Deoghar Loot: बस स्टैंड पर सो रहे मजदूर से लूट, धपरा गिरोह का आतंक फिर सिर चढ़ा!
देवघर में धपरा गिरोह का आतंक फिर गहराया, बस स्टैंड पर मजदूर से लूट। शहर के कई इलाकों में दहशत फैला रहे गिरोह पर पुलिस की कार्रवाई सवालों के घेरे में।

देवघर का नाम एक ओर जहां बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए जाना जाता है, वहीं अब शहर का एक और चेहरा – ‘धपरा गिरोह’ – धीरे-धीरे लोगों को खौफ में जीने पर मजबूर कर रहा है। यह गिरोह अब खुलेआम लूटपाट, छिनतई और मारपीट जैसी घटनाओं को अंजाम दे रहा है। ताजा मामला गुरुवार की सुबह का है, जब गिरोह के सदस्यों ने एक गरीब मजदूर को अपना निशाना बनाया और उसके सारे पैसे और मोबाइल छीन लिए।
घटना की पूरी कहानी: बस का इंतज़ार और बीच सड़क पर लूट
गिरिडीह जिले के पीरटांड़ थाना क्षेत्र के हरलाडीह गांव निवासी बाबूराम हांसदा देवघर में बोरिंग गाड़ी में मजदूरी करता है। बुधवार रात को काम खत्म कर वह घर लौटने के लिए बस स्टैंड पहुंचा, लेकिन पता चला कि अगली बस सुबह ही मिलेगी। मजबूरी में वह वहीं स्टैंड के किनारे सो गया।
सुबह करीब चार बजे तीन युवक उसके पास आए और छिनतई का प्रयास करने लगे। जब बाबूराम ने विरोध किया, तो उसके साथ मारपीट की गई और 700 रुपये नकद व मोबाइल फोन छीन लिया गया। पीड़ित ने नगर थाना पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज कराई और कार्रवाई की मांग की।
धपरा गिरोह: नाम सुनते ही कांप उठते हैं लोग
देवघर में धपरा गिरोह का नाम अब किसी अजनबी के लिए नहीं है। शहर के लक्ष्मी बाजार, आरएल सर्राफ स्कूल, मीना बाजार चौक और क्लब ग्राउंड जैसे इलाकों में इनकी दहशत आम है। ये लोग सड़क किनारे दुकानों से सामान उठा ले जाते हैं, ठेला वालों से पैसे मांगते हैं, और मना करने पर धमकी व गाली-गलौज करते हैं।
इतना ही नहीं, नगर निगम में काम करने की आड़ में ये युवक अपराध को अंजाम देते हैं। बस स्टैंड के पीछे क्लब ग्राउंड और नगर स्टेडियम के पास इन्होंने अवैध कॉलोनियां भी बसा ली हैं, जहां से सारे काम संचालित होते हैं।
इतिहास भी गवाह: पुलिस की आंखों में धूल झोंकते रहे हैं गिरोह के सदस्य
हालांकि पुलिस कई बार गिरोह के सदस्यों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है, लेकिन जेल से छूटते ही ये फिर उसी धंधे में लग जाते हैं। कार्रवाई के नाम पर पुलिस खानापूरी तक सीमित रहती है, और आम लोग अब छोटी घटनाओं की शिकायत भी करने से कतराते हैं।
इन अवैध कॉलोनियों में रहने वाले अधिकतर लोग बिहार के मोकामा, जमुई, मुंगेर और बांका जिलों के मूल निवासी हैं, जिन्हें पहले स्थानीय नेताओं का संरक्षण मिला और अब वे खुद उनके लिए भी सिरदर्द बन चुके हैं।
समाधान क्या है?
स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि इन युवकों को शहर के बीच से हटाकर किसी और जगह बसाया जाए, ताकि शहर में शांति बहाल हो सके। जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक देवघर की सड़कें ऐसे गिरोहों के आतंक से आज़ाद नहीं हो सकतीं।
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