गालूडीह के बागालगोड़ा में सड़क की मांग को लेकर सबरों ने किया सड़क जाम, आश्वासन देने पहुंची सीओ पर भड़के

गालूडीह के बागालगोड़ा में सबर समुदाय ने सड़क की मांग को लेकर सड़क जाम किया। आश्वासन देने पहुंची सीओ निशात अंबर को भड़के ग्रामीणों का सामना करना पड़ा। सड़क की दुर्दशा के कारण ग्रामीणों को हो रही है भारी परेशानी।

Jul 9, 2024 - 17:52
Jul 9, 2024 - 18:14
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गालूडीह के बागालगोड़ा में सड़क की मांग को लेकर सबरों ने किया सड़क जाम, आश्वासन देने पहुंची सीओ पर भड़के
गालूडीह के बागालगोड़ा में सड़क की मांग को लेकर सबरों ने किया सड़क जाम, आश्वासन देने पहुंची सीओ पर भड़के

गालूडीह थाना क्षेत्र के बागालगोड़ा गांव में मंगलवार को धोडांगा सबर बस्ती के सबर ग्राम प्रधान बड़ासुकरा सबर के नेतृत्व में ग्रामीणों ने सड़क की मांग को लेकर गालूडीह-नरसिंगपुर मुख्य सड़क को अवरुद्ध कर दिया। इस दौरान चिलचिलाती भीषण गर्मी में भी सबर बस्ती के ग्रामीण सड़क पर डटे रहे और सभी प्रकार की आवाजाही को रोक दिया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि कई बार इस सड़क के लिए शिकायत की गई है, लेकिन उनकी फरियाद सुनने वाला कोई नहीं है। ग्राम प्रधान बड़ासुकरा सबर ने कहा, "हमारी बस्ती में आने-जाने के लिए कोई सड़क नहीं है, जिससे हमें बहुत दिक्कतें होती हैं। आखिर क्या हमारी बस्ती मानचित्र से बाहर है?"

धोडांगा सबर बस्ती में 17 परिवारों के 65 सदस्य हैं। विधानसभा चुनाव से पहले भी 17 मई 2024 को सड़क की मांग को लेकर सड़क जाम किया गया था। उस समय घाटशिला प्रखंड विकास पदाधिकारी यूनिका शर्मा ने आश्वासन दिया था कि जल्द ही सड़क निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा, लेकिन अब तक कोई पहल नहीं की गई।

सड़क जाम की सूचना मिलने पर घाटशिला सीओ निशात अंबर, सीआई सुरेश राम और गालूडीह पुलिस मौके पर पहुंचे। भड़के सबर बस्ती के ग्रामीणों ने करीब आधे घंटे तक हंगामा किया। बाद में जोड़िसा पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि मंगल सिंह और बगालगोड़ा के ग्राम प्रधान रंगलाल सिंह ने समझा-बुझाकर और सीओ के आश्वासन के बाद सड़क जाम हटाया गया।

ग्रामीणों ने सीओ निशात अंबर और उपायुक्त के नाम पर आवेदन सौंपा। सीओ निशात अंबर ने बताया कि बुधवार को डीसी के साथ बैठक है, जिसमें इस समस्या पर चर्चा की जाएगी। जल्द ही सरकारी अमीन द्वारा जमीन की मापी की जाएगी।

आजादी के 76 वर्ष बीत जाने के बाद भी धोडांगा सबर बस्ती तक जाने के लिए कोई सड़क नहीं बनी है। सड़क न होने से ग्रामीणों को लंबे समय से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सड़क की बदहाली के कारण स्कूली बच्चों और ग्रामीणों को आने-जाने में दिक्कत होती है। गांव में चार पहिया वाहन आने-जाने की कोई व्यवस्था नहीं है। आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां भी बस्ती तक नहीं पहुंच पातीं। आपातकालीन स्थिति के दौरान मरीजों को चारपाई पर लादकर गांव के बाहर मुख्य मार्ग तक लाना पड़ता है, जिससे समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाने के कारण कई मरीजों की मौत हो चुकी है।

बस्ती से मुख्य सड़क की दूरी लगभग दो किलोमीटर है। इससे पहले भी कई बार प्रदर्शन किए गए, लेकिन अब तक किसी जनप्रतिनिधि या अधिकारी ने ध्यान नहीं दिया। मौके पर मंटू सबर, कारू सबर, कुल्हु सबर, मोगलु सबर, फकीर सबर, शिशिर सबर, लालटू सबर, गोराई सबर, श्रवण सबर, छूटू कुल्हु सबर आदि उपस्थित थे।

इस शिविर के माध्यम से ग्रामीणों की समस्याओं को उजागर करने का प्रयास किया गया है ताकि उन्हें जल्द से जल्द समाधान मिल सके।