Dhanbad Shocker: कचरे में नवजात, झरिया में मानवता शर्मसार, सड़क किनारे मिला मासूम का शव, कांप उठी लोगों की रूह
धनबाद के झरिया में बस्तकोला पेट्रोल पंप के पास एक नवजात का शव मिलने से हड़कंप मच गया है। कचरे के ढेर पर पड़ी उस मासूम जान और इस क्रूर कृत्य के पीछे छिपे चेहरों की पूरी रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी कोयलांचल को दहला देने वाली इस हृदयविदारक घटना के सच से अनजान रह जाएंगे।
धनबाद, 17 जनवरी 2026 – कोयलांचल की धरती धनबाद से आज एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने न केवल कानून-व्यवस्था बल्कि इंसानियत पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। झरिया थाना क्षेत्र के बस्तकोला पेट्रोल पंप के पास शनिवार सुबह एक नवजात शिशु का लावारिस शव बरामद किया गया। जिस मासूम को पालने में होना चाहिए था, उसे कोई बेरहम हाथ कचरे के ढेर पर फेंक कर चला गया। इस मंजर को जिसने भी देखा, उसकी आंखें नम हो गईं और रूह कांप उठी। सूचना मिलते ही झरिया पुलिस मौके पर पहुँची और मामले की तफ्तीश में जुट गई है।
कचरे के ढेर पर मिली 'कलंक' की दास्तां
शनिवार सुबह जब बस्तकोला इलाके में लोग अपने कामों के लिए निकले, तो पेट्रोल पंप के समीप कूड़े के ढेर पर एक नन्हीं सी आकृति दिखी।
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भीड़ का जमावड़ा: जैसे ही लोगों को पता चला कि वह एक नवजात का शव है, वहां देखते ही देखते सैकड़ों लोगों की भीड़ जुट गई। स्थानीय लोगों में इस कृत्य को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
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पुलिस की त्वरित कार्रवाई: झरिया थाना पुलिस ने मौके पर पहुँचकर शव को अपने कब्जे में लिया। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह शव रात के अंधेरे में फेंका गया या सुबह के वक्त।
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पोस्टमार्टम के लिए भेजा: शव को पंचनामा के बाद पोस्टमार्टम के लिए धनबाद भेज दिया गया है, ताकि मौत के सही कारणों और समय का पता चल सके।
जांच के घेरे में 'अंधेरी गलियां' और अवैध क्लीनिक
पुलिस इस मामले को केवल एक शव की बरामदगी के तौर पर नहीं देख रही है।
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सीसीटीवी की तलाश: पेट्रोल पंप और आसपास के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगाला जा रहा है ताकि उस शख्स या वाहन की पहचान हो सके जिसने नवजात को यहाँ छोड़ा।
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अवैध नर्सिंग होम पर शक: अक्सर ऐसे मामलों के तार अवैध रूप से चल रहे छोटे नर्सिंग होम या क्लीनिकों से जुड़े होते हैं। पुलिस अब इलाके के अस्पतालों और दाइयों से हाल ही में हुए जन्मों का रिकॉर्ड मांग रही है।
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मानवीय संवेदनाएं तार-तार: स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह किसी मजबूरी से ज्यादा एक जघन्य अपराध है, जिसे समाज में कभी स्वीकार नहीं किया जा सकता।
झरिया नवजात बरामदगी: मुख्य विवरण (Fact Snapshot)
| विवरण | जानकारी (Details) |
| स्थान | बस्तकोला पेट्रोल पंप के पास, झरिया |
| स्थिति | नवजात का शव कचरे के ढेर से मिला |
| जांच टीम | झरिया थाना पुलिस |
| अगला कदम | पोस्टमार्टम और स्थानीय क्लीनिकों की जांच |
| क्षेत्र | झरिया (धनबाद) |
इतिहास का पन्ना: झरिया का कोयला और समाज के बदलते मूल्य
झरिया का इतिहास सदियों पुराना है, जो कभी अपने घने जंगलों और बाद में 'काले सोने' (कोयले) की खदानों के लिए दुनिया भर में मशहूर हुआ। 1894 में जब यहाँ पहली बार कोयला खनन शुरू हुआ, तब से झरिया ने लाखों लोगों को रोजगार दिया और एक समृद्ध श्रमिक संस्कृति विकसित हुई। इतिहास गवाह है कि श्रमिक बस्तियों में आपसी भाईचारा और बच्चों के प्रति ममत्व हमेशा से यहाँ की पहचान रही है। लेकिन पिछले दो दशकों में बढ़ते शहरीकरण और नैतिक मूल्यों में गिरावट के कारण ऐसी घटनाएं (नवजात को फेंकना) गाहे-बगाहे सामने आने लगी हैं। साल 2012 और 2021 में भी धनबाद के विभिन्न क्षेत्रों से ऐसी हृदयविदारक खबरें आई थीं। यह विडंबना ही है कि जो झरिया पूरे देश के घरों को रौशन करने के लिए कोयला देता है, उसकी सड़कों पर आज मानवता का गला घोंटा जा रहा है। 2026 की यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि आधुनिकता की दौड़ में हम कितने 'पिछड़े' होते जा रहे हैं।
आक्रोशित जनता की मांग: "दोषियों को मिले फांसी"
बस्तकोला के स्थानीय लोगों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की जांच केवल कागजों तक सीमित न रहे।
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सुरक्षा पर सवाल: लोगों का कहना है कि पेट्रोल पंप जैसे व्यस्त इलाके में अगर कोई शव फेंक कर चला जाता है, तो पुलिस गश्ती पर सवाल उठना लाजमी है।
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पहचान की कोशिश: पुलिस उन लोगों की सूची तैयार कर रही है जो पिछले कुछ दिनों में संदिग्ध अवस्था में देखे गए थे।
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थाना प्रभारी का बयान: झरिया पुलिस का कहना है कि वे इस मामले में बेहद संवेदनशील हैं और जल्द ही उस 'निर्मम' माँ या पिता तक पहुँच जाएंगे जिसने यह पाप किया है।
समाज पर एक बदनुमा दाग
झरिया की सड़कों पर मिला वह नवजात शव केवल एक शरीर नहीं, बल्कि हमारे समाज की गिरती संवेदनाओं का आईना है। जब तक ऐसी घटनाओं के पीछे छिपे मास्टरमाइंड पकड़े नहीं जाते, तब तक हम खुद को सभ्य समाज कहने का अधिकार नहीं रखते।
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