Zirakpur Rape Case: पादरी बजिंदर सिंह को उम्रकैद, कोर्ट में गिड़गिड़ा कर मांगी राहत, लेकिन फैसला नहीं बदला!

पादरी बजिंदर सिंह को ताउम्र कैद, पीड़िता ने की सुरक्षा की मांग। जानें क्या होगा अब? न्याय की लड़ाई के बाद पीड़िता का बयान।

Apr 1, 2025 - 13:54
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Zirakpur Rape Case: पादरी बजिंदर सिंह को उम्रकैद, कोर्ट में गिड़गिड़ा कर मांगी राहत, लेकिन फैसला नहीं बदला!
Zirakpur Rape Case: पादरी बजिंदर सिंह को उम्रकैद, कोर्ट में गिड़गिड़ा कर मांगी राहत, लेकिन फैसला नहीं बदला!

जीरकपुर के एक चर्चित दुष्कर्म मामले में पादरी बजिंदर सिंह को मोहाली अदालत ने ताउम्र कैद की सजा सुनाई है। इस फैसले के बाद पीड़िता ने न्याय की जीत की खुशी जताई और सख्त सुरक्षा की मांग की। यह मामला अब प्रदेश भर में चर्चा का विषय बन चुका है और पादरी द्वारा किए गए अपराध ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या धार्मिक नेता जैसे व्यक्तियों द्वारा किए गए अपराधों को लेकर समाज में कोई बदलाव आएगा?

पादरी की दुष्कर्म की घिनौनी हरकत

मोहाली के जीरकपुर में एक महिला के साथ हुए दुष्कर्म मामले में पादरी बजिंदर सिंह का नाम सामने आया था। बजिंदर सिंह, जो एक आध्यात्मिक नेता के रूप में काफी लोकप्रिय था, के खिलाफ महिला ने गंभीर आरोप लगाए थे। महिला का कहना था कि पादरी ने न केवल उसे शारीरिक रूप से परेशान किया, बल्कि उसका मनोबल भी तोड़ा। पादरी के अनुयायी उसे 'पापा जी' के नाम से पुकारते थे और उस पर श्रद्धा रखते थे। इस पर पीड़िता के वकील, एडवोकेट अनिल सागर ने कहा कि इस तरह के गंभीर अपराध के लिए सख्त सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा, "हम इस फैसले से संतुष्ट हैं और यह निश्चित रूप से एक मजबूत संदेश देगा।"

वीडियो वायरल होने के बाद गिरफ्तारी

पादरी बजिंदर सिंह को दिल्ली एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया गया था जब वह इंग्लैंड के बर्मिंघम शहर में एक सेमिनार में भाग लेने के लिए जा रहा था। वीडियो का वायरल होना पादरी की गिरफ्तारी का प्रमुख कारण बना। इस वीडियो में पादरी महिला के साथ मारपीट करता नजर आया था, जिसमें वह महिला को थप्पड़ मारता और कॉपी फेंकता हुआ दिखाई दिया। यह वीडियो 14 फरवरी का था, लेकिन 16 मार्च को यह सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और पादरी की घिनौनी हरकतों का पर्दाफाश किया। महिला पादरी के घर में काम करती थी और इस अत्याचार का शिकार हुई थी।

पीड़िता का गुस्सा और सुरक्षा की मांग

पादरी को दोषी ठहराए जाने के बाद पीड़िता मीडिया के सामने आई और उसने अपना गुस्सा जाहिर किया। पीड़िता ने पादरी को साइको करार दिया और कहा, "अगर वह बाहर आया तो फिर से अपराध करेगा।" उसने यह भी कहा, "मैं चाहती हूं कि पादरी बजिंदर सिंह सिर्फ सलाखों के पीछे रहे, ताकि वह किसी और को तकलीफ न दे सके।" पीड़िता ने डीजीपी पंजाब से भी सुरक्षा की मांग की, क्योंकि उसे और उसके परिवार को आने वाले समय में हमलों का डर था।

पीड़िता ने यह भी बताया कि उसके खिलाफ कई झूठे केस दर्ज कराए जा सकते हैं, क्योंकि पहले भी ऐसे मामले उसके खिलाफ किए गए थे।

क्या समाज में बदलाव आएगा?

यह मामला सिर्फ एक अपराध की बात नहीं है, बल्कि धार्मिक और आध्यात्मिक गुरु के रूप में पहचान रखने वाले व्यक्तियों के दुष्कर्म से जुड़े सवालों को भी उजागर करता है। क्या आध्यात्मिक गुरु या किसी भी धार्मिक नेता द्वारा किए गए अपराधों को लेकर समाज में कोई जवाबदेही होगी? क्या इसके बाद लोग इस तरह के नेताओं पर विश्वास करना छोड़ देंगे? क्या अदालतों के फैसले समाज को अपराधियों के खिलाफ और सख्त कदम उठाने के लिए प्रेरित करेंगे?

न्याय की जंग: क्या यह सबके लिए मिसाल बनेगा?

इस मामले ने सिर्फ पादरी बजिंदर सिंह के खिलाफ न्याय का सिद्धांत नहीं प्रस्तुत किया, बल्कि यह भी दिखाया कि पीड़ितों को सामने आने का साहस कैसे मिल सकता है। पीड़िता का कहना था कि आज का फैसला कई और लड़कियों के लिए एक उम्मीद बनकर उभरेगा। अब कई महिलाएं सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि समाज में बदलाव के लिए भी आवाज उठा सकती हैं।

आखिरकार, न्याय की यह यात्रा सिर्फ इस एक पीड़िता के लिए नहीं, बल्कि हर पीड़ित महिला के लिए एक संदेश बनकर उभरेगी।

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Nihal Ravidas निहाल रविदास, जिन्होंने बी.कॉम की पढ़ाई की है, तकनीकी विशेषज्ञता, समसामयिक मुद्दों और रचनात्मक लेखन में माहिर हैं।