India Water: पानी संकट गहराया, 2050 तक सूख जाएंगे जलस्रोत?
भारत में जल संकट गहराया! 2050 तक देश में पानी की भारी कमी होगी। बारिश और ग्लेशियरों पर निर्भरता खत्म हो रही है। क्या भारत को मिलेगा समाधान? पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

भारत में पानी की कमी अब सिर्फ एक समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर संकट बन चुकी है। जिस देश में विश्व की 18% आबादी रहती है, वहां पीने योग्य जल मात्र 4% ही उपलब्ध है। कभी बारिश और ग्लेशियर पानी की पूर्ति का मुख्य साधन थे, लेकिन जलवायु परिवर्तन और अनियंत्रित जल दोहन के चलते अब ये भरोसेमंद नहीं रहे। आज नदियां सूख रही हैं, तालाब खत्म हो रहे हैं, और भूजल स्तर लगातार गिर रहा है।
2050 तक पानी को तरसेगा भारत?
जल संसाधन मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, 2050 तक भारत को 1,180 अरब घन मीटर पानी की जरूरत होगी, जबकि अभी इसकी उपलब्धता 1,137 अरब घन मीटर ही है। ऐसे में आने वाले समय में पानी का संकट और भयावह होने की आशंका है।
2030 तक भारत की 40% आबादी को साफ पानी नहीं मिलेगा। इतना ही नहीं, जल गुणवत्ता सूचकांक में भारत 122 देशों की सूची में 120वें स्थान पर है। 70% जल स्रोत पहले ही प्रदूषित हो चुके हैं, जिससे पीने योग्य पानी मिलना और मुश्किल हो गया है।
बजट बढ़ा, लेकिन समाधान नहीं मिला!
हर साल सरकार जल संकट को दूर करने के लिए भारी-भरकम बजट खर्च करती है, लेकिन इससे हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ रहे हैं। करोड़ों की लागत से बने बांध 100 साल भी नहीं चलते, जबकि हमारे पूर्वजों द्वारा बनाई गई पारंपरिक जल संरचनाएं आज भी पानीदार बनी हुई हैं।
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर शहर में 18 लाख लीटर पानी रोजाना 1615 में बनाई गई 'भंडारा' प्रणाली के जरिए वितरित होता है। यह दिखाता है कि पुरानी जल संरचनाएं कितनी टिकाऊ थीं। लेकिन दुर्भाग्य से आधुनिकता की दौड़ में पारंपरिक जल प्रणालियों को भुला दिया गया।
पहले कैसे होता था जल संरक्षण?
हमारे पूर्वजों ने हर इलाके की जल जरूरतों के हिसाब से अलग-अलग जल संरक्षण प्रणालियां विकसित की थीं।
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राजस्थान में तालाब, बावड़ियां, कुई और झालार
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कर्नाटक में कैरे
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तमिलनाडु में ऐरी
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नगालैंड में जोबो
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लेह-लद्दाख में जिंग
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महाराष्ट्र में पैट
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उत्तराखंड में गुल
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हिमाचल प्रदेश में कुल
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जम्मू में कुहाल
इन पारंपरिक प्रणालियों ने सदियों तक जल संकट को रोके रखा, लेकिन आधुनिक युग में इन्हें नष्ट कर दिया गया।
पलायन का बड़ा कारण जल संकट!
पिछले दो सौ वर्षों से जल संकट के कारण लोग अपने पुश्तैनी घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। आज गांवों और कस्बों में कुएं, बावड़ियां गायब हो चुकी हैं। तालाबों पर अतिक्रमण कर लिया गया, पहाड़ों को काट दिया गया, जंगलों को खत्म कर दिया गया।
बुंदेलखंड, जो कभी जल संरक्षण की बेहतरीन तकनीकों के लिए जाना जाता था, अब पानी की भारी किल्लत से जूझ रहा है। वहां पहले पहाड़ियों पर जंगल, नीचे तालाब और फिर एक तालाब से दूसरे तालाब को जोड़ने वाली प्रणाली थी। लेकिन जब इन तालाबों को खत्म कर दिया गया, तो जल संकट ने विकराल रूप ले लिया।
क्या है समाधान?
अगर जल संकट को रोकना है, तो हमें फिर से पारंपरिक जल संरक्षण प्रणालियों की ओर लौटना होगा। बारिश के पानी को सहेजने, भूजल को पुनर्भरण करने और प्राकृतिक जल स्रोतों को बचाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
सरकार और आम जनता को मिलकर नदियों, तालाबों और कुओं को पुनर्जीवित करने के प्रयास करने होंगे, अन्यथा 2050 तक भारत गंभीर जल संकट का सामना करेगा।
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