Jamshedpur Religious New : जमशेदपुर में जीण माता का भव्य मंगल पाठ, 1501 महिलाओं ने ओढ़ी चुनरी, भजनों पर झूमी लौहनगरी
साकची धालभूम क्लब में श्री जीण माता परिवार द्वारा आयोजित 20वां वार्षिक महोत्सव ऐतिहासिक रहा। 1501 महिलाओं के महा मंगल पाठ और सूरत-जयपुर के कलाकारों की भजन प्रस्तुति ने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वातानुकूलित पंडाल में सजे भव्य दरबार और छप्पन भोग की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
जमशेदपुर/साकची, 18 मार्च 2026 – लौहनगरी जमशेदपुर मंगलवार को पूरी तरह 'जीण मय' हो गई। मौका था साकची धालभूम क्लब मैदान में आयोजित श्री जीण माता परिवार के 20वें भव्य वार्षिक महोत्सव का। भक्ति, श्रद्धा और राजस्थानी संस्कृति के अनूठे संगम ने शहरवासियों को भावविभोर कर दिया। कड़ी गर्मी को देखते हुए बनाए गए विशाल वातानुकूलित (AC) पंडाल में जब 1501 महिलाओं ने एक साथ राजस्थानी परिधान और चुनरी ओढ़कर महा मंगल पाठ शुरू किया, तो नजारा अलौकिक हो उठा। दोपहर से शुरू हुआ यह आध्यात्मिक अनुष्ठान देर रात महाआरती तक चला, जिसमें न केवल जमशेदपुर बल्कि पश्चिम बंगाल और झारखंड के विभिन्न जिलों से हजारों भक्त उमड़े।
महा मंगल पाठ: 1501 महिलाओं का शक्ति प्रदर्शन
महोत्सव का मुख्य आकर्षण दोपहर 3 बजे शुरू हुआ महा मंगल पाठ रहा।
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दिव्य उपस्थिति: सूरत से आई प्रसिद्ध कलाकार सुरभि बिरजूका ने अपनी मधुर आवाज में मंगल पाठ का वाचन किया। उनके भजनों पर महिलाएं इस कदर भावुक हुईं कि पूरा पंडाल तालियों और जयकारों से गूँज उठा।
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परंपरा का रंग: राजस्थानी संस्कृति की झलक हर ओर दिखाई दी। चुनड़ी, गजरा, मेंहदी और बधाई उत्सव के दौरान "हरी-हरी मेंहदी रचे..." और "ओढ़ो-ओढ़ो म्हरी माता रानी..." जैसे भजनों पर महिलाएं झूमने को मजबूर हो गईं।
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यजमान और पूजन: महोत्सव का शुभारंभ यजमान कुमुद-रमेश अग्रवाल और श्यामलता-अनिल अग्रवाल ने अखंड ज्योत प्रज्ज्वलित कर किया। पुजारी अमित शर्मा ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ माता का आह्वान किया।
भजनों की अमृत वर्षा: जयपुर के कलाकारों ने बांधा समां
संध्या 8 बजे से भजनों का दौर शुरू हुआ, जिसमें जयपुर के आमंत्रित कलाकार रविश सोनी, सोनम सोनी और मास्टर गुरु सोनी ने अपनी गायकी से जादू बिखेर दिया।
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लोकप्रिय भजन: "गोरया की महारानी हैं जिसे मैं प्यार करता हूँ..." और "जीण भवानी मैया थारी याद सतावे..." जैसे भजनों ने भक्तों को अपनी जगह से उठकर नाचने पर मजबूर कर दिया।
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भव्य दरबार: कोलकाता के कारीगरों द्वारा तैयार किया गया माता का अलौकिक दरबार और अखंड ज्योत आकर्षण का केंद्र बनी रही।
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छप्पन भोग: माता रानी को छप्पन भोग अर्पित किया गया, जिसके बाद करीब 3000 से अधिक भक्तों ने 'जीण रसोई' (भंडारा) में महाप्रसाद ग्रहण किया।
सेवा और सम्मान: समाजसेवियों का जुटा जमावड़ा
संस्था के संयोजक मनीष और आशीष खन्ना के नेतृत्व में पूरी टीम ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए दिन-रात एक कर दिया।
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सम्मान समारोह: बतौर अतिथि रामकृष्ण चौधरी, ओम प्रकाश रिंगसिया, उमेश शाह और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। संस्था ने सभी अतिथियों को अंग वस्त्र और दुपट्टा देकर सम्मानित किया।
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योगदान: तुलसी खेमका, शंभू खन्ना, बजरंग अग्रवाल और अन्य सदस्यों के परिश्रम से कार्यक्रम निर्विघ्न संपन्न हुआ।
साकची धालभूम क्लब में आयोजित यह 20वां वार्षिक महोत्सव श्रद्धा और भव्यता की नई मिसाल पेश कर गया। 1501 महिलाओं का एक साथ मंगल पाठ करना महिला शक्ति और आस्था का अद्भुत उदाहरण है। माता के दरबार में देश के विकास की प्रार्थना के साथ शुरू हुआ यह अनुष्ठान भक्तों की स्मृतियों में लंबे समय तक ताजा रहेगा।
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