Goilkera Elephant: खूनी तांडव, गोइलकेरा में दंतैल हाथी का कहर, दूसरी रात भी एक महिला को पटककर मारा

पश्चिम सिंहभूम के गोइलकेरा में एक खूंखार दंतैल हाथी ने लगातार दूसरी रात हमला कर एक महिला को मौत की नींद सुला दिया है। बिला और अमराई गांव में मची इस तबाही और वन विभाग की नाकामी की रोंगटे खड़े कर देने वाली पूरी दास्ताँ यहाँ दी गई है वरना आप भी जंगलों से सटे इलाकों में छिपे इस 'अदृश्य काल' की हकीकत को कभी नहीं जान पाएंगे।

Jan 5, 2026 - 14:14
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Goilkera Elephant: खूनी तांडव, गोइलकेरा में दंतैल हाथी का कहर, दूसरी रात भी एक महिला को पटककर मारा
Goilkera Elephant: खूनी तांडव, गोइलकेरा में दंतैल हाथी का कहर, दूसरी रात भी एक महिला को पटककर मारा

चक्रधरपुर/गोइलकेरा, 5 जनवरी 2026 – पश्चिम सिंहभूम जिले का गोइलकेरा प्रखंड इन दिनों एक 'खूनी दंतैल' हाथी के आतंक से कांप रहा है। जंगली हाथियों के हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं और अब स्थिति यह है कि लगातार दूसरी रात भी मौत ने एक ग्रामीण महिला को अपना शिकार बना लिया। बिला गांव में सोमवार की तड़के जब पूरा गांव गहरी नींद में था, तब दंतैल हाथी ने बस्ती में घुसकर कोहराम मचा दिया। हाथी ने एक महिला को अपनी सूंड में लपेटकर इतनी बुरी तरह पटका कि मौके पर ही उसकी दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद से गोइलकेरा के दर्जनों गांवों में सन्नाटा पसरा है, लेकिन लोगों के दिलों में वन विभाग के खिलाफ आक्रोश की आग सुलग रही है।

मौत की दूसरी रात: बिला गांव में मचा हाहाकार

हाथी का तांडव अब किसी सोची-समझी साजिश जैसा लगने लगा है। पिछले 24 घंटों के भीतर यह दूसरी मौत है।

  • अचानक हमला: प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि दंतैल हाथी अंधेरे का फायदा उठाकर गांव की सीमा में घुसा। महिला को संभलने का मौका तक नहीं मिला और हाथी ने उसे निशाना बनाकर पटक-पटक कर मार डाला।

  • दहशत का मंजर: चीख-पुकार सुनकर जब तक ग्रामीण लाठी-डंडे और मशाल लेकर जमा हुए, हाथी जंगल की ओट में जा छिपा था।

  • अमराई में भी कत्ल: गौरतलब है कि इससे ठीक एक रात पहले अमराई कितापी गांव के टोपनोसाई टोला में भी इसी हाथी ने एक महिला को मार डाला था, जबकि उसका पति और बेटा गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल में जंग लड़ रहे हैं।

खौफ के साये में ग्रामीण: रात भर नहीं सो रहे लोग

हाथी के इस खूनी खेल ने गोइलकेरा के ग्रामीणों को घरों में कैद होने पर मजबूर कर दिया है।

  1. शाम ढलते ही सन्नाटा: लोग रात के समय जरूरी कामों के लिए भी बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।

  2. वन विभाग पर गुस्सा: ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग केवल घटना के बाद आता है, जबकि सुरक्षा के नाम पर गांव में एक भी टॉर्च या पटाखा उपलब्ध नहीं कराया गया है।

  3. मुआवजे की गुहार: पीड़ित परिवारों के पास अब रोने के अलावा कुछ नहीं बचा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल मुआवजा और हाथी को खदेड़ने के लिए 'हाथी भगाओ दस्ते' (Elephant Squad) की मांग की है।

गोइलकेरा हाथी हमला: मुख्य विवरण (Conflict Snapshot)

विवरण जानकारी
ताजा घटना स्थल बिला गांव, गोइलकेरा प्रखंड
पिछली घटना अमराई कितापी गांव (टोपनोसाई टोला)
मृतकों की संख्या 02 (48 घंटों के भीतर)
मुख्य हमलावर एक अकेला दंतैल हाथी (Tusker)
मांग सुरक्षा गश्ती और तत्काल मुआवजा

इतिहास और संघर्ष: सारंडा और कोल्हान के जंगलों का 'खूनी' रिकॉर्ड

गोइलकेरा और चक्रधरपुर का यह इलाका एशिया के सबसे घने साल वनों (सारंडा) से सटा हुआ है। ऐतिहासिक रूप से यह हाथियों का पारंपरिक गलियारा (Corridor) रहा है। लेकिन पिछले एक दशक में जंगलों के बीच बढ़ते अतिक्रमण, अवैध कटाई और माइनिंग गतिविधियों ने हाथियों के स्वभाव को आक्रामक बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब कोई दंतैल हाथी अपने झुंड से अलग हो जाता है, तो वह 'लोनर' (Loner) बन जाता है और इंसानी बस्तियों को अपना दुश्मन समझने लगता है। 2020 के बाद से इस बेल्ट में मानव-हाथी संघर्ष में 30% की बढ़ोतरी हुई है। यह दंतैल हाथी भी उसी 'डिस्प्लेस्ड' श्रेणी का हिस्सा लग रहा है जो भोजन की तलाश में नहीं, बल्कि गुस्से में हमले कर रहा है।

क्या कर रहा है वन विभाग? दावों की हकीकत

घटना की सूचना के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुँची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।

  • निगरानी का अभाव: विभाग का दावा है कि वे हाथी की लोकेशन ट्रैक कर रहे हैं, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि चेतावनी प्रणाली (Early Warning System) पूरी तरह फेल है।

  • सामुदायिक जागरूकता: विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक ग्रामीणों को यह नहीं सिखाया जाएगा कि हाथी के सामने आने पर क्या करना है और क्या नहीं, तब तक ऐसी मौतें नहीं रुकेंगी।

  • गश्ती में तेजी: वन विभाग ने आश्वासन दिया है कि रात की गश्ती (Patrolling) बढ़ाई जाएगी और हाथियों के एक्सपर्ट्स को बुलाया जाएगा।

प्रशासन की चुप्पी और जलती लाशें

गोइलकेरा की मिट्टी एक बार फिर निर्दोष ग्रामीण के खून से लाल हुई है। अगर वन विभाग ने इस दंतैल हाथी को जल्द काबू नहीं किया, तो यह 'मौत का आंकड़ा' और भी बढ़ सकता है। फिलहाल, बिला गांव की सड़कों पर केवल सन्नाटा और अपनों को खोने का दर्द है।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।