Jamshedpur Action: खाऊ गली में प्रशासन का डंडा, दुकानदारों में मचा हड़कंप
जमशेदपुर की खाऊ गली में प्रशासन ने अचानक कार्रवाई कर दो दर्जन से अधिक फुटपाथी दुकानें हटवा दीं। दुर्गा पूजा से पहले इस कदम से दुकानदारों में मायूसी और हड़कंप।
जमशेदपुर की चर्चित खाऊ गली शुक्रवार को अचानक प्रशासनिक कार्रवाई की वजह से सुर्खियों में आ गई। बिष्टुपुर थाना क्षेत्र के इस इलाके में लंबे समय से लगने वाली फुटपाथी दुकानों पर प्रशासन ने डंडा चलाते हुए करीब दो दर्जन से अधिक दुकानों को हटवा दिया। इस कार्रवाई से जहाँ प्रशासन का दावा है कि यह फैसला दुर्गा पूजा के दौरान जाम और सुरक्षा को देखते हुए लिया गया है, वहीं दुकानदारों के लिए यह मानो एक झटका बनकर आया।
अचानक हुई कार्रवाई, दुकानदार हक्के-बक्के
शुक्रवार की सुबह सबकुछ सामान्य था। रोज़ की तरह फुटपाथी दुकानदार अपनी दुकानें सजाने में लगे थे। तभी अचानक जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) और जुस्को की संयुक्त टीम मौके पर पहुँची और दुकानों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी। कार्रवाई इतनी तेज़ थी कि कई दुकानदारों को अपना सामान समेटने तक का मौका नहीं मिला।
स्थानीय लोगों ने बताया कि यह कार्रवाई पूरी तरह से अचानक हुई, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
प्रशासन का तर्क – सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण
जेएनएसी के सिटी मैनेजर जितेंद्र कुमार ने बताया कि खाऊ गली में अतिक्रमण की वजह से सड़क पर हमेशा भीड़ रहती थी। दुर्गा पूजा जैसे बड़े त्योहार में यह इलाका और भी ज्यादा भीड़भाड़ वाला हो जाता है। ऐसे में जाम और सुरक्षा के दृष्टिकोण से कार्रवाई करना अनिवार्य हो गया था।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि खाऊ गली के पास पहले भी कई आपराधिक घटनाएँ घट चुकी हैं। इस लिहाज से प्रशासन ने सख्ती दिखाना ज़रूरी समझा।
दुकानदारों की मायूसी – कमाई पर संकट
दुर्गा पूजा का समय हमेशा से दुकानदारों के लिए साल की सबसे बड़ी कमाई का मौका होता है। लोग शॉपिंग और खाने-पीने के लिए बड़ी संख्या में निकलते हैं। ऐसे में खाऊ गली जैसे पॉपुलर ठिकाने से फुटपाथी दुकानों का हटाया जाना दुकानदारों की कमाई पर बड़ा असर डालेगा।
एक दुकानदार ने नाराज़गी जताते हुए कहा –
"पूरे साल हम लोग पूजा के समय का इंतज़ार करते हैं। यही वो वक्त है जब सबसे ज्यादा बिक्री होती है। लेकिन इस कार्रवाई से हमारे घर का चूल्हा ठंडा पड़ जाएगा।"
खाऊ गली का इतिहास
जमशेदपुर की खाऊ गली सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि यहाँ की संस्कृति और खानपान का हिस्सा बन चुकी है।
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1980 के दशक से ही यहाँ फुटपाथ पर खाने-पीने की दुकानें सजने लगी थीं।
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धीरे-धीरे यह जगह युवाओं और परिवारों के लिए एक हॉटस्पॉट बन गई।
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समोसा, चाट, मोमोज़, रोल और मिठाइयों के लिए मशहूर इस गली का स्वाद लोगों के दिल में बस चुका है।
लेकिन साथ ही इस जगह पर भीड़ और अव्यवस्था की शिकायतें भी लगातार बढ़ती रही हैं।
स्थानीय निवासियों की प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन का कदम सही है, क्योंकि यहाँ रोज़ाना जाम लगता था और त्योहारों में यह समस्या दोगुनी हो जाती थी। वहीं दूसरी तरफ़ लोग यह भी मानते हैं कि प्रशासन को अचानक कार्रवाई के बजाय दुकानदारों को वैकल्पिक जगह मुहैया करानी चाहिए थी।
क्या आगे भी होगी ऐसी कार्रवाई?
सूत्रों का कहना है कि दुर्गा पूजा और छठ जैसे बड़े त्योहारों को देखते हुए शहर के अन्य इलाकों में भी इस तरह की कार्रवाई हो सकती है। प्रशासन का दावा है कि यह सिर्फ सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि शहर की सूरत बदलने के लिए भी किया जा रहा है।
खाऊ गली में प्रशासन की कार्रवाई ने जहाँ ट्रैफिक और सुरक्षा पर राहत की उम्मीद जगाई है, वहीं दुकानदारों के लिए यह समय बेहद कठिन हो गया है। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इन दुकानदारों को वैकल्पिक जगह मुहैया कराएगा, या फिर उनकी रोज़ी-रोटी इस त्योहार के मौसम में पूरी तरह चौपट हो जाएगी?
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