाएगा।
बोड़ाम के गोबरलाद गांव में हुई यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है कि कैसे नशा इंसान को अपनों का ही कातिल बना देता है। एक तरफ हीरामणि की चिता जल रही है, तो दूसरी तरफ उसका पति अस्पताल के बेड पर पुलिस की जंजीरों में बंधा है। मोबाइल नेटवर्क की कमी ने इस मामले में अपराधियों को फायदा पहुँचाने का काम किया है। क्या प्रशासन इस दुर्गम गांव में संचार व्यवस्था दुरुस्त करेगा? फिलहाल, पुलिस की बारीकी से पड़ताल जारी है और गोबरलाद के घने जंगलों में खौफनाक सन्नाटा पसरा है।
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