Deoghar Water: देवघर में 600 रुपये प्रति टैंकर पानी बिक रहा, लेकिन जनता बूंद-बूंद को तरस रही!
देवघर में पानी का व्यापार जोरों पर! टैंकर माफिया लाखों कमा रहे हैं, लेकिन जनता पानी के लिए तरस रही है। नगर निगम की लापरवाही ने संकट को और बढ़ा दिया है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

गर्मी बढ़ते ही देवघर में पानी की किल्लत ने विकराल रूप धारण कर लिया है। जहां जनता बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है, वहीं नगर निगम के टैंकर से पानी बेचने का गोरखधंधा बेरोकटोक जारी है। 600 रुपये प्रति टैंकर की दर से हर दिन औसतन 100 टैंकर पानी बेचा जा रहा है, जिससे प्रतिदिन 60,000 रुपये और महीने में करीब 18 लाख रुपये का कारोबार हो रहा है। गर्मी के चार महीनों में यह आंकड़ा 72 लाख रुपये पार कर जाता है।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतनी मोटी कमाई के बावजूद जनता को पीने का पानी नसीब नहीं हो रहा। नगर निगम की ओर से हमेशा एक ही बहाना मिलता है— "नदी में पानी नहीं है, जलस्तर नीचे चला गया है!" लेकिन जब टैंकर वालों के लिए पानी उपलब्ध है, तो जनता को क्यों नहीं? क्या यह पानी का खेल किसी बड़े षड्यंत्र का हिस्सा है?
पानी पर व्यापार, जनता को नहीं राहत!
देवघर नगर निगम के कुल वार्ड क्षेत्रों की आबादी 2.03 लाख से अधिक है। यहां ज्यादातर घरों में कुएं और बोरिंग मौजूद हैं, सप्लाई वाटर का कनेक्शन भी है। फिर भी लोग पानी के संकट से जूझ रहे हैं। गर्मी के दिनों में जल आपूर्ति की मांग बढ़ती है, लेकिन नगर निगम जनता की जरूरतें पूरी नहीं कर पा रहा।
दूसरी ओर, टैंकर माफिया धड़ल्ले से पानी बेचकर मुनाफा कमा रहे हैं। सवाल यह उठता है कि अगर जलस्तर इतना नीचे चला गया है, तो टैंकर वालों को पानी कहां से मिल रहा है? क्या यह नगर निगम और टैंकर माफिया की मिलीभगत है?
इतिहास गवाह है: पहले नहीं होता था जल संकट!
देवघर और आसपास के क्षेत्रों में जल प्रबंधन की समृद्ध परंपरा रही है। पुराने जमाने में कुएं, तालाब, और बावड़ियां पूरे साल पानी संचित रखते थे। लेकिन जैसे-जैसे शहरीकरण बढ़ा, पारंपरिक जल स्रोतों को खत्म कर दिया गया।
आज से 50-60 साल पहले देवघर में पानी की ऐसी कोई समस्या नहीं थी। लोग तालाबों और कुओं से पानी निकालते थे। लेकिन आधुनिक युग में नगर निगम ने सप्लाई वाटर सिस्टम तो शुरू किया, लेकिन उसकी विश्वसनीयता बेहद खराब रही। नतीजा यह हुआ कि अब पूरा शहर टैंकर माफिया के चंगुल में फंस चुका है।
पानी पर 'मुनाफा', जनता को 'सजा'
देवघर में पानी का संकट सिर्फ गर्मियों तक सीमित नहीं है। पूरे साल कभी न कभी जल संकट बना रहता है। सवाल यह है कि जब जनता होल्डिंग टैक्स और पानी का शुल्क भरती है, तो उन्हें पानी क्यों नहीं मिल रहा?
इसका सबसे बड़ा कारण है नगर निगम की लापरवाही और पानी का व्यावसायीकरण। एक ओर पानी को बचाने की कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई, वहीं दूसरी ओर टैंकर माफिया को खुली छूट दे दी गई।
क्या है समाधान?
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पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित किया जाए।
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टैंकर व्यवसाय पर निगरानी रखी जाए और पारदर्शी प्रणाली बनाई जाए।
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जल संरक्षण को बढ़ावा दिया जाए, ताकि जल संकट का स्थायी समाधान निकाला जा सके।
अगर जल्द ही इस समस्या का हल नहीं निकाला गया, तो देवघर में पानी सोने से भी महंगा हो जाएगा, और जनता को बूंद-बूंद के लिए तरसना पड़ेगा!
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