Baharagora Blast: सुवर्णरेखा नदी में मिला WWII का सिलेंडर बम, सेना ने सुरक्षित तरीके से किया निष्क्रिय
बहरागोड़ा में सुवर्णरेखा नदी किनारे मिले सिलेंडर बम को सेना ने किया निष्क्रिय, 50 फीट तक उठा धुएं का गुबार। जानिए द्वितीय विश्व युद्ध के इस बम का पूरा मामला।
बहरागोड़ा: पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा प्रखंड स्थित पानीपोड़ा गांव के पास सुवर्णरेखा नदी किनारे मिले सिलेंडर बम को सेना ने बुधवार सुबह सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय कर दिया। इस बम के मिलने के बाद से ही पूरे इलाके में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट थीं। सेना ने करीब एक किलोमीटर के दायरे को घेर लिया था। विस्फोट के दौरान तेज धमाका हुआ और धुएं का गुबार करीब 50 फीट तक उठा। गनीमत रही कि इस घटना में किसी भी प्रकार की जान-माल की क्षति नहीं हुई।
कैसे मिला था बम?
यह बम 15 अप्रैल को उस समय मिला था, जब स्थानीय मछुआरे नदी में मछली पकड़ रहे थे। मछुआरों का जाल में एक संदिग्ध वस्तु फंस गई। उसे किनारे लाने के बाद जब उन्होंने देखा, तो उनके होश उड़ गए। यह एक सिलेंडर बम था। तुरंत प्रशासन को सूचना दी गई। जांच के बाद पुष्टि हुई कि यह एक जीवित विस्फोटक है।
सेना ने कैसे निष्क्रिय किया?
बम को निष्क्रिय करने के लिए सेना की विशेष टीम ने करीब 10 फीट गहरा गड्ढा खोदा। बम को उस गड्ढे में रखा गया और फिर नियंत्रित तरीके से विस्फोट कर उसे निष्क्रिय किया गया। इस दौरान तेज आवाज हुई और धुएं का गुबार आसमान में उठा। सेना की दक्षता के कारण किसी भी तरह की अनहोनी नहीं हुई। मौके पर बहरागोड़ा पुलिस भी मौजूद रही। थाना प्रभारी शंकर प्रसाद कुशवाहा ने पुष्टि की कि बम को सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया गया है।
द्वितीय विश्व युद्ध का है यह बम?
विशेषज्ञों के अनुसार, यह बम द्वितीय विश्व युद्ध (WWII) के समय का हो सकता है। माना जा रहा है कि चाकुलिया एयरपोर्ट का उपयोग उस दौरान सैन्य गतिविधियों के लिए किया जाता था और संभवतः उसी समय ये विस्फोटक इस क्षेत्र में लाए गए थे। इससे पहले भी इसी इलाके में दो बम बरामद किए जा चुके हैं।
बहरागोड़ा का इतिहास और चाकुलिया एयरपोर्ट
बहरागोड़ा पूर्वी सिंहभूम जिले का एक ऐतिहासिक प्रखंड है। यह इलाका झारखंड-पश्चिम बंगाल-उड़ीसा की सीमा से लगा हुआ है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान चाकुलिया एयरपोर्ट एक महत्वपूर्ण सैन्य हवाई पट्टी थी। माना जाता है कि अमेरिकी और ब्रिटिश सेना ने इस एयरपोर्ट का उपयोग बर्मा (अब म्यांमार) में जापानी सेना के खिलाफ अभियानों के लिए किया था। युद्ध के बाद कई विस्फोटक और गोला-बारूद यहीं छोड़ दिए गए थे, जो समय-समय पर नदियों और खेतों में मिलते रहते हैं।
इससे पहले भी मिल चुके हैं बम
गौरतलब है कि इसी इलाके में 17 मार्च और 24 मार्च को दो बम बरामद किए जा चुके हैं, जिन्हें 25 मार्च को सेना ने डिफ्यूज किया था। इनमें एक 227 किलो का अमेरिकी बम भी शामिल था। लगातार बम मिलने की घटनाओं से स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है, हालांकि सेना की तत्परता से हर बार स्थिति को नियंत्रित किया जा रहा है।
विस्फोट से पहले सील किया गया था क्षेत्र
एहतियात के तौर पर सेना ने बम मिलने वाले स्थल के आसपास करीब एक किलोमीटर के दायरे को सील कर दिया था। क्षेत्र में लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई थी। स्थानीय ग्रामीणों को भी सतर्क रहने को कहा गया था। सेना ने सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया।
ग्रामीणों में राहत और चिंता
बम के निष्क्रिय होने के बाद स्थानीय ग्रामीणों में राहत की लहर है। हालांकि, वे इस बात को लेकर चिंतित भी हैं कि आखिर इस इलाके में अभी और कितने बम दबे हैं। एक ग्रामीण ने बताया, "हम लोग रोज नदी में मछली पकड़ने जाते हैं। अगर यह बम हमें नहीं मिलता तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था। प्रशासन को इस पूरे क्षेत्र की सघन जांच करानी चाहिए।"
प्रशासन ने की सतर्क रहने की अपील
प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि अगर उन्हें किसी भी संदिग्ध वस्तु के बारे में पता चले, तो वे तुरंत पुलिस को सूचित करें। बिना जानकारी के उन वस्तुओं को छेड़ने या हिलाने की कोशिश न करें। साथ ही, नदी और आसपास के इलाकों में विशेष निगरानी बढ़ा दी गई है।
बहरागोड़ा के सुवर्णरेखा नदी किनारे मिले द्वितीय विश्व युद्ध के सिलेंडर बम को सेना ने सुरक्षित निष्क्रिय कर दिया। क्या इस इलाके में और भी बम दबे हैं? यह खबर पढ़कर सावधान हो जाइए और इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।
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