Haldipokhar Mystery: बिना ताला तोड़े बैंक से 8.50 लाख गायब, पुलिस भी दंग, अंदरूनी मिलीभगत की आहट से मचा हड़कंप
हल्दीपोखर के नेबफीन्स बैंक में बिना ताला और लॉकर तोड़े 8.50 लाख रुपये की रहस्यमयी चोरी हो गई है। पुलिस ने कर्मचारियों को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी है, इस अनोखे कांड की पूरी इनसाइड स्टोरी यहाँ देखें।
जमशेदपुर/पोटका, 12 मई 2026 – झारखंड के जमशेदपुर अंतर्गत कोवाली थाना क्षेत्र से एक ऐसी चोरी की खबर आई है, जिसने पुलिसिया तंत्र और बैंकिंग सुरक्षा के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। हल्दीपोखर रेलवे स्टेशन के पास स्थित 'नेबफीन्स लिमिटेड' नामक प्राइवेट बैंक में चोरों ने बड़े ही शातिर तरीके से हाथ साफ किया है। यह कोई साधारण चोरी नहीं है, बल्कि एक 'परफेक्ट क्राइम' की तरह दिख रही है, जहाँ न तो दरवाजा टूटा और न ही तिजोरी को खरोंच आई, लेकिन 8.50 लाख रुपये नकद हवा हो गए।
वारदात की दास्तां: 'मिस्ट्री' जो सुलझने का नाम नहीं ले रही
घटना की सुबह जब बैंक कर्मी ऑफिस पहुँचे, तो सब कुछ सामान्य दिख रहा था। ताले सही-सलामत थे और फर्नीचर अपनी जगह पर था। लेकिन जब कैश का मिलान हुआ, तो बैंक मैनेजर किशन सोनी के होश उड़ गए।
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अजीबोगरीब चोरी: बैंक की मुख्य तिजोरी (लॉकर) के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई थी। बिना चाबी के और बिना किसी तोड़फोड़ के इतनी बड़ी रकम का गायब होना किसी जादू से कम नहीं लग रहा।
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पुलिस की दस्तक: मामले की गंभीरता को देखते हुए मुसाबनी डीएसपी संदीप भगत और कोवाली थाना प्रभारी मुकेश कुमार साव दल-बल के साथ मौके पर पहुँचे। बैंक के अंदर और बाहर के सुरक्षा इंतजामों को बारीकी से खंगाला गया।
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कर्मचारी हिरासत में: पुलिस को पहली नजर में ही यह मामला 'इनसाइडर जॉब' (अंदरूनी मिलीभगत) का लग रहा है। यही वजह है कि कोवाली पुलिस ने बैंक के सभी कर्मचारियों को हिरासत में ले लिया है और उनसे अलग-अलग कमरों में पूछताछ की जा रही है।
डीएसपी का दावा: "जल्द बेनकाब होगा गुनहगार"
मुसाबनी डीएसपी संदीप भगत ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि 8.50 लाख रुपये की चोरी की लिखित शिकायत मिली है। उन्होंने बताया कि पुलिस तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है। बैंक से उन पैसों का पूरा विवरण माँगा गया है कि वह राशि किस मद की थी। डीएसपी ने आश्वासन दिया है कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, वह जल्द ही सलाखों के पीछे होगा।
आम जनता का पैसा: महिलाओं की मेहनत पर 'डाका'
यह मामला इसलिए भी अधिक संवेदनशील है क्योंकि गायब हुई राशि कोई कॉर्पोरेट फंड नहीं, बल्कि गरीब महिलाओं से वसूली गई लोन की किश्तें थीं।
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ऋण वसूली का पैसा: नेबफीन्स लिमिटेड मुख्य रूप से ग्रामीण महिलाओं को छोटे ऋण उपलब्ध कराती है।
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ग्रामीणों में आक्रोश: हल्दीपोखर के लोग इस बात से नाराज हैं कि जिस बैंक में वे अपनी गाढ़ी कमाई जमा करते हैं, वहाँ की सुरक्षा इतनी लचर है कि अंदर से ही पैसे गायब हो रहे हैं।
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मैनेजर की चुप्पी: बैंक मैनेजर किशन सोनी का कैमरे के सामने न आना और कुछ भी बोलने से बचना, शक की सुई को और गहरा कर रहा है।
हल्दीपोखर की यह 'मिस्टीरियस चोरी' बैंक के डिजिटल लॉक और आंतरिक सुरक्षा प्रोटोकॉल पर बड़ा सवाल है। क्या चोरों के पास डुप्लीकेट चाबियां थीं? या फिर बैंक के ही किसी भरोसेमंद चेहरे ने इस विश्वासघात को अंजाम दिया है? कोवाली पुलिस की जांच अब उस 'अदृश्य हाथ' की तलाश में है जिसने बिना किसी शोर-शराबे के 8.50 लाख रुपये पार कर दिए। आने वाले 24 घंटे इस केस के खुलासे के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं।
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