Saraikela Scam: सरकारी स्कूल के निर्माण में बड़ा खेल! घटिया सामग्री से बन रहा भवन?
सरायकेला के एकलव्य मॉडल स्कूल के शिक्षक भवन में घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। ग्रामीणों के विरोध के बावजूद प्रशासन चुप है। जानिए पूरी रिपोर्ट।

सरायकेला: सरकारी इमारतों के निर्माण में घोटालों की खबरें आम हो गई हैं, लेकिन इस बार मामला झारखंड के सरायकेला जिले के चांडिल अनुमंडल क्षेत्र का है, जहां एकलव्य मॉडल स्कूल के शिक्षक भवन में घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। गांववालों ने जब इसका विरोध किया, तो उन्हें धमकाकर भगा दिया गया!
सरकारी स्कूल, जिसे आदिवासी बच्चों की शिक्षा के लिए उच्चस्तरीय सुविधाएं देने के उद्देश्य से बनाया जा रहा है, उसी में भ्रष्टाचार का ऐसा खेल खेला जा रहा है कि इमारत के खड़े होने से पहले ही उसकी नींव कमजोर नजर आ रही है।
कैसे हो रहा है भ्रष्टाचार?
झिमड़ी स्थित सोना डूंगरी में बन रहे इस शिक्षक भवन में लगभग 5000 सीएफटी मिट्टीनुमा बालू डंप किया गया है, जो सामान्य बालू से कहीं अधिक हल्का और कमजोर होता है। इसी घटिया बालू को सीमेंट में मिलाकर इमारत का निर्माण किया जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार,
खंभों (पिलर्स) में भी इस घटिया सामग्री के प्रमाण साफ दिख रहे हैं।
सिमेंट और रेत का सही अनुपात नहीं रखा जा रहा, जिससे दीवारें कमजोर बन रही हैं।
ठेकेदार से जब सवाल किया गया, तो उसने अभद्र भाषा में जवाब देकर ग्रामीणों को धमकाकर भगा दिया।
क्या है मजदूरों की हालत?
सरकारी निर्माण कार्य में मजदूरों के शोषण की तस्वीर भी सामने आई है।
महिला मजदूर चैती देवी ने बताया कि उन्हें सिर्फ 250 रुपये की मजदूरी दी जा रही है, जबकि सरकारी मजदूरी दर इससे कहीं अधिक है।
जब मजदूरों ने सही भुगतान की मांग की, तो उन्हें काम से निकालने की धमकी दे दी गई।
कई मजदूरों को कम मजदूरी के विरोध में पहले ही हटा दिया गया है।
प्रशासन की चुप्पी क्यों?
जब इस मामले में कार्यस्थल पर मौजूद मुंशी से निर्माण के शिलापट्ट और मजदूरी दरों के बारे में पूछा गया, तो उसने सीधे इनकार कर दिया।
हैरान करने वाली बात यह है कि जब घटिया बालू के बारे में पूछा गया, तो बताया गया कि भवन निर्माण के जूनियर इंजीनियर (JE) ने इसी बालू से निर्माण की अनुमति दी है।
क्या कहता है इतिहास? सरकारी निर्माण में भ्रष्टाचार कोई नई बात नहीं!
झारखंड में सरकारी भवनों और पुलों के घटिया निर्माण की कई घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं।
सितंबर 2023 में साहिबगंज जिले में एक सरकारी स्कूल की इमारत गिर गई थी, जिसमें लाखों का भ्रष्टाचार सामने आया।
रांची के धुर्वा इलाके में 2022 में एक सरकारी अस्पताल की छत गिर गई थी, जिसमें तीन लोग घायल हुए थे।
2020 में गोड्डा जिले में एक पुल उद्घाटन के कुछ ही महीनों बाद ध्वस्त हो गया था, जिसमें घटिया निर्माण सामग्री का खुलासा हुआ था।
अब सवाल यह है कि क्या एकलव्य मॉडल स्कूल के इस शिक्षक भवन का भी यही हाल होगा? क्या सरकार सिर्फ कागजों पर ही आदिवासी बच्चों के लिए उच्चस्तरीय शिक्षा की बातें कर रही है?
ग्रामीणों का गुस्सा बढ़ रहा है!
इस मामले में स्थानीय ग्रामीणों ने मांग की है कि जल्द से जल्द इस भ्रष्टाचार की जांच हो और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए।
संपूर्ण निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।
ठेकेदार और JE पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
मजदूरों को सही मजदूरी मिलनी चाहिए और उनके शोषण को रोका जाना चाहिए।
क्या अब जागेगा प्रशासन?
सरकारी फंड का इस तरह का दुरुपयोग और मजदूरों का शोषण कोई नया मामला नहीं है, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या इस बार भी कोई ठोस कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी फाइलों में दफन हो जाएगा?
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