Chaibasa Bear Attack: मवेशी चराते युवक पर भालू का हमला, जान बचाने के लिए की खूनी झड़प
पश्चिमी सिंहभूम के जंगल में दहशत! कुमारडुंगी के बुसांई जंगल में भालू ने मवेशी चरा रहे युवक डुके कारवा पर किया जानलेवा हमला। जान बचाने के लिए की संघर्ष, युवक गंभीर रूप से घायल। ग्रामीणों ने वन विभाग से भालू को पकड़ने की लगाई गुहार, जानें पूरा मामला।
चाईबासा, 3 दिसंबर 2025 – पश्चिमी सिंहभूम जिले के जंगलों के निकट रहने वाले लोग आजकल गहरे खौफ के साये में जीवन यापन कर रहे हैं। उन्हें हमेशा यह डर बना रहता है कि जंगल से निकलकर कोई जंगली जानवर कब किसकी जान ले ले। इसी कड़ी में, कुमारडुंगी प्रखंड के खड़ाबांध के बुरुसाई जंगल में एक युवक पर जंगली भालू ने अचानक हमला कर दिया, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
घायल युवक की पहचान डुके कारवा के रूप में हुई है। इस घटना ने एक बार फिर से मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीरता को सामने ला दिया है।
जान बचाने के लिए भालू से भिड़ गया युवक
मिली जानकारी के अनुसार, डुके कारवा अपने पालतू मवेशियों को चराने के लिए जंगल में लेकर गए थे। जंगल के भीतर ही जंगली भालू ने अचानक उन्हें निशाना बनाया और उन पर हमला कर दिया। हालांकि इस खतरनाक परिस्थिति में भी युवक ने हिम्मत नहीं हारी।
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खूनी संघर्ष: डुके कारवा ने किसी तरह से भालू से संघर्ष करते हुए अपनी जान बचाई। यह संघर्ष इतना भयानक था कि युवक के शरीर पर कई जगहों पर गहरे जख्म हो गए हैं। जंगली जानवरों से लड़ने के लिए मजबूर होना, जंगल के पास रहने वाले लोगों की रोजमर्रा की असली चुनौती को दर्शाता है।
वन विभाग से भालू को पकड़ने की मांग
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों ने तत्काल डुके कारवा को उठाया और उन्हें सदर अस्पताल चाईबासा में भर्ती कराया। जहां उनका इलाज चल रहा है। चिकित्सकों के अनुसार, घायल युवक की स्थिति गंभीर है और उन्हें जल्द से जल्द बेहतर उपचार की आवश्यकता है।
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परिवार का सहारा: इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई है। स्थानीय लोगों ने एकजुट होकर वन विभाग से इस खतरनाक भालू को पकड़ने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी जानलेवा घटनाएं न हों। डुके कारवा के परिवार वालों ने बताया कि वह अपने परिवार का एकमात्र सहारा हैं, और उनकी स्थिति परिवार के लिए बड़ी चिंता का विषय है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष का इतिहास
झारखंड में जंगलों के निकट बढ़ती मानव बस्तियों और वन्यजीवों के प्राकृतिक वास के कम होने के कारण अतीत से ही संघर्ष बढ़ता रहा है। वन विभाग को जंगली जानवरों को आबादी वाले क्षेत्रों में आने से रोकने के लिए सख्त कदम उठाने होंगे और साथ ही घायलों के लिए त्वरित मुआवजा सुनिश्चित करना होगा।
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