Ranchi Scam: सेना में नौकरी के नाम पर 70 लाख की ठगी, चुटिया पुलिस ने एमईएस के फर्जी अधिकारी को दबोचा
रांची पुलिस और मिलिट्री इंटेलिजेंस ने सेना में नौकरी दिलाने वाले बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। 70 लाख की ठगी करने वाले अरविंद प्रसाद की गिरफ्तारी और फर्जी जॉइनिंग लेटर के इस खेल की पूरी इनसाइड रिपोर्ट यहाँ देखें।
रांची/झारखंड, 11 अप्रैल 2026 – झारखंड की राजधानी रांची में सेना की वर्दी और रौब का इस्तेमाल कर बेरोजगार युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले एक शातिर गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। चुटिया थाना पुलिस ने मिलिट्री इंटेलिजेंस लखनऊ से मिले इनपुट के आधार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए गिरोह के मुख्य सदस्य अरविंद प्रसाद को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरोह मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस (MES) में भर्ती कराने के नाम पर अब तक दर्जनों युवाओं से करीब 70 लाख रुपये की ठगी कर चुका है। सिटी एसपी पारस राणा ने इस पूरे 'जॉब सिंडिकेट' का खुलासा करते हुए बताया कि आरोपी ने दिल्ली, जम्मू और लेह जैसे इलाकों का इस्तेमाल कर पीड़ितों को अपने जाल में फंसाया था।
ठगी का मास्टर प्लान: वर्दी, कैंटीन कार्ड और फर्जी जॉइनिंग
इस गिरोह की कार्यशैली इतनी शातिर थी कि कोई भी साधारण युवक आसानी से इनके झांसे में आ जाए।
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खुद को बताया अधिकारी: आरोपी अरविंद प्रसाद ने खुद को सेना के एमईएस विभाग का बड़ा अधिकारी बताया था। उसने अपने सहयोगी संतोष कुमार सिंह के साथ मिलकर युवाओं को टारगेट किया।
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भरोसा जीतने का तरीका: पीड़ितों को विश्वास दिलाने के लिए आरोपी उन्हें दिल्ली और लेह-लद्दाख जैसे सैन्य क्षेत्रों के पास ले जाते थे। वहां सेना से मिलते-जुलते ठिकानों को दिखाकर यह दावा किया जाता था कि उनकी 'सेटिंग' ऊपर तक है।
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6 लाख की डिमांड: प्रति व्यक्ति 6 लाख रुपये की मांग की गई थी। पीड़ित मुन्ना कुमार की शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने पैसे लेने के बाद हूबहू असली दिखने वाले फर्जी जॉइनिंग लेटर थमा दिए।
एमईएस दफ्तर के बाहर से गिरफ्तारी: SIT ने दबोचा
जब पीड़ितों को पता चला कि उनके जॉइनिंग लेटर नकली हैं और उन्होंने पैसे वापस मांगे, तो आरोपी फरार हो गए।
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एसआईटी का गठन: मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी रांची ने एक विशेष जांच टीम (SIT) बनाई।
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रंगे हाथ पकड़: अरविंद प्रसाद को रांची स्थित एमईएस कार्यालय के बाहर से ही गिरफ्तार किया गया, जहाँ वह संभवतः नए शिकार की तलाश में था।
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बरामदगी: छापेमारी में सेना के फर्जी आईडी कार्ड, मिलिट्री कैंटीन स्मार्ट कार्ड, आधार, पैन और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे कई जाली दस्तावेज बरामद हुए हैं।
रांची का सैन्य इतिहास और भर्ती के प्रति युवाओं का जुनून
रांची और इसके आसपास के इलाके ऐतिहासिक रूप से सेना के लिए समर्पित रहे हैं।
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दीपाटोली कैंट का गौरव: रांची का दीपाटोली कैंटोनमेंट भारतीय सेना का एक प्रमुख केंद्र है। यहाँ के युवाओं में वर्दी पहनने का जुनून पीढ़ियों से चला आ रहा है। अपराधी इसी 'भावनात्मक लगाव' और 'बेरोजगारी' का फायदा उठाते हैं।
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भर्ती का बदलता स्वरूप: अग्निपथ योजना और डिजिटल भर्ती प्रक्रियाओं के बीच, कई बार ग्रामीण इलाकों के युवा भ्रमित हो जाते हैं। इतिहास गवाह है कि रांची के मोरहाबादी मैदान में होने वाली सेना भर्ती रैलियों के दौरान ऐसे कई गिरोह सक्रिय होते रहे हैं।
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मिलिट्री इंटेलिजेंस की सक्रियता: लखनऊ और रांची की मिलिट्री इंटेलिजेंस यूनिट्स अब ऐसे सिविलियन ठगों पर पैनी नजर रख रही हैं जो सेना के नाम और प्रतीकों का दुरुपयोग कर रहे हैं।
अगली कार्रवाई: संतोष सिंह की तलाश और 'चेन' का खुलासा
पुलिस अब गिरोह के दूसरे मुख्य सदस्य संतोष कुमार सिंह की तलाश में जुटी है।
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बड़े नेटवर्क की आशंका: पुलिस को शक है कि इस गिरोह के तार सेना के कुछ निचले स्तर के क्लर्कों या बाहरी दलालों से जुड़े हो सकते हैं, जिन्होंने इन्हें सैन्य ठिकानों की अंदरूनी जानकारी दी।
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बैंक खातों की जांच: ठगी के 70 लाख रुपये कहाँ खपाए गए, इसके लिए पुलिस अरविंद के बैंक खातों और संपत्तियों का ब्यौरा खंगाल रही है।
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पुलिस की चेतावनी: सिटी एसपी ने युवाओं से अपील की है कि सेना में भर्ती केवल आधिकारिक वेबसाइट और निर्धारित परीक्षाओं के माध्यम से होती है। किसी भी व्यक्ति को 'डायरेक्ट भर्ती' के नाम पर पैसे न दें।
रांची में अरविंद प्रसाद की गिरफ्तारी सेना के नाम पर दुकान चलाने वाले ठगों के लिए एक बड़ा सबक है। 70 लाख की यह ठगी उन गरीब परिवारों के लिए बड़ा सदमा है जिन्होंने अपनी जमीन बेचकर बच्चों को 'फौजी' बनाने का सपना देखा था। चुटिया पुलिस और मिलिट्री इंटेलिजेंस के साझा ऑपरेशन ने यह साबित कर दिया है कि वर्दी का अपमान करने वाले अब ज्यादा दिन तक बच नहीं पाएंगे। फिलहाल, अरविंद सलाखों के पीछे है और पुलिस की छापेमारी जारी है।
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