Chatra Raid: फैक्ट्री पकड़ी: चतरा में घर के भीतर चल रही मिनी शराब फैक्ट्री ध्वस्त, 5 लाख का नकली माल जब्त, 3 तस्कर गिरफ्तार
चतरा के वशिष्ठ नगर जोरी थाना क्षेत्र में पुलिस और उत्पाद विभाग ने एक घर में चल रही अवैध शराब फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। रॉयल स्टैग जैसे महंगे ब्रांड्स के नाम पर बेची जा रही जहरीली शराब और भारी मात्रा में स्प्रिट बरामद की गई है। इस गिरोह के झारखंड-बिहार नेटवर्क की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
चतरा/झारखंड, 18 मार्च 2026 – झारखंड के चतरा जिले में मौत के सौदागरों के खिलाफ पुलिस और उत्पाद विभाग ने एक बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। वशिष्ठ नगर जोरी थाना क्षेत्र के पोस्तिया गांव में एक साधारण से दिखने वाले घर के भीतर चल रही 'अवैध मिनी शराब फैक्ट्री' का भंडाफोड़ किया गया है। यहाँ ब्रांडेड बोतलों में स्प्रिट और जहरीला केमिकल भरकर उसे ऊंचे दामों पर बेचने का काला खेल चल रहा था। छापेमारी के दौरान प्रशासन ने करीब 5 लाख रुपये मूल्य की नकली शराब जब्त की है। पुलिस ने मौके से तीन शातिर तस्करों को दबोच लिया है, जबकि गिरोह के मुख्य सरगना अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल रहे।
रॉयल स्टैग के नाम पर 'जहर': ऐसे होता था खेल
उत्पाद विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि अनिल कुमार यादव के घर में बड़े पैमाने पर मिलावटी शराब तैयार की जा रही है।
-
ब्रांडिंग का धोखा: तस्कर रॉयल स्टैग (Royal Stag) और रॉयल चैलेंज (Royal Challenge) जैसे नामी ब्रांड्स की खाली बोतलों का इस्तेमाल करते थे। इन पर नकली स्टिकर और ढक्कन लगाकर इन्हें सील करने के लिए आधुनिक मशीनों का प्रयोग किया जाता था।
-
बिहार कनेक्शन: चूंकि बिहार में पूर्ण शराबबंदी है, इसलिए माफिया चतरा के इन सुदूर गांवों में नकली शराब तैयार कर उसे बिहार की सीमाओं में खपाते थे। वहां इसे 'ओरिजिनल' बताकर दोगुने से तिगुने दामों पर बेचा जाता था।
-
बरामदगी की सूची: पुलिस ने मौके से 1318 बोतलें तैयार शराब, भारी मात्रा में कच्चा स्प्रिट, ढक्कन और बोतल सील करने वाली मशीन बरामद की है।
तस्करों का नेटवर्क: 3 गिरफ्तार, मास्टरमाइंड की तलाश
पुलिस ने इस छापेमारी में अनिल कुमार यादव, बीरबल कुमार और ब्रजेश यादव को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।
-
फरार आरोपी: पुलिस के अनुसार, इस पूरे सिंडिकेट का मास्टरमाइंड दिलीप यादव और मोहन यादव है। ये दोनों ही इस धंधे को फंड और लॉजिस्टिक मुहैया कराते थे।
-
जहरीली शराब का खतरा: उत्पाद अधीक्षक ने चेतावनी दी है कि इस फैक्ट्री में स्प्रिट के साथ जो केमिकल मिलाए जा रहे थे, वे मानव जीवन के लिए अत्यंत घातक हैं। यह सीधे तौर पर लोगों की जान से खिलवाड़ था।
चतरा का 'जोरी' क्षेत्र और अवैध शराब का पुराना नाता
चतरा का वशिष्ठ नगर जोरी थाना क्षेत्र भौगोलिक रूप से बिहार की सीमा (गया जिला) के काफी करीब है।
-
बॉर्डर की राजनीति: ऐतिहासिक रूप से चतरा के ये सीमावर्ती गांव हमेशा से तस्करी के सुरक्षित ठिकाने रहे हैं। 2016 में जब बिहार में शराबबंदी लागू हुई, तब से झारखंड के चतरा और हजारीबाग के सीमावर्ती इलाकों में 'मिनी शराब फैक्ट्रियों' की बाढ़ सी आ गई है।
-
अतीत की घटनाएं: इतिहास गवाह है कि 2018 और 2021 में भी जोरी और हंटरगंज के इलाकों में ऐसी ही मिनी फैक्ट्रियां पकड़ी गई थीं। उस समय भी तस्करों ने रिहायशी घरों को ही अपना ढाल बनाया था। चतरा का जोरी क्षेत्र पहले अफीम की खेती के लिए चर्चा में रहता था, लेकिन अब यह 'सिंथेटिक और नकली शराब' का नया हब बनता जा रहा है।
-
प्रशासनिक संघर्ष: चतरा पुलिस और उत्पाद विभाग का इतिहास रहा है कि उन्होंने समय-समय पर इन ठिकानों को ध्वस्त किया है, लेकिन शराब माफिया हर बार नए मास्टरमाइंड के साथ सक्रिय हो जाते हैं। आज की यह कार्रवाई पिछले दो वर्षों की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।
उत्पाद विभाग का अल्टीमेटम: "नहीं बख्शे जाएंगे अपराधी"
उत्पाद अधीक्षक ने स्पष्ट कर दिया है कि चतरा की धरती पर अवैध शराब का कारोबार करने वालों के दिन अब गिनती के बचे हैं।
-
जांच का दायरा: पुलिस अब गिरफ्तार तस्करों के मोबाइल कॉल रिकॉर्ड्स खंगाल रही है ताकि बिहार में बैठे उनके खरीदारों (रिसीवर्स) का पता लगाया जा सके।
-
गांवों में नजर: प्रशासन ने स्थानीय ग्रामीणों से भी अपील की है कि अगर उनके आसपास किसी भी घर में संदिग्ध गतिविधियां या स्प्रिट की गंध आए, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।
पोस्तिया गांव में पकड़ी गई यह फैक्ट्री केवल एक कानूनी मामला नहीं, बल्कि एक संभावित त्रासदी को टालने वाली घटना है। नकली शराब अक्सर जानलेवा साबित होती है। पुलिस की इस मुस्तैदी ने न केवल 5 लाख के अवैध माल को नष्ट किया, बल्कि उन मासूमों की जान भी बचाई जो इस जहरीली शराब के खरीदार हो सकते थे। क्या पुलिस अब फरार मास्टरमाइंड दिलीप और मोहन यादव को पकड़कर इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुँच पाएगी?
What's Your Reaction?


