Giridih Arrest: गिरिडीह में बड़ी डकैती की योजना रच रहे तीन खूंखार अपराधी गिरफ्तार, ज्वेलरी शॉप लूट का आरोपी हथियार के साथ दबोचा
गिरिडीह पुलिस ने पंचम्बा थाना क्षेत्र के बुढ़वा आहर तालाब के पास छापेमारी कर लूट की साजिश रच रहे तीन शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। 3 लाख की ज्वेलरी लूट में शामिल इन बदमाशों के पास से देशी कट्टा बरामद हुआ है। पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई और अपराधियों के पुराने रिकॉर्ड की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
गिरिडीह/झारखंड, 18 मार्च 2026 – झारखंड के गिरिडीह जिले में बेखौफ अपराधियों के खिलाफ पुलिस ने एक बार फिर सर्जिकल स्ट्राइक की है। एसपी डॉ. बिमल कुमार को मिली एक गुप्त सूचना ने शहर में होने वाली एक बड़ी डकैती की वारदात को टाल दिया। पंचम्बा थाना क्षेत्र के बुढ़वा आहर तालाब के पास घात लगाकर बैठे तीन शातिर अपराधियों को पुलिस ने घेराबंदी कर दबोच लिया है। ये अपराधी किसी बड़ी लूट को अंजाम देने के लिए हथियार के साथ जमा हुए थे। पकड़े गए बदमाशों का तार पिछले महीने हुई एक बड़ी ज्वेलरी लूट से भी जुड़ा है, जिससे गिरिडीह पुलिस की इस कामयाबी का महत्व और बढ़ गया है।
तालाब किनारे 'घेराबंदी': डीएसपी कौशर अली का सफल ऑपरेशन
जैसे ही एसपी डॉ. बिमल कुमार को सूचना मिली कि बुढ़वा आहर तालाब के सुनसान इलाके में कुछ अपराधी संदिग्ध गतिविधियों में शामिल हैं, उन्होंने तुरंत एक्शन लिया।
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विशेष टीम का गठन: डीएसपी-2 कौशर अली के नेतृत्व में एक विशेष छापेमारी दल बनाया गया।
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छापेमारी: पुलिस टीम ने जब तालाब के पास दबिश दी, तो अपराधी भागने की कोशिश करने लगे। लेकिन जवानों ने मुस्तैदी दिखाते हुए तीनों को धर दबोचा।
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हथियार बरामद: तलाशी के दौरान अपराधियों के पास से एक देशी कट्टा और अन्य संदिग्ध सामान बरामद किया गया है, जिसका इस्तेमाल वे वारदात में करने वाले थे।
3 लाख की ज्वेलरी लूट का खुलासा: पुराना है खूनी इतिहास
डीएसपी कौशर अली ने मीडिया को बताया कि ये कोई साधारण अपराधी नहीं हैं, बल्कि पेशेवर लुटेरे हैं।
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भरकट्टा लूट कांड: पूछताछ में यह बड़ा खुलासा हुआ कि बीते 28 फरवरी को भरकट्टा ओपी क्षेत्र के भलुआ सारंडा रोड पर एक ज्वेलरी दुकान में हुई लूट में भी यही गिरोह शामिल था।
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लाखों का माल: उस वक्त इन्होंने डरा-धमकाकर करीब 3 लाख रुपये नकद और भारी मात्रा में जेवरात लूट लिए थे। पुलिस काफी समय से इनकी तलाश में थी।
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अपराधिक रिकॉर्ड: पकड़े गए तीनों अपराधियों का पुराना रिकॉर्ड रहा है और वे जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में चोरी और लूट की कई वारदातों को अंजाम दे चुके हैं।
गिरिडीह की 'माइका बेल्ट' और संगठित लूट का डरावना अतीत
गिरिडीह जिले का इतिहास अपनी 'माइका' (अभ्रक) खदानों और पारसनाथ पहाड़ियों की पवित्रता के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन अपराध की दुनिया में यहाँ का 'ज्वेलरी और नकद लूट' का इतिहास भी पुराना रहा है।
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भौगोलिक चुनौती: गिरिडीह के घने जंगल और पहाड़ी रास्ते ऐतिहासिक रूप से अपराधियों के लिए सुरक्षित ठिकाने रहे हैं। 1990 के दशक में भी यहाँ के ज्वेलरी व्यापारियों को निशाना बनाने वाले कई अंतर्राज्यीय गिरोह सक्रिय थे।
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बदलता पैटर्न: इतिहास गवाह है कि गिरिडीह में पहले अपराधी मुख्य रूप से रात के सन्नाटे में सेंधमारी करते थे, लेकिन पिछले 10 सालों में 'हथियार दिखाकर दिनदहाड़े लूट' करने का चलन बढ़ा है। भरकट्टा और पंचम्बा जैसे इलाके अपनी सघन बसावट और व्यापारिक महत्व के कारण हमेशा से लुटेरों के रडार पर रहे हैं। बुढ़वा आहर तालाब जैसे स्थान ऐतिहासिक रूप से अपराधियों के 'मीटिंग पॉइंट' रहे हैं क्योंकि यहाँ से भागने के कई रास्ते ग्रामीण इलाकों की ओर खुलते हैं। आज की यह गिरफ्तारी साबित करती है कि गिरिडीह पुलिस अब अपराधियों के उन 'सुरक्षित ठिकानों' को पहचानने में माहिर हो चुकी है जहाँ कभी पुलिस पहुँचने से कतराती थी।
पुलिस की अपील: "सतर्क रहें और सूचना दें"
डीएसपी कौशर अली ने जनता से अपील की है कि वे सुरक्षा व्यवस्था में पुलिस का सहयोग करें।
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आगे की जांच: पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इस गिरोह को हथियार कहाँ से सप्लाई हो रहे थे और लूटे गए जेवरात को ये कहाँ खपाते थे।
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नेटवर्क का खात्मा: पकड़े गए अपराधियों के अन्य साथियों की तलाश में छापेमारी जारी है। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ में गिरिडीह और आसपास के जिलों में हुई कई अनसुलझी लूट की वारदातों का खुलासा होगा।
गिरिडीह पुलिस की इस मुस्तैदी ने न केवल 28 फरवरी की लूट का हिसाब बराबर किया, बल्कि एक नई वारदात को होने से पहले ही रोक दिया। 350 करोड़ के स्टेशन पुनर्विकास और शहर के बढ़ते व्यापारिक कद के बीच अपराधियों पर इस तरह की नकेल कसना बेहद जरूरी है। क्या पुलिस अब उस 'किंगपिन' तक पहुँच पाएगी जो इन युवाओं को हथियार देकर लूट की सड़कों पर धकेल रहा है?
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