Deoghar Raid: देवघर भू-अर्जन कार्यालय में ACB का छापा, 20 हजार घूस लेते प्रधान सहायक दबोचा गया
देवघर में भ्रष्टाचार के खिलाफ ACB ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। भू-अर्जन कार्यालय के प्रधान सहायक को जमीन की फाइल आगे बढ़ाने के नाम पर 20 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ा गया है। अगर आप भी सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, तो इस गिरफ्तारी की पूरी कहानी आपको जरूर देखनी चाहिए।
देवघर/झारखंड, 13 मार्च 2026 – झारखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग तेज हो गई है। शुक्रवार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की टीम ने देवघर जिले में एक बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए जिला भू-अर्जन कार्यालय के प्रधान सहायक को रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। सरकारी तंत्र की नाक के नीचे चल रहे घूसखोरी के इस खेल का पर्दाफाश तब हुआ, जब एसीबी की टीम ने जाल बिछाकर आरोपी को दबोचा। आरोपी कर्मचारी एक आम नागरिक से उसकी जमीन से संबंधित फाइल को आगे बढ़ाने के बदले में 20 हजार रुपये की मांग कर रहा था।
फाइल की कीमत 20 हजार: एसीबी का बिछाया जाल
यह पूरी कार्रवाई एक पीड़ित व्यक्ति की शिकायत पर आधारित थी, जो अपने जायज काम के लिए दफ्तरों के चक्कर काटकर थक चुका था।
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रिश्वत की डिमांड: भू-अर्जन कार्यालय में कार्यरत प्रधान सहायक ने स्पष्ट कर दिया था कि बिना 'सेवा शुल्क' के फाइल एक मेज से दूसरी मेज पर नहीं जाएगी। जमीन से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में उसने 20 हजार रुपये की मांग रखी।
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शिकायत और सत्यापन: पीड़ित ने हार मानने के बजाय एसीबी से संपर्क किया। एसीबी की टीम ने पहले गुप्त रूप से मामले की जांच की और जब घूस मांगने की पुष्टि हो गई, तो शुक्रवार को जाल बिछाया गया।
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रंगेहाथ गिरफ्तारी: जैसे ही प्रधान सहायक ने शिकायतकर्ता से केमिकल लगे नोटों की गड्डी (20 हजार रुपये) पकड़ी, पहले से ही सादे लिबास में तैनात एसीबी के अधिकारियों ने उसे दबोच लिया। उसके पास से रिश्वत की पूरी रकम बरामद कर ली गई है।
दफ्तर में मचा हड़कंप: सहकर्मियों के फूले हाथ-पांव
एसीबी की इस अचानक कार्रवाई से देवघर समाहरणालय और भू-अर्जन कार्यालय में अफरा-तफरी मच गई।
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छापेमारी की गूँज: जैसे ही गिरफ्तारी की खबर फैली, कई अन्य कर्मचारी अपनी सीटों से उठकर खिसकने लगे।
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दस्तावेजों की जांच: गिरफ्तारी के बाद एसीबी की टीम ने आरोपी के केबिन और अलमारी की भी तलाशी ली, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या वह अन्य मामलों में भी संलिप्त था।
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आधिकारिक बयान: एसीबी अधिकारियों ने बताया कि आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और उसे दुमका ले जाने की तैयारी की जा रही है।
देवघर में भू-माफिया और कार्यालयों का 'पुराना गठजोड़'
देवघर का इतिहास रहा है कि यहाँ की कीमती जमीनों पर अक्सर भू-माफियाओं और भ्रष्ट अधिकारियों की नजर रहती है।
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जमीन विवादों का केंद्र: बाबा नगरी होने के कारण यहाँ जमीन की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिसके कारण भू-अर्जन कार्यालय जैसे विभाग भ्रष्टाचार के 'हॉटस्पॉट' बन गए हैं।
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अतीत की कार्रवाई: इससे पहले भी देवघर में रजिस्ट्रार और अंचल कार्यालय के कई कर्मियों पर एसीबी का डंडा चल चुका है। बावजूद इसके, निचले स्तर के कर्मचारियों में कानून का खौफ कम नजर आता है। यह गिरफ्तारी एक बार फिर याद दिलाती है कि सरकारी कुर्सी पर बैठकर जनता को चूसने वालों के लिए अब दिन अच्छे नहीं रहे।
भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा संदेश
झारखंड सरकार और एसीबी की यह संयुक्त मुस्तैदी दर्शाती है कि राज्य में अब घूसखोरों की खैर नहीं है।
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आम जनता से अपील: एसीबी ने अपील की है कि यदि कोई भी सरकारी सेवक किसी कार्य के बदले रिश्वत मांगता है, तो डरे बिना इसकी सूचना विभाग को दें।
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सख्त सजा का प्रावधान: सूत्रों की मानें तो आरोपी प्रधान सहायक की गिरफ्तारी के बाद अब उसके द्वारा निपटाए गए पिछले कुछ महीनों के फाइलों की भी स्क्रूटनी की जा सकती है।
देवघर की इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अपराधी चाहे सरकारी दफ्तर के अंदर हो या बाहर, कानून के लंबे हाथ उन तक पहुँच ही जाते हैं। 20 हजार रुपये की घूस ने एक सम्मानजनक सरकारी पद पर बैठे व्यक्ति को आज जेल की सलाखों के पीछे पहुँचा दिया है। देवघर की जनता के लिए यह खबर एक बड़ी जीत की तरह देखी जा रही है।
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