Latehar Raid: लातेहार जिला परिषद का बड़ा बाबू 65 हज़ार की रिश्वत लेते रंगे हाथ क्यों दबोचा गया, कार्यालय में क्यों मचा हड़कंप
क्या आप जानते हैं कि झारखंड के लातेहार जिला परिषद के प्रधान लिपिक संतोष सिंह को एसीबी ने 65 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ क्यों दबोचा? सरकारी काम के एवज में इस मोटी रकम की मांग क्यों की गई थी? शिकायतकर्ता ने एसीबी को कैसे सूचना दी और एसीबी ने जाल कैसे बिछाया? गिरफ्तारी के बाद जिला परिषद कार्यालय में क्यों सन्नाटा पसर गया? पूरी जानकारी पढ़ें!
लातेहार, 6 नवंबर 2025 – झारखंड के लातेहार जिले में भ्रष्टाचार ने सरकारी कामकाज को किस तरह जकड़ लिया है, यह बुधवार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की एक बड़ी कार्रवाई से स्पष्ट हो गया है। एसीबी पलामू की टीम ने एक सुनियोजित जाल बिछाकर जिला परिषद के प्रधान लिपिक (बड़ा बाबू) संतोष सिंह को 65 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ दबोच लिया। इस कार्रवाई के बाद से पूरे सरकारी महकमे में हड़कंप मच गया है, और यह सवाल उठने लगा है कि आखिर सरकारी काम के लिए आम आदमी को कब तक रिश्वत देनी पड़ेगी।
65 हजार की मोटी रकम: क्यों मांगी गई थी घूस
संतोष सिंह पर आरोप है कि उन्होंने एक सरकारी काम को कराने के एवज में शिकायतकर्ता से इस मोटी रकम की मांग की थी।
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शिकायत: घूस की मांग से परेशान होकर शिकायतकर्ता ने सीधे एसीबी से संपर्क किया और पूरे मामले की जानकारी दी।
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सत्यापन: एसीबी ने पहले शिकायत का सत्यापन किया और जब आरोप सही पाया गया, तो रिश्वतखोर को दबोचने के लिए पूरी योजना बनाई।
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एसीबी का जाल: सादी वर्दी में एसीबी के अधिकारी मौके पर मौजूद थे। जैसे ही संतोष सिंह ने शिकायतकर्ता से घूस की रकम ली, एसीबी की टीम ने उन्हें मौके पर ही रंगे हाथ दबोच लिया।
जिला परिषद कार्यालय में सन्नाटा: पूछताछ के लिए ले गई पलामू
संतोष सिंह की गिरफ्तारी की खबर फैलते ही जिला परिषद कार्यालय का माहौल पूरी तरह से बदल गया।
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हड़कंप: गिरफ्तारी के बाद से कार्यालय में सन्नाटा पसरा हुआ है और अन्य कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है।
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जांच: एसीबी संतोष सिंह को अपने साथ पलामू ले गई है, जहां उनसे आगे की पूछताछ की जा रही है। एसीबी अब यह पता लगाएगी कि भ्रष्टाचार के इस मामले में और कौन कौन लोग शामिल थे।
इतिहास में झारखंड में भ्रष्टाचार के ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां छोटे से लेकर बड़े सरकारी अधिकारियों को रिश्वत लेते दबोचा गया है। एसीबी की यह कार्रवाई आम जनता के बीच भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के लिए विश्वास पैदा करती है।
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