Dalma Dispute : दलमा चेकनाका पर खूनी संघर्ष, टेल्को के युवकों और वनकर्मियों के बीच भिड़ंत, एमजीएम अस्पताल में भर्ती हुए घायल
दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के चेकनाका पर रविवार शाम टेल्को के युवकों और वनकर्मियों के बीच जमकर मारपीट हुई है। गाड़ियों के शीशे टूटने और घायल युवकों के एमजीएम में भर्ती होने की पूरी इनसाइड रिपोर्ट यहाँ देखें।
जमशेदपुर/दलमा, 13 अप्रैल 2026 – लौहनगरी के पिकनिक स्पॉट दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में रविवार की शाम उस वक्त चीख-पुकार मच गई, जब सैर-सपाटे के लिए आए जमशेदपुर के युवकों और वनकर्मियों के बीच हिंसक झड़प हो गई। टेल्को इलाके से आए 5 दोस्तों ने आरोप लगाया है कि दलमा के चेकनाका पर वनकर्मियों ने उनके साथ न केवल बर्बरतापूर्ण मारपीट की, बल्कि उनकी गाड़ियों के शीशे तोड़कर मोबाइल तक छीन लिए। इस घटना में दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिनका इलाज फिलहाल एमजीएम अस्पताल में चल रहा है। दूसरी ओर, वन विभाग के कर्मचारियों ने भी युवकों पर बदसलूकी और हमले का आरोप मढ़ा है, जिससे यह मामला पूरी तरह उलझ गया है।
शाम की सैर और खूनी संघर्ष: क्या हुआ था चेकनाका पर?
जानकारी के अनुसार, टेल्को के रहने वाले 5 युवक कार और बाइक के जरिए दलमा की पहाड़ियों का लुत्फ उठाने पहुंचे थे।
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बिना पास की एंट्री: युवकों ने स्वीकार किया कि वे गलती से या किसी अनजान रास्ते से बिना टिकट लिए सेंचुरी के भीतर दाखिल हो गए थे। उस वक्त उन्हें किसी ने नहीं टोका, लेकिन वापसी के समय मुसीबत खड़ी हो गई।
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चेकनाका पर विवाद: जैसे ही वे बाहर निकलने के लिए मेन गेट (चेकनाका) पहुंचे, वहां मौजूद एक वर्दीधारी और एक सिविल ड्रेस वाले व्यक्ति ने उन्हें रोक लिया। बिना पास के प्रवेश को लेकर बहस शुरू हुई जो देखते ही देखते गाली-गलौज में बदल गई।
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पाइप और पत्थरों से हमला: युवकों का आरोप है कि वनकर्मियों ने उन पर पानी के पाइप और पत्थरों से हमला किया। इस दौरान उनकी कार के शीशे चकनाचूर कर दिए गए। युवकों का यह भी दावा है कि उनका मोबाइल छीन लिया गया ताकि वे घटना का वीडियो न बना सकें।
अस्पताल में भर्ती घायल: वनकर्मियों के आरोपों को बताया झूठा
मारपीट के बाद घायल अवस्था में पहुंचे युवकों ने अपनी आपबीती सुनाई।
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एमजीएम में इलाज: दो युवकों को गंभीर चोटें आई हैं। अस्पताल में भर्ती युवकों ने कहा कि वे केवल घूमने गए थे और उन्होंने कोई कानून नहीं तोड़ा, सिवाय इसके कि वे गलत रास्ते से अंदर चले गए थे।
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जबरन बंधक बनाने का आरोप: युवकों के मुताबिक उन्हें जबरन काफी देर तक मेन गेट के पास रोके रखा गया और उनके साथ अपराधियों जैसा सुलूक किया गया।
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काउंटर आरोप: वन विभाग का कहना है कि युवकों ने शराब पी रखी थी और सरकारी ड्यूटी में बाधा डालते हुए कर्मियों पर हमला किया। हालांकि, अस्पताल में भर्ती युवकों ने शराब पीने या मारपीट शुरू करने के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
'हाथियों के घर' में इंसानी दखल और सुरक्षा चुनौतियां
दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी का इतिहास जितना समृद्ध है, उतना ही यहाँ पर्यटकों और वनकर्मियों के बीच टकराव का पुराना सिलसिला भी रहा है।
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1975 की विरासत: दलमा को आधिकारिक तौर पर 1975 में सेंचुरी घोषित किया गया था। तब से यह हाथियों और दुर्लभ वनस्पतियों का सुरक्षित घर रहा है। जमशेदपुर के करीब होने के कारण यहाँ सप्ताहांत (Weekends) पर हजारों की भीड़ उमड़ती है।
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सुरक्षा और नियम: सेंचुरी के नियम काफी सख्त हैं, जिसमें शाम 5 बजे के बाद आवाजाही और बिना पास के प्रवेश वर्जित है। इतिहास गवाह है कि कई बार पर्यटकों द्वारा शोर मचाने या नियमों को तोड़ने पर वन विभाग के साथ झड़पें हुई हैं।
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टेल्को का कनेक्शन: टेल्को और साकची जैसे शहरी इलाकों के युवा अक्सर एडवेंचर के चक्कर में 'चोर रास्तों' का इस्तेमाल करते हैं, जो अक्सर वन विभाग की टीम के साथ विवाद का मुख्य कारण बनता है।
जांच में जुटी पुलिस और वन विभाग
इस घटना के बाद अब दोनों पक्ष एक-दूसरे पर कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं।
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पुलिस की भूमिका: मानगो या संबंधित थाना क्षेत्र की पुलिस को इस मामले की सूचना दी गई है। पुलिस घायलों का बयान दर्ज कर यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि मारपीट की शुरुआत किसने की।
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सीसीटीवी फुटेज: चेकनाका पर लगे कैमरों की जांच की जा सकती है ताकि यह देखा जा सके कि क्या वाकई गाड़ियों के शीशे जानबूझकर तोड़े गए और मारपीट की नौबत क्यों आई।
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विभागीय जांच: वन विभाग भी अपने स्तर पर जांच कर रहा है कि ड्यूटी पर तैनात कर्मियों ने क्या आत्मरक्षा में बल प्रयोग किया या यह वाकई वर्दी का दुरुपयोग था।
दलमा जैसी शांत और खूबसूरत जगह पर रविवार शाम हुई यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। एक ओर जहाँ पर्यटकों को सेंचुरी के नियमों और पास की अनिवार्यता का सम्मान करना चाहिए, वहीं दूसरी ओर वनकर्मियों को भी कानून हाथ में लेने का हक नहीं है। गाड़ियों के शीशे तोड़ना और पाइप से हमला करना किसी भी जांच में सही नहीं ठहराया जा सकता। एमजीएम में भर्ती युवकों के घाव भले ही भर जाएं, लेकिन दलमा की पर्यटन छवि पर लगा यह दाग धोना मुश्किल होगा। फिलहाल, शहर में इस घटना को लेकर चर्चा गर्म है और लोग निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
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