Dhanbad Raid: धनबाद समेत 40 ठिकानों पर ED की मेगा छापेमारी, अनिल गोयल समेत कई कोयला माफिया निशाने पर
धनबाद समेत झारखंड और पश्चिम बंगाल के 40 से अधिक ठिकानों पर ED ने छापेमारी की है। कोयला माफिया अनिल गोयल, विनोद साव और एलबी सिंह के घरों पर दस्तावेज़ जब्त किए गए। ED कोयला चोरी और स्मगलिंग के बड़े मामलों में सबूत जुटा रही है।
धनबाद, 21 नवंबर 2025 – झारखंड (Jharkhand) और पश्चिम बंगाल (West Bengal) में सक्रिय कोयला माफियाओं (Coal Mafia) के खिलाफ शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate - ED) ने एक विशाल और ऐतिहासिक छापेमारी (Mega Raid) शुरू कर दी। ED की टीमों ने एक साथ 40 से अधिक ठिकानों पर दबिश दी, जिसमें झारखंड के 18 स्थान शामिल हैं। यह कार्रवाई कोयला चोरी, अवैध खनन और स्मगलिंग (Smuggling) के एक बड़े नेटवर्क (Network) से जुड़ी है, जिसमें धनबाद और चिरकुंडा के कई नामी कारोबारियों के नाम सामने आए हैं। इस छापेमारी से दोनों राज्यों के अपराध और राजनीति के गहरे गठबंधन (Nexus) के खुलासे की संभावना जताई जा रही है।
40 ठिकानों पर ED की दबिश: कोयला किंगपिन पर निशाना
ED की टीमें शुक्रवार सुबह 5.30 बजे से ही एक्शन मोड में आ गईं।
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छापेमारी का दायरा: ED ने झारखंड के धनबाद (Dhanbad) सहित पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर, पुरुलिया, हावड़ा और कोलकाता तक अपना जाल फैलाया। झारखंड में 18 स्थानों पर छापेमारी की गई।
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प्रमुख निशाने: इस जांच के दायरे में धनबाद के बड़े नाम अनिल गोयल, संजय उद्योग, एलबी सिंह, विनोद महतो, अमर मंडल, नरेंद्र खरका, युधिष्ठिर घोष और कृष्ण मुरारी कयाल आदि आए हैं। चिरकुंडा के सोनारडंगाल स्थित कोयला कारोबारी विनोद साव (Vinod Saw) के घर पर पश्चिम बंगाल की ED टीम दस्तावेज खंगालने में जुटी है।
अवैध खनन और परिवहन: ED को क्या मिला?
ED की टीमें मुख्य रूप से कोयले के अवैध तरीके से खनन (Illegal** Mining), परिवहन और भंडारण (Storage) के संबंध में सबूत जुटाने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।
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संदिग्ध दस्तावेज: छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और बैंक लेनदेन (Bank Transactions) से जुड़े साक्ष्य मिलने की संभावना है। इन साक्ष्यों से पता चलेगा कि कोयले के अवैध कारोबार से कमाई गई रकम को किन माध्यमों से सफेद (White Money) किया गया है।
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आपराधिक साजिश: यह छापेमारी संकेत देती है कि यह नेटवर्क केवल कोयला चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें राजनीतिक और प्रशासनिक मिलीभगत (Collusion) भी शामिल हो सकती है।
कोयला माफिया का इतिहास: धनबाद का काला अध्याय
धनबाद का इतिहास हमेशा से कोयला माफिया और भूमिगत कारोबार (Underground** Business) के कारण कुख्यात रहा है।
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पहले भी कार्रवाई: ED पहले भी राज्य में इस तरह के मामलों में कई बार कार्रवाई कर चुका है। यह ताजा ऑपरेशन दिखाता है कि जांच एजेंसियां (Investigative Agencies) इस अवैध धंधे की जड़ों को पूरी तरह से खत्म करने के लिए पूरी तरह से सक्रिय हैं।
ED की यह कार्रवाई राज्य में चल रहे कोयला स्मगलिंग के रैकेट को उजागर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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