Parsudih Arrest: बारीगोड़ा के पूर्व उप-मुखिया की हत्या और डकैती का प्लान फेल, फरार अपराधी सौरभ सिंह गिरफ्तार
जमशेदपुर के परसुडीह में पूर्व उप-मुखिया की हत्या और डकैती की खौफनाक साजिश रचने वाला शातिर सौरभ सिंह पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। गोलपहाड़ी से हुई इस बड़ी गिरफ्तारी और अपराध के नेटवर्क की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
जमशेदपुर/परसुडीह, 14 अप्रैल 2026 – लौहनगरी जमशेदपुर के परसुडीह थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। बारीगोड़ा के पूर्व उप-मुखिया सह ट्रांसपोर्टर के घर डकैती डालने और उनकी हत्या करने की खौफनाक साजिश रचने वाले फरार अपराधी सौरभ सिंह उर्फ तोड़े को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। गुप्त सूचना के आधार पर गोलपहाड़ी क्षेत्र में की गई छापेमारी में वह दबोचा गया। सोमवार को आवश्यक पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। इस गिरफ्तारी के साथ ही पुलिस ने उस खूनी साजिश के आखिरी बचे हुए मोहरे को भी सलाखों के पीछे पहुँचा दिया है।
साजिश का पर्दाफाश: पुलिस ने ऐन वक्त पर टाली बड़ी वारदात
बारीगोड़ा के पूर्व उप-मुखिया अपराधियों के निशाने पर थे, लेकिन परसुडीह पुलिस की मुस्तैदी ने एक बड़े रक्तपात को होने से रोक दिया।
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खौफनाक मंसूबा: अपराधियों ने न केवल पूर्व उप-मुखिया के घर डकैती डालने का प्लान बनाया था, बल्कि उनकी हत्या करने का भी इरादा था। वे ट्रांसपोर्टर के व्यवसाय और वर्चस्व को निशाना बनाना चाहते थे।
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समय रहते एक्शन: परसुडीह पुलिस ने समय रहते इस साजिश का भंडाफोड़ किया और गैंग के सरगना समेत कई गुर्गों को पहले ही दबोच लिया था।
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चकमा देकर भागा था सौरभ: पिछली छापेमारी के दौरान गिरोह के बाकी सदस्य पकड़े गए थे, लेकिन सौरभ सिंह उर्फ तोड़े पुलिस की आँखों में धूल झोंककर फरार होने में सफल रहा था।
गिरफ्तारियों का सिलसिला: 'चिदु' गैंग का हुआ अंत
पुलिस ने इस केस में अब तक एक-एक कर पूरे गिरोह को बेनकाब किया है।
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मुख्य सरगना: गिरोह का मास्टरमाइंड शिव नारायण रजक उर्फ चिदु पुलिस की गिरफ्त में पहले ही आ चुका है।
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सह-आरोपी: चिदु के साथ रोशन सिंह उर्फ पाका, रोशन कुमार उर्फ गोलू बंगाली और आजाद पाल उर्फ बौबी को पुलिस पहले ही जेल भेज चुकी है।
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सौरभ का अंत: सौरभ सिंह की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस इस केस की चार्जशीट को और भी मजबूती से कोर्ट में पेश कर सकेगी।
वर्चस्व की जंग और बढ़ता अपराध
जमशेदपुर का दक्षिण-पूर्वी हिस्सा, जिसमें परसुडीह और बारीगोड़ा आते हैं, अपनी एक अलग भौगोलिक और सामाजिक पहचान रखता है।
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ट्रांसपोर्ट हब और रंजिश: बारीगोड़ा और परसुडीह का क्षेत्र टाटा स्टील और आसपास की औद्योगिक इकाइयों से जुड़ा हुआ है। यहाँ ट्रांसपोर्ट का बड़ा कारोबार है। इतिहास गवाह है कि जहाँ बड़ा पैसा होता है, वहां वर्चस्व की लड़ाई भी तेज होती है। पूर्व उप-मुखिया के खिलाफ रची गई साजिश इसी 'वर्चस्व' और 'लेवी' की पुरानी परंपरा का हिस्सा प्रतीत होती है।
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गोलपहाड़ी का आपराधिक कनेक्शन: गोलपहाड़ी का इलाका अपनी ऊँचाई और संकरी गलियों के कारण अक्सर अपराधियों के लिए सुरक्षित ठिकाना रहा है। पूर्व में भी कई गैंगस्टर्स ने इस इलाके को अपना 'सेफ हाउस' बनाया है, लेकिन हाल के वर्षों में जमशेदपुर पुलिस की बढ़ती गश्त ने इस 'सेफ जोन' को ध्वस्त किया है।
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पुलिस की ऐतिहासिक मुस्तैदी: परसुडीह थाना का रिकॉर्ड हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है क्योंकि यहाँ की घनी आबादी और औद्योगिक बेल्ट अपराधियों को छिपने का मौका देती है। लेकिन ऐन वक्त पर हत्या और डकैती जैसी बड़ी साजिश को नाकाम करना परसुडीह पुलिस की हालिया सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानी जा रही है।
अगली कार्रवाई: जेल में पूछताछ और सुरक्षा अलर्ट
सौरभ सिंह की गिरफ्तारी के बाद परसुडीह पुलिस अब इस मामले के अन्य संभावित लिंक खंगाल रही है।
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बैकवर्ड लिंकेज: पुलिस यह पता लगा रही है कि इन अपराधियों को हथियार और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट कौन दे रहा था। क्या इनके पीछे शहर का कोई बड़ा अंडरवर्ल्ड सिंडिकेट शामिल है?
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सुरक्षा व्यवस्था: पूर्व उप-मुखिया और उनके परिवार की सुरक्षा को देखते हुए बारीगोड़ा क्षेत्र में पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है।
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न्यायिक हिरासत: सौरभ सिंह को न्यायिक हिरासत में भेजने के बाद अब पुलिस कोर्ट से रिमांड मांग सकती है ताकि इस गिरोह के कुछ और अनसुलझे राजों से पर्दा उठ सके।
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