Jamshedpur Tragedy: जमशेदपुर में रील बनाने का जानलेवा शौक, स्वर्णरेखा नदी में समा गया इकलौता बेटा, दोस्तों ने छोड़ा साथ

जमशेदपुर में रील बनाने के चक्कर में स्वर्णरेखा नदी में डूबे आयुष की दर्दनाक मौत हो गई है। जलकुंभी और चट्टानों में फंसने के कारण गोताखोरों को शव निकालने में घंटों मशक्कत करनी पड़ी। हादसे के बाद दोस्तों के भागने और परिजनों के सदमे की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।

Mar 18, 2026 - 14:07
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Jamshedpur Tragedy:  जमशेदपुर में रील बनाने का जानलेवा शौक, स्वर्णरेखा नदी में समा गया इकलौता बेटा, दोस्तों ने छोड़ा साथ
Jamshedpur Tragedy: जमशेदपुर में रील बनाने का जानलेवा शौक, स्वर्णरेखा नदी में समा गया इकलौता बेटा, दोस्तों ने छोड़ा साथ

जमशेदपुर/लौहनगरी, 18 मार्च 2026 – लौहनगरी जमशेदपुर में सोशल मीडिया पर रील बनाने का जुनून एक बार फिर एक हंसते-खेलते परिवार के लिए काल बन गया। स्वर्णरेखा नदी के किनारे दोस्तों के साथ नहाने और वीडियो शूट करने आए आयुष नाम के युवक की डूबने से दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा न केवल एक जान जाने की दुखद खबर है, बल्कि दोस्ती के नाम पर लगे उस दाग की भी कहानी है, जहाँ संकट के समय दोस्त ही साथ छोड़कर भाग खड़े हुए। करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद गोताखोरों ने आयुष के बेजान शरीर को पानी से बाहर निकाला, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। एमजीएम अस्पताल के डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया है।

जलकुंभी का जाल और मौत की गहराई

प्रत्यक्षदर्शियों और गोताखोरों के अनुसार, नदी का वह हिस्सा जहाँ आयुष डूबा, काफी खतरनाक था।

  • अदृश्य खतरा: नदी में करीब दस फीट गहरा पानी था और सतह पर भारी मात्रा में जलकुंभी फैली हुई थी।

  • चट्टानों में फंसी सांसें: आशंका जताई जा रही है कि नहाने या रील बनाने के दौरान आयुष का पैर फिसला और वह नीचे मौजूद चट्टानों और जलकुंभी के जाल में बुरी तरह उलझ गया। दम घुटने के कारण वह बाहर नहीं निकल सका और नदी की गहराई ने उसे लील लिया।

  • देर से मिली सूचना: सबसे दुखद बात यह रही कि घटना के तुरंत बाद आयुष के दोस्त मदद करने या घरवालों को बताने के बजाय डरकर मौके से भाग निकले। इस कारण परिजनों तक सूचना पहुँचने में साढ़े तीन घंटे की देरी हो गई, जिससे बचाने की रही-सही उम्मीद भी खत्म हो गई।

इकलौते बेटे का जाना: सदमे में परिवार

आयुष अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसकी असमय मौत ने घर का चिराग बुझा दिया है।

  1. पिता की मांग: आयुष के पिता ने पुलिस प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहराई से जांच करने की मांग की है। उन्हें शक है कि रील बनाने के फेर में कहीं कोई लापरवाही या दोस्तों का दबाव तो नहीं था।

  2. इलाके में शोक: जैसे ही आयुष की मौत की खबर मोहल्ले में पहुँची, पूरे इलाके में सन्नाटा पसर गया। हर कोई उस मासूम की तस्वीर देख आंखों में आंसू लिए खड़ा था।

स्वर्णरेखा नदी—जीवनदायिनी से 'डेथ ट्रैप' बनने तक का सफर

जमशेदपुर की पहचान कही जाने वाली स्वर्णरेखा नदी का अपना एक गौरवशाली इतिहास है।

  • टाटा स्टील की लाइफलाइन: 1907 में जब जमशेदपुर (साकची) को स्टील प्लांट के लिए चुना गया, तो स्वर्णरेखा और खरकई नदियों का संगम ही सबसे बड़ा कारण था। सदियों से यह नदी इस क्षेत्र की प्यास बुझाती आई है।

  • खतरनाक घाट: पिछले एक दशक में स्वर्णरेखा नदी के विभिन्न घाट (विशेषकर मानगो और दोमुहानी क्षेत्र) हादसों के केंद्र बन गए हैं। इतिहास गवाह है कि जमशेदपुर में होने वाली 70% डूबने की घटनाएं रील बनाने या सेल्फी लेने के चक्कर में हुई हैं। 2021 और 2023 में भी ठीक इसी तरह के मामले सामने आए थे जहाँ युवाओं ने 'लाइक्स' के चक्कर में अपनी जान जोखिम में डाली।

  • जलकुंभी का संकट: औद्योगिक कचरे और बढ़ते प्रदूषण के कारण नदी में जलकुंभी का साम्राज्य बढ़ता जा रहा है। यह जलकुंभी तैराकों के लिए 'नेचुरल ट्रैप' का काम करती है। आयुष की मौत ने एक बार फिर नदी के घाटों पर सुरक्षा और बैरिकेडिंग की ऐतिहासिक विफलता को उजागर कर दिया है। प्रशासन ने कई बार चेतावनी दी है, लेकिन रील कल्चर का भूत सुरक्षा के हर नियम पर भारी पड़ रहा है।

प्रशासनिक चेतावनी: रील नहीं, जान कीमती है

पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और उन दोस्तों की तलाश की जा रही है जो मौके से भागे थे।

  • नदी किनारे पहरा: जमशेदपुर पुलिस अब प्रमुख घाटों पर गश्त बढ़ाने और चेतावनी बोर्ड लगाने की योजना बना रही है।

  • युवाओं से अपील: अभिभावकों को भी सलाह दी गई है कि वे अपने बच्चों की गतिविधियों और नदी किनारे जाने की आदतों पर नजर रखें।

आयुष की मौत केवल एक हादसा नहीं, बल्कि उन तमाम युवाओं के लिए एक सबक है जो चंद सेकंड की रील के लिए अपनी जिंदगी दांव पर लगा देते हैं। स्वर्णरेखा की लहरें आज फिर एक माँ की गोद सूनी कर गईं। वह पानी जिसे जीवन देना था, आज वह जलकुंभी और चट्टानों के मेल से 'मौत का कुआं' साबित हुआ। क्या हम अब भी नहीं जागेंगे?

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।