Tatanagar Raid : बड़ी जब्ती, टाटानगर स्टेशन पर ऑपरेशन नारकोस का धमाका, 18 लाख का गांजा बरामद, ओडिशा से बनारस जा रहे तीन तस्कर धरे गए
टाटानगर रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ की उड़नदस्ता टीम ने 18 लाख रुपये से अधिक कीमत के गांजे के साथ तीन अंतर्राज्यीय तस्करों को दबोच लिया है। ओडिशा के रास्ते यूपी तक फैले तस्करी के इस बड़े नेटवर्क और "ऑपरेशन नारकोस" की इस सफल रेड की पूरी रोमांचक कहानी यहाँ दी गई है वरना आप भी रेलवे की इस सबसे बड़ी कार्रवाई की इनसाइड रिपोर्ट से अनजान रह जाएंगे।
टाटानगर, 29 दिसंबर 2025 – चक्रधरपुर रेल मंडल के टाटानगर स्टेशन पर बीती रात आरपीएफ की उड़नदस्ता टीम ने नशे के सौदागरों की कमर तोड़ दी है। आधी रात के सन्नाटे में जब पूरी दुनिया सो रही थी, तब टाटानगर के प्लेटफॉर्म संख्या 5 पर एक ऐसी कार्रवाई हुई जिसने तस्करी के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया। "ऑपरेशन नारकोस" के तहत हुई इस बड़ी कार्रवाई में आरपीएफ ने 36.5 किलोग्राम गांजा बरामद किया है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 18 लाख 25 हजार रुपये बताई जा रही है। पकड़े गए तीनों तस्कर शातिर तरीके से भारी-भरकम बैगों में नशा भरकर ओडिशा से उत्तर प्रदेश की ओर कूच कर रहे थे।
साढ़े तीन बजे का सन्नाटा और आरपीएफ की पैनी नजर
शनिवार देर रात करीब 3:30 बजे, जब 18006 समलेश्वरी एक्सप्रेस प्लेटफॉर्म संख्या 5 पर रुकी, तो उसमें से तीन युवक उतरे। उनके पास मौजूद पिट्ठू बैग और भारी ट्रॉली बैग ने आरपीएफ टीम का माथा ठनका दिया।
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संदिग्ध हावभाव: युवकों के चलने का तरीका और सामान का असामान्य वजन उड़नदस्ता टीम की नजरों से नहीं बच सका।
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जाल में फंसे तस्कर: जैसे ही ये तीनों नए फुट ओवरब्रिज (FOB) के रास्ते बाहर निकलने की फिराक में थे, आरपीएफ स्टाफ ने उन्हें घेर लिया।
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तलाशी में मिला खजाना: जब बैग खोले गए, तो पुलिस की आंखें फटी रह गई—बैग के अंदर प्लास्टिक की पन्नियों में बड़ी सफाई से पैक किया गया उच्च गुणवत्ता वाला गांजा ठसाठस भरा था।
ओडिशा से बनारस: तस्करी का 'प्रॉपर रूट'
पूछताछ में तस्करों ने जो खुलासा किया, वह सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय है।
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रुपरा स्टेशन का कनेक्शन: तस्करों ने कबूला कि उन्होंने यह खेप ओडिशा के रुपरा स्टेशन से ट्रेन में लोड की थी।
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टारगेट बनारस: नशे की यह बड़ी खेप उत्तर प्रदेश के बनारस (वाराणसी) में सप्लाई की जानी थी, जहाँ नए साल के जश्न के मद्देनजर इसकी भारी मांग थी।
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गिरफ्तार आरोपी: पकड़े गए आरोपियों में बिहार के पश्चिमी चंपारण का मंजूर अली (22), कुशीनगर का विवेकानंद गुप्ता (23) और बलिया निवासी अशोक गिरी (40) शामिल हैं।
टाटानगर गांजा तस्करी: मुख्य विवरण (Seizure Report)
| विवरण | जानकारी |
| अभियान का नाम | ऑपरेशन नारकोस (Operation Narcos) |
| बरामदगी | 36.5 किलोग्राम गांजा |
| अनुमानित कीमत | ₹18,25,000 (करीब 18.25 लाख) |
| ट्रेन का नाम | 18006 समलेश्वरी एक्सप्रेस |
| तस्करों का ठिकाना | बिहार एवं उत्तर प्रदेश |
इतिहास और आरपीएफ का रिकॉर्ड: "नारकोस" की सफलता
टाटानगर स्टेशन हमेशा से नशे के तस्करों के लिए एक संवेदनशील ट्रांजिट पॉइंट रहा है। वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त पी. शंकर कुट्टी के नेतृत्व में आरपीएफ ने पिछले कुछ महीनों में तस्करों के खिलाफ युद्ध छेड़ रखा है।
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पिछली कार्रवाई: इसी अभियान के तहत 28 नवंबर को पलामू के एक युवक से 17 किलो और 27 सितंबर को पटना के एक तस्कर से 20 किलो गांजा बरामद किया जा चुका है।
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आधुनिक तकनीक: अब केवल मुखबिरों के भरोसे नहीं, बल्कि हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरों और फेस रिकग्निशन तकनीक की मदद से संदिग्धों को ट्रैक किया जा रहा है। चक्रधरपुर मंडल की यह सक्रियता तस्करी के रूट को बदलने पर मजबूर कर रही है।
कानूनी कार्रवाई और आगे की जांच
आरपीएफ ने प्रारंभिक जब्ती और पूछताछ के बाद तीनों आरोपियों को टाटानगर रेल पुलिस (जीआरपी) को सौंप दिया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि ओडिशा में इस गिरोह का मुख्य सरगना कौन है और बनारस में यह गांजा किसे डिलीवर किया जाना था। क्या इसमें कोई बड़ा सिंडिकेट शामिल है? क्या यह खेप केवल बनारस तक सीमित थी या इसके तार अन्य राज्यों से भी जुड़े हैं? इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए तस्करों को रिमांड पर लिया जा सकता है।
अपराधियों के लिए खुली चेतावनी
टाटानगर आरपीएफ की यह सफलता दर्शाती है कि "ऑपरेशन नारकोस" केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर तस्करों के लिए काल बन गया है। रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि ट्रेनों का उपयोग मादक पदार्थों की तस्करी के लिए करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल टाटानगर स्टेशन पर सुरक्षा और बढ़ा दी गई है और हर आने-जाने वाली ट्रेन पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
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