Koderma Online Fraud: एस्कॉर्ट सर्विस के नाम पर बड़ा खेल, QR कोड स्कैन करते ही खाली हो रहे बैंक खाते
कोडरमा में एस्कॉर्ट सर्विस के नाम पर चल रहे ऑनलाइन लूट के काले कारोबार का पर्दाफाश। कहीं आपका बैंक खाता भी इन ठगों के निशाने पर तो नहीं, अभी जानें पूरी सच्चाई।
कोडरमा: डिजिटल युग में आपकी एक छोटी सी दिलचस्पी आपको कंगाल बना सकती है। कोडरमा पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो एस्कॉर्ट सर्विस और हसीन चेहरों का लालच देकर लोगों की जेबें साफ कर रहा था। एसपी अनुदीप सिंह की पैनी नजर और गुप्त सूचना ने इस 'हनी ट्रैप' जैसे ऑनलाइन स्कैम के जाल को छिन्न-भिन्न कर दिया है।
जालसाजी का तरीका: तस्वीरों का मायाजाल और ठगी का QR कोड
कोडरमा के बेकोबार इलाके से संचालित हो रहे इस गिरोह का काम करने का तरीका बेहद शातिराना था। ये आरोपी विभिन्न वेबसाइटों पर फर्जी आईडी बनाते थे और वहां अपना मोबाइल नंबर डाल देते थे। जैसे ही कोई व्यक्ति अपनी जिज्ञासा या जरूरत के लिए इनसे संपर्क करता, ये जालसाज उसे सोशल मीडिया से उठाई गई खूबसूरत युवतियों की तस्वीरें भेजते थे।
जब सामने वाला व्यक्ति इनके झांसे में आ जाता, तो ये 'बुकिंग कन्फर्म' करने के नाम पर एक QR कोड भेजते थे। आरोपियों ने पूछताछ में कुबूला कि जैसे ही कोई मासूम या लालची व्यक्ति उस कोड को स्कैन करता, उसके खाते से पैसे सीधे इन ठगों के पास पहुँच जाते। पैसे मिलते ही ये अपना मोबाइल बंद कर लेते और सिम कार्ड बदल देते थे।
पुलिस रेड: भागते हुए दबोचे गए मास्टरमाइंड
कोडरमा थाना प्रभारी विकास पासवान के नेतृत्व में गठित टीम ने जब बेकोबार गांव में दबिश दी, तो वहां हड़कंप मच गया। पुलिस को देखते ही दो मुख्य आरोपी—अनिल पंडित और मंटू कुमार पंडित—खेतों की ओर भागने लगे। लेकिन मुस्तैद पुलिस टीम ने उन्हें खदेड़कर दबोच लिया। इनके पास से मिले मोबाइल फोन इस काली करतूत के सबसे बड़े गवाह बने।
इन फोन्स में दर्जनों फर्जी चैट, युवतियों की आपत्तिजनक तस्वीरें और वे तमाम QR कोड मिले हैं, जिनका इस्तेमाल ठगी के लिए किया जाता था। पुलिस को संदेह है कि इस गिरोह ने अब तक देश के अलग-अलग शहरों से लाखों रुपये की उगाही की है।
साइबर ठगी का नया गढ़ बनता जा रहा है यह इलाका
झारखंड का जामताड़ा कभी साइबर अपराध की राजधानी माना जाता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में अपराध का यह तरीका कोडरमा, गिरिडीह और देवघर जैसे जिलों में भी तेजी से फैला है।
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बदलता तरीका: पहले ठग बैंक अधिकारी बनकर कॉल करते थे, लेकिन अब वे मानवीय भावनाओं और प्रलोभनों (जैसे एस्कॉर्ट सर्विस या जॉब ऑफर) का सहारा लेकर 'साइकोलॉजिकल ठगी' कर रहे हैं।
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शिक्षा बनाम अपराध: पकड़े गए अधिकांश युवक तकनीकी रूप से साक्षर हैं, लेकिन वे अपनी इस प्रतिभा का उपयोग समाज को लूटने के लिए कर रहे हैं, जो एक चिंताजनक ऐतिहासिक बदलाव है।
7 और लोग रडार पर: छापेमारी जारी
पुलिस की जांच अभी थमी नहीं है। पकड़े गए आरोपियों ने बेकोबार गांव के ही 7 अन्य सहयोगियों के नाम उगले हैं। ये सभी इस सिंडिकेट का हिस्सा हैं और अलग-अलग भूमिकाएं निभाते हैं। कोडरमा पुलिस की टीमें इन फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही हैं। पुलिस का दावा है कि जल्द ही इस पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म कर दिया जाएगा।
पुलिस की सख्त चेतावनी और अपील
कोडरमा पुलिस ने आम नागरिकों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने साफ कहा है कि अनजान वेबसाइटों पर दिए गए नंबरों पर भरोसा न करें।
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QR कोड का खतरा: याद रखें कि पैसे प्राप्त करने के लिए पिन डालने या QR कोड स्कैन करने की जरूरत नहीं होती। अगर कोई आपसे स्कैन करवा रहा है, तो वह ठग है।
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पहचान की चोरी: सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से दोस्ती और उनकी भेजी गई तस्वीरों पर भरोसा करना भारी पड़ सकता है।
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तुरंत रिपोर्ट: अगर आप ठगी का शिकार होते हैं, तो बिना झिझके 1930 पर कॉल करें या स्थानीय थाने को सूचित करें।
सावधानी ही बचाव है: आपकी एक 'क्लिक' की उत्सुकता आपके जीवन भर की कमाई को पल भर में शून्य कर सकती है। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें।
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