Ranchi Scam: रांची के नर्सिंग कॉलेज में 166 गिरफ्तार, 10 लाख में डील और व्हाट्सएप पर उत्तर का खेल, सिपाही भर्ती परीक्षा में बड़ा खुलासा
झारखंड उत्पाद सिपाही परीक्षा पेपर लीक मामले में तमाड़ के एक नर्सिंग कॉलेज से 166 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। 4.77 करोड़ के एडवांस और व्हाट्सएप नेटवर्क के जरिए रटवाए जा रहे उत्तरों की पूरी इनसाइड रिपोर्ट यहाँ देखें।
रांची/तमाड़, 14 अप्रैल 2026 – झारखंड में सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं पर एक बार फिर 'पेपर लीक' का काला साया मंडराने लगा है। राजधानी रांची के तमाड़ थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए उत्पाद सिपाही परीक्षा में सेंध लगाने वाले एक बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने रड़गांव स्थित एक अर्धनिर्मित नर्सिंग कॉलेज में छापेमारी कर गिरोह के सरगना, एजेंटों और अभ्यर्थियों समेत कुल 166 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इस मामले ने न केवल परीक्षा संचालन एजेंसी की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि करोड़ों रुपये के इस 'करियर सौदेबाजी' के खेल को भी उजागर कर दिया है।
व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी: फोन पर आया पेपर और शुरू हुआ खेल
पुलिस की जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा तकनीक के इस्तेमाल को लेकर हुआ है।
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व्हाट्सएप नेटवर्क: गिरफ्तार आरोपी विकास कुमार के मोबाइल की जांच में परीक्षा का प्रश्न पत्र मिला। पूछताछ में पता चला कि 'चुनचुन' नामक एक शख्स ने यह पेपर उसे व्हाट्सएप पर भेजा था।
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एजेंसी से चोरी: शुरुआती इनपुट के अनुसार, यह प्रश्न पत्र सीधे परीक्षा संचालन एजेंसी से ही लीक किया गया था। माफियाओं ने पेपर मिलने के बाद उसके उत्तर तैयार किए और उसे अभ्यर्थियों तक पहुँचाया।
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रटाई सेंटर: नर्सिंग कॉलेज को एक 'कोचिंग सेंटर' में तब्दील कर दिया गया था, जहाँ अभ्यर्थियों को मोबाइल से देखकर जवाब रटवाए जा रहे थे ताकि वे ओएमआर शीट पर बिना गलती किए गोला भर सकें।
करोड़ों की डील: 3 लाख एडवांस और 10 लाख का रेट
यह कोई साधारण धोखाधड़ी नहीं, बल्कि एक संगठित आर्थिक अपराध है।
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प्रति छात्र रेट: हर अभ्यर्थी से नौकरी दिलाने के नाम पर 10-10 लाख रुपये की डील तय की गई थी।
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कैश फ्लो: गिरोह ने 159 अभ्यर्थियों से 3-3 लाख रुपये एडवांस के तौर पर वसूले थे। पुलिस के गणित के अनुसार, यह रकम लगभग 4.77 करोड़ रुपये बैठती है।
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बाकी भुगतान: डील के अनुसार, परीक्षा पास होने के बाद बाकी के 7 लाख रुपये देने की बात तय हुई थी।
प्राचीन संस्कृति और बढ़ते 'सेफ हाउस' का सच
रांची जिले का तमाड़ इलाका ऐतिहासिक रूप से अपनी समृद्ध मुंडा संस्कृति और 'दिउड़ी मंदिर' के लिए विश्व विख्यात है। लेकिन हाल के वर्षों में इसकी भौगोलिक स्थिति का अपराधियों ने गलत फायदा उठाना शुरू किया है।
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रणनीतिक स्थान: तमाड़, रांची और टाटा (NH-33) के बीच का एक ऐसा इलाका है जहाँ से बंगाल और ओडिशा की सीमाएं भी नजदीक पड़ती हैं। इतिहास गवाह है कि इसी कनेक्टिविटी के कारण नक्सलियों और अब सॉल्वर गैंग्स ने यहाँ के अर्धनिर्मित भवनों को अपना 'सेफ हाउस' बनाना शुरू किया है।
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नर्सिंग कॉलेज का रहस्य: रड़गांव का वह अर्धनिर्मित नर्सिंग कॉलेज, जहाँ यह पूरा खेल चल रहा था, माफियाओं के लिए एक आदर्श ठिकाना था। यहाँ मुख्य सड़क से दूर भीड़भाड़ के बिना सैकड़ों लोगों को ठहराना आसान था। कॉलेज के मालिक और ठेकेदार की मिलीभगत ने इस जगह को अपराध का अड्डा बना दिया।
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जेएसएससी का दागदार इतिहास: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं का इतिहास पेपर लीक और विवादों से भरा रहा है। उत्पाद सिपाही परीक्षा से पहले भी कई भर्ती प्रक्रियाएं इसी तरह के सॉल्वर गैंग्स की भेंट चढ़ चुकी हैं, जिससे प्रदेश के लाखों युवाओं का भविष्य अधर में लटका है।
बड़ी कार्रवाई: 166 आरोपी पहुंचे सलाखों के पीछे
तमाड़ पुलिस और रांची जिला प्रशासन ने इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है।
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गिरफ्तारी का आंकड़ा: जेल जाने वालों में 152 पुरुष और 7 महिला अभ्यर्थी शामिल हैं। इसके अलावा गिरोह के मुख्य सरगना और एजेंट भी पुलिस की गिरफ्त में हैं।
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लॉजिस्टिक्स सपोर्ट: अभ्यर्थियों को बिहार और झारखंड के कोने-कोने से लाने के लिए विशेष गाड़ियों का इंतजाम किया गया था। पुलिस ने इन वाहनों को भी जब्त कर लिया है।
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अगली कड़ी: पुलिस अब उस 'चुनचुन' और एजेंसी के भीतर छिपे उन 'विभीषणों' की तलाश कर रही है जिन्होंने सिस्टम के साथ गद्दारी कर पेपर लीक किया।
उत्पाद सिपाही परीक्षा पेपर लीक कांड ने एक बार फिर झारखंड के ईमानदार छात्रों की मेहनत पर पानी फेरने की कोशिश की है। तमाड़ पुलिस की मुस्तैदी से 166 लोग तो जेल चले गए, लेकिन 4.77 करोड़ का यह साम्राज्य इशारा कर रहा है कि जड़ें बहुत गहरी हैं। क्या एक महीने से चल रही इस तैयारी की भनक खुफिया तंत्र को नहीं थी? और सबसे बड़ा सवाल—क्या भविष्य में परीक्षाएं बिना किसी 'व्हाट्सएप लीक' के संपन्न हो पाएंगी? फिलहाल, तमाड़ थाने में दर्ज एफआईआर इस पूरे माफिया तंत्र के अंत की शुरुआत मानी जा रही है।
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