Jamshedpur Raid: जमशेदपुर के बोड़ाम में महुआ शराब का काला साम्राज्य खत्म, सीएम सचिवालय की सख्ती के बाद बड़ा एक्शन
मुख्यमंत्री सचिवालय के निर्देश पर जमशेदपुर के बोड़ाम में उत्पाद विभाग ने बड़ी छापेमारी की है। बोंगाई गांव में अवैध महुआ शराब भट्टी को ध्वस्त कर भारी मात्रा में जावा महुआ विनष्ट किया गया। आरोपी सुनील मंडल की गिरफ्तारी और प्रशासन के इस 'जीरो टॉलरेंस' एक्शन की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
जमशेदपुर/लौहनगरी, 18 मार्च 2026 – झारखंड की राजधानी रांची से लेकर जमशेदपुर तक 'अवैध शराब' के खिलाफ एक बड़ी प्रशासनिक सर्जिकल स्ट्राइक देखने को मिली है। मुख्यमंत्री सचिवालय जनशिकायत कोषांग और उपायुक्त पूर्वी सिंहभूम की गोपनीय शाखा को मिली गंभीर शिकायतों के बाद, जमशेदपुर के बोड़ाम थाना क्षेत्र में उत्पाद विभाग ने 'मौत की भट्टी' पर धावा बोल दिया। ग्राम बोंगाई में चल रहे अवैध महुआ चुलाई के इस काले कारोबार का न केवल भंडाफोड़ किया गया, बल्कि मौके पर मौजूद भारी मात्रा में कच्चा माल भी नष्ट कर दिया गया। इस कार्रवाई ने उन माफियाओं की नींद उड़ा दी है जो सुदूर गांवों को अवैध नशे का सुरक्षित ठिकाना समझते थे।
सीएम सचिवालय का डंडा: बोंगाई में उत्पाद विभाग की दबिश
यह छापेमारी केवल रूटीन चेकिंग नहीं थी, बल्कि सीधे मुख्यमंत्री सचिवालय के रडार पर थी।
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सटीक टिप: जनशिकायत कोषांग को लगातार सूचना मिल रही थी कि बोड़ाम के ग्रामीण अंचलों में बड़े पैमाने पर अवैध शराब का निर्माण हो रहा है।
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बड़ी बरामदगी: सहायक आयुक्त उत्पाद के नेतृत्व में जब टीम बोंगाई पहुँची, तो वहां सुनील मंडल की जमीन पर महुआ चुलाई का अवैध सेटअप मिला।
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विनाश की कार्रवाई: टीम ने मौके से लगभग 40 किलोग्राम जावा महुआ बरामद किया। शराब तैयार करने के इस कच्चे माल को पुलिस ने घटनास्थल पर ही मिट्टी में मिलाकर विनष्ट कर दिया, ताकि दोबारा इसका इस्तेमाल न हो सके।
आरोपी गिरफ्तार: कानूनी शिकंजे में सुनील मंडल
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मुख्य आरोपी सुनील मंडल को धर दबोचा है।
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उत्पाद अधिनियम: आरोपी के खिलाफ उत्पाद अधिनियम की कड़ी और सुसंगत धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।
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सख्त चेतावनी: विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि यह अभियान केवल एक दिन का नहीं है। आने वाले दिनों में जमशेदपुर के आसपास के अन्य गांवों में भी इसी तरह की 'क्लीन स्वीप' कार्रवाई जारी रहेगी।
बोड़ाम और दलमा की तराई—अवैध शराब का 'प्राकृतिक' अड्डा
जमशेदपुर का बोड़ाम क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता और दलमा की पहाड़ियों के लिए जाना जाता है, लेकिन इसका एक कड़वा ऐतिहासिक पहलू भी है।
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महुआ और संस्कृति: झारखंड के आदिवासी और ग्रामीण जीवन में महुआ का पेड़ ऐतिहासिक रूप से पूजनीय रहा है। सदियों से इसका उपयोग पारंपरिक पेय के लिए होता आया है।
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व्यवसायीकरण का दाग: 1990 के दशक के बाद, पारंपरिक पेय बनाने की यह कला 'अवैध शराब माफिया' के चंगुल में फंस गई। बोड़ाम और पटमदा जैसे इलाके ऐतिहासिक रूप से अवैध चुलाई के गढ़ बन गए क्योंकि यहाँ की भौगोलिक स्थिति (पहाड़ और जंगल) पुलिस से बचने में मदद करती थी।
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2010 का दशक और सख्ती: पिछले 15 सालों में झारखंड सरकार ने महुआ शराब के अवैध निर्माण को रोकने के लिए कई ऐतिहासिक फैसले लिए हैं। इतिहास गवाह है कि जब भी जमशेदपुर या रांची जैसे शहरों में 'जहरीली शराब' से मौतें हुई हैं, उनके तार इन्ही सुदूर ग्रामीण भट्टियों से जुड़े पाए गए हैं। आज बोंगाई गांव में हुई यह कार्रवाई उस ऐतिहासिक विफलता को सुधारने की कोशिश है, जहाँ माफिया स्थानीय संसाधनों का उपयोग करके 'मौत का जहर' तैयार करते हैं। मुख्यमंत्री सचिवालय का सीधा हस्तक्षेप यह दर्शाता है कि अब यह मुद्दा केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि सीधे शासन की प्रतिष्ठा का बन गया है।
अगला कदम: "सघन अभियान जारी रहेगा"
उपायुक्त पूर्वी सिंहभूम की गोपनीय शाखा अब उन अन्य गांवों की सूची तैयार कर रही है जहाँ अवैध भत्तियां संचालित होने की खबर है।
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ड्रोन सर्विलांस: सूत्रों की मानें तो अब दुर्गम इलाकों में भट्टियों का पता लगाने के लिए ड्रोन कैमरों की मदद लेने पर विचार किया जा रहा है।
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ग्रामीणों से अपील: प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसे अवैध धंधों की जानकारी सीधे उपायुक्त कार्यालय को दें ताकि समाज को नशे के जाल से मुक्त किया जा सके।
बोड़ाम के बोंगाई गांव में महुआ भट्टी का ध्वस्त होना शराब माफियाओं के लिए एक कड़ा संदेश है। जब शिकायत सीधे सीएम सचिवालय तक पहुँच जाए, तो समझ लेना चाहिए कि अब बचने का कोई रास्ता नहीं है। 40 किलो जावा महुआ का नष्ट होना भले ही छोटी बात लगे, लेकिन यह उन हजारों परिवारों के लिए राहत की खबर है जो इस अवैध नशे की भेंट चढ़ रहे थे। क्या सुनील मंडल की गिरफ्तारी के बाद अब उस 'सप्लाई चेन' का भी पर्दाफाश होगा जो इन भट्टियों से शराब उठाकर जमशेदपुर शहर तक पहुँचाती थी?
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