Baharagora Bust: बहरागोड़ा में 25 लाख का गांजा जब्त, टाटा पंच कार से बिहार जा रहे थे तस्कर, ओडिशा के 'दादा' से जुड़े हैं तार
बहरागोड़ा एनएच पर पुलिस ने टाटा पंच कार से 50 किलो अवैध गांजा बरामद किया है। ओडिशा के चिल्का झील से बिहार ले जाए जा रहे 25 लाख के इस नशे और गिरफ्तार तस्करों की पूरी इनसाइड रिपोर्ट यहाँ देखें।
बहरागोड़ा/जमशेदपुर, 13 अप्रैल 2026 – झारखंड-ओडिशा की सीमा पर स्थित बहरागोड़ा में पुलिस ने नशा तस्करी के एक बड़े नेटवर्क को ध्वस्त करने में सफलता हासिल की है। जमशेदपुर ग्रामीण एसपी ऋषभ गर्ग के नेतृत्व में की गई इस छापेमारी में पुलिस ने एक भूरे रंग की टाटा पंच कार से 50 किलो अवैध गांजा बरामद किया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस खेप की कीमत करीब 25 लाख रुपये आंकी जा रही है। पुलिस ने मौके से दो शातिर तस्करों को गिरफ्तार किया है, जो ओडिशा की चिल्का झील से गांजा लेकर बिहार की ओर जा रहे थे। इस बड़ी कामयाबी ने अंतरराज्यीय ड्रग सिंडिकेट की कमर तोड़ दी है।
एनएच पर घेराबंदी: कार के भीतर छिपा था 'हरा जहर'
12 अप्रैल की रात बहरागोड़ा पुलिस को सटीक सूचना मिली थी कि ओडिशा की ओर से एक लग्जरी कार में नशे की बड़ी खेप जमशेदपुर के रास्ते बिहार भेजी जा रही है।
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सटीक चेकिंग: पुलिस ने एनएच पर बैरिकेडिंग कर वाहनों की जांच शुरू की। तभी कार संख्या JH 05 DS 6333 (टाटा पंच) को रुकने का इशारा किया गया।
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तलाशी में खुलासा: कार की डिक्की और सीटों के नीचे छिपाकर रखे गए पैकेटों को जब खोला गया, तो पुलिस के भी होश उड़ गए। कुल 50 किलो उच्च गुणवत्ता वाला गांजा बरामद हुआ।
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गिरफ्तार तस्कर: पुलिस ने मौके से सोनारी (जमशेदपुर) निवासी भीम यादव और भोजपुर (बिहार) निवासी राज कुमार पाल को गिरफ्तार कर लिया।
ओडिशा का 'दादा' कनेक्शन: चिल्का झील से शुरू हुआ खेल
पूछताछ के दौरान पकड़े गए अभियुक्तों ने तस्करी के इस पूरे रूट का सनसनीखेज खुलासा किया है।
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सप्लाई पॉइंट: तस्करों ने बताया कि वे ओडिशा के चिल्का झील के पास स्थित बाराकुल नामक स्थान से यह माल लाए थे।
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मास्टरमाइंड 'दादा': गांजे की यह खेप उन्हें 'दादा' नाम के एक बड़े सप्लायर ने मुहैया कराई थी। पुलिस अब इस 'दादा' की पहचान और लोकेशन ट्रैक करने में जुट गई है।
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बिहार था ठिकाना: यह माल बिहार के विभिन्न जिलों में ऊंचे दामों पर खपाया जाना था। तस्करों के पास से दो मोबाइल फोन और 3,482 रुपये नकद भी मिले हैं।
'स्मगलिंग कॉरिडोर' और पुलिस की बदलती रणनीति
बहरागोड़ा प्रखंड भौगोलिक रूप से झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा की सीमाओं का मिलन बिंदु है, जिसका इतिहास व्यापार और तस्करी दोनों से जुड़ा रहा है।
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त्रिकोणीय सीमा का फायदा: दशकों से तस्कर ओडिशा के गांजा उत्पादक क्षेत्रों से माल लाकर बंगाल और बिहार भेजने के लिए बहरागोड़ा के रास्तों का इस्तेमाल करते रहे हैं। एनएच-18 और एनएच-49 का जाल इसे एक 'ट्रांजिट हब' बनाता है।
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बदलता तरीका: पहले गांजा ट्रक या कोयला लदी गाड़ियों में छिपकर आता था, लेकिन अब तस्कर पुलिस को चकमा देने के लिए नई और पारिवारिक दिखने वाली कारों (जैसे टाटा पंच) का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि किसी को शक न हो।
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पुलिस की पैनी नजर: ग्रामीण एसपी ऋषभ गर्ग के कमान संभालने के बाद से बहरागोड़ा चेकपोस्ट पर 'इंटेलिजेंस-बेस्ड' चेकिंग बढ़ी है, जिसका नतीजा इस 25 लाख की बरामदगी के रूप में सामने आया है।
अगली कार्रवाई: 'दादा' की तलाश और सिंडिकेट पर प्रहार
बहरागोड़ा पुलिस ने दोनों अभियुक्तों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया है।
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बैकवर्ड लिंकेज: पुलिस की एक विशेष टीम ओडिशा भेजी जा सकती है ताकि बाराकुल के उस सप्लायर को दबोचा जा सके।
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नेटवर्क का विस्तार: पुलिस उन स्थानीय लोगों की भी जांच कर रही है जो जमशेदपुर और आसपास के इलाकों में इन तस्करों को सुरक्षित रास्ता (Safe Passage) दिलाने में मदद करते थे।
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मोबाइल कॉल रिकॉर्ड: जब्त किए गए दो मोबाइल फोन के कॉल डिटेल्स (CDR) खंगाले जा रहे हैं ताकि बिहार के उन खरीदारों का पता लगाया जा सके जो इस खेप का इंतजार कर रहे थे।
बहरागोड़ा पुलिस की यह कार्रवाई नशे के सौदागरों के लिए एक कड़ी चेतावनी है। 50 किलो गांजे की यह बरामदगी केवल एक जब्ती नहीं, बल्कि उन सैकड़ों युवाओं को बचाने की कोशिश है जो इस 'हरे जहर' की चपेट में आने वाले थे। ग्रामीण एसपी की मुस्तैदी ने साबित कर दिया है कि ओडिशा-बिहार के इस तस्करी गलियारे में अब अपराधियों का बचना नामुमकिन है। फिलहाल, पुलिस की छापेमारी जारी है और उम्मीद है कि जल्द ही 'दादा' और इस सिंडिकेट के अन्य बड़े चेहरे भी सलाखों के पीछे होंगे।
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