Ghatsila School Orientation: संत नंदलाल विद्या मंदिर में शिक्षा से जुड़े अहम खुलासे, अभिभावकों को दी गई ये खास हिदायत!
घाटशिला के संत नंदलाल स्मृति विद्या मंदिर में ओरिएंटेशन कार्यक्रम संपन्न! नए छात्रों और अभिभावकों को स्कूल की शिक्षा प्रणाली और नियमों की विस्तृत जानकारी दी गई। जानिए इस कार्यक्रम की खास बातें।

घाटशिला स्थित संत नंदलाल स्मृति विद्या मंदिर में आज एक विशेष ओरिएंटेशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें नए छात्रों और अभिभावकों को स्कूल की नीतियों, शिक्षा प्रणाली और अनुशासन नियमों से अवगत कराया गया। यह कार्यक्रम सिर्फ एक परिचयात्मक सत्र नहीं था, बल्कि विद्यालय की कार्यप्रणाली, अनुशासन और शैक्षणिक रणनीतियों पर गहरी जानकारी देने का माध्यम भी बना।
दीप प्रज्ज्वलन से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानाचार्या श्रीमती नीलकमल सिन्हा, प्रशासिका श्रीमती शोभा गनेरीवाल और वरिष्ठ शिक्षकों के करकमलों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से हुई। इसके बाद विद्यालय की छात्राओं ने गणेश वंदना पर आकर्षक नृत्य प्रस्तुत कर सभी का स्वागत किया।
प्रधानाचार्या श्रीमती नीलकमल सिन्हा ने अपने प्रेरणादायक संबोधन में कहा –
"बच्चों को ऊँची उड़ान भरने दें, ताकि वे सफलता के शिखर तक पहुँच सकें।"
अभिभावकों के लिए क्या खास रहा इस कार्यक्रम में?
विद्यालय की नियमावली, शिक्षा पद्धति और अनुशासन नीतियों को स्पष्ट करने के लिए शिक्षकों ने अलग-अलग सत्र लिए।
शिक्षक प्रभारी श्री अनूप कुमार पटनायक ने विद्यालय की सामान्य नीतियों और नियमों की जानकारी दी।
श्रीमती श्रावणी आदित्य ने प्राथमिक कक्षाओं की शिक्षण पद्धति और पाठ्यक्रम पर प्रकाश डाला।
माध्यमिक खंड की जानकारी श्रीमती संध्या मिश्रा ने प्रदान की।
अनुशासन पर विशेष चर्चा करते हुए श्री इंद्र कुमार राय ने विद्यालय की शिक्षा प्रणाली में अनुशासन की भूमिका स्पष्ट की।
विद्यालय प्रशासिका श्रीमती शोभा गनेरीवाल ने अभिभावकों से बच्चों को मोबाइल और सोशल मीडिया से दूर रखने की अपील की और कहा कि अच्छी शिक्षा के लिए माता-पिता का योगदान सबसे जरूरी है।
स्कूल शिक्षा का ऐतिहासिक सफर
संत नंदलाल स्मृति विद्या मंदिर सिर्फ एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि घाटशिला में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का केंद्र रहा है। इसकी स्थापना छात्रों को अनुशासन और आधुनिक शिक्षा प्रणाली के साथ तैयार करने के लिए की गई थी। वर्षों से विद्यालय ने सैकड़ों छात्रों को शिक्षित कर उन्हें उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर किया।
यह स्कूल शिक्षा के आधुनिक और पारंपरिक तरीकों का संगम है, जहां बच्चों को सिर्फ किताबी ज्ञान ही नहीं बल्कि व्यावहारिक शिक्षा, नैतिक मूल्यों और अनुशासन की भी शिक्षा दी जाती है।
कौन-कौन रहे मौजूद?
इस कार्यक्रम में विद्यालय के विभिन्न विभागों से जुड़े कई प्रमुख शिक्षक और अधिकारी उपस्थित रहे:
श्री एस. आर. दत्ता (अकादमिक इंचार्ज)
श्रीमती सुजाता वर्मा (प्राइमरी प्रभारी)
श्रीमती आनंदित दे (को-ऑर्डिनेटर) – जिन्होंने धन्यवाद ज्ञापन दिया।
कार्यक्रम का सफल संचालन श्रीमती सायोनी दास द्वारा किया गया।
इसके अलावा विद्युत वरण चंद्रा, नेहा मजूमदार, सोमनाथ दे और सौमेंद्र मुखर्जी का भी इस आयोजन में विशेष योगदान रहा।
ओरिएंटेशन का उद्देश्य और भविष्य की योजना
इस कार्यक्रम के जरिए न सिर्फ अभिभावकों को विद्यालय की कार्यप्रणाली से अवगत कराया गया, बल्कि उन्हें यह भी समझाया गया कि कैसे वे अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नींव मजबूत कर सकते हैं।
विद्यालय प्रशासन का लक्ष्य आधुनिक शिक्षा प्रणाली को अपनाते हुए नैतिक मूल्यों पर आधारित शिक्षा प्रदान करना है, जिससे विद्यार्थी सिर्फ परीक्षा पास करने तक सीमित न रहें, बल्कि भविष्य के लिए पूर्ण रूप से तैयार हो सकें।
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