Sahibganj Accident: झारखंड में रेल हादसे से मचा हड़कंप, दो मालगाड़ियों की भीषण टक्कर में 3 की मौत
साहिबगंज में दर्दनाक रेल हादसा! दो मालगाड़ियों की भीषण टक्कर में 3 की मौत, इंजन में लगी आग, रेलवे प्रशासन जांच में जुटा। जानें हादसे की पूरी जानकारी।

झारखंड के साहिबगंज जिले में मंगलवार सुबह भयावह रेल हादसा हुआ, जिसने हर किसी को हिला कर रख दिया। फरक्का-ललमटिया एमजीआर रेलवे लाइन पर दो मालगाड़ियों की भीषण टक्कर में दो लोको पायलट समेत तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना इतनी भयानक थी कि टक्कर के बाद इंजन और कोयले से लदी बोगियां आग के गोले में बदल गईं। मौके पर पहुंची रेलवे पुलिस और प्रशासन की टीम हालात को काबू करने में जुटी हुई है।
कैसे हुआ यह भीषण हादसा?
यह हादसा बरहेट थाना क्षेत्र के पास हुआ, जहां फरक्का की ओर से आ रही एक खाली मालगाड़ी रेलवे लाइन पर खड़ी थी। तभी ललमटिया की ओर से आ रही कोयला लदी तेज रफ्तार मालगाड़ी ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। घटना मंगलवार तड़के करीब 3:30 बजे की बताई जा रही है, जब पूरा इलाका धमाके और आग की लपटों से दहल उठा।
टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि:
दो इंजन पटरी से उतर गए और एक पूरी तरह ध्वस्त हो गया।
कोयले से लदी बोगियों में भयानक आग लग गई, जिसे काबू में करने के लिए घंटों मशक्कत करनी पड़ी।
मृतकों में दो लोको पायलट शामिल हैं, जो हादसे के वक्त ट्रेन चला रहे थे।
कम से कम 4-5 रेलकर्मी घायल हुए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
घटनास्थल पर हड़कंप, जांच में जुटी टीमें
घटना के बाद रेल प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू किया। घायलों को बरहेट के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। रेलवे के अधिकारी हादसे के पीछे की वजहों की जांच कर रहे हैं और मामले की हर कड़ी को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
रेल हादसों का काला इतिहास – झारखंड में पहले भी हुए हैं भीषण हादसे
झारखंड में पहले भी कई भयावह रेल हादसे हो चुके हैं। 2010 में झाड़ग्राम रेल हादसे में माओवादियों ने पटरी को उखाड़ दिया था, जिससे एक यात्री ट्रेन दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी और 150 से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी। इसी तरह, 2016 में भी झारखंड के बोकारो जिले में एक मालगाड़ी के पटरी से उतरने की घटना हुई थी।
क्या मानवीय लापरवाही बनी हादसे की वजह?
रेलवे सूत्रों के मुताबिक, इस हादसे के पीछे संकेत मिल रहे हैं कि मानवीय लापरवाही एक बड़ा कारण हो सकती है। आमतौर पर रेलवे ट्रैक पर खड़ी ट्रेनों के बारे में अगले आने वाले ट्रेनों को सूचना दी जाती है, लेकिन इस मामले में संकेत सही समय पर नहीं मिले, जिससे यह टक्कर हुई। हालांकि, जांच के बाद ही सटीक कारणों का खुलासा होगा।
हादसे के बाद लोगों में आक्रोश, रेलवे से जवाबदेही की मांग
रेल हादसे के बाद स्थानीय लोगों और रेल कर्मचारियों में भारी नाराजगी है। लोग रेलवे प्रशासन से सुरक्षा के बेहतर इंतजाम और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। दुर्घटनास्थल के पास सैकड़ों लोग जमा हो गए, जो इस दर्दनाक हादसे से सदमे में हैं।
क्या झारखंड में बढ़ रहा रेल हादसों का खतरा?
झारखंड एक खनिज संपदा से भरपूर राज्य है और यहां रोजाना हजारों मालगाड़ियां कोयला, लोहा और अन्य खनिजों को एक जगह से दूसरी जगह लेकर जाती हैं। भारी ट्रैफिक और रखरखाव की कमी के चलते रेल हादसों की संभावना बढ़ जाती है। अगर सुरक्षा उपायों को और मजबूत नहीं किया गया, तो इस तरह की घटनाएं दोबारा हो सकती हैं।
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