Jamshedpur Sadar Hospital : खासमहल सदर अस्पताल में लकड़ी-कोयले पर पक रहा मरीजों का भोजन, गैस आपूर्ति ठप होने से मची अफरा-तफरी

जमशेदपुर के खासमहल सदर अस्पताल में अव्यवस्था का आलम यह है कि मरीजों का भोजन अब आधुनिक रसोई के बजाय लकड़ी और कोयले के चूल्हे पर पक रहा है। पिछले दो दिनों से गैस सिलेंडर की आपूर्ति ठप होने के कारण वेंडर को यह खौफनाक कदम उठाना पड़ा। धुएं के बीच तैयार हो रहे खाने ने स्वास्थ्य मानकों की धज्जियां उड़ा दी हैं। पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।

Mar 13, 2026 - 15:00
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Jamshedpur Sadar Hospital : खासमहल सदर अस्पताल में लकड़ी-कोयले पर पक रहा मरीजों का भोजन, गैस आपूर्ति ठप होने से मची अफरा-तफरी
Jamshedpur Sadar Hospital : खासमहल सदर अस्पताल में लकड़ी-कोयले पर पक रहा मरीजों का भोजन, गैस आपूर्ति ठप होने से मची अफरा-तफरी

जमशेदपुर/खासमहल, 13 मार्च 2026 – लौहनगरी के खासमहल स्थित सदर अस्पताल, जिसे जिले का सबसे आधुनिक स्वास्थ्य केंद्र माना जाता है, वहां से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो सिस्टम की पोल खोलने के लिए काफी है। अस्पताल की 'हाई-टेक' रसोई इन दिनों गैस सिलेंडर की किल्लत से जूझ रही है। स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि मरीजों के लिए दाल-चावल अब एलपीजी गैस पर नहीं, बल्कि अस्पताल के पीछे जल रही लकड़ी और कोयले की आंच पर तैयार हो रहा है। यह नजारा तब है जब अस्पताल में स्वच्छता और स्वास्थ्य मानकों को सर्वोपरि रखने का दावा किया जाता है।

मजबूरी या लापरवाही: चूल्हे पर आया सदर अस्पताल

भोजन आपूर्ति का जिम्मा संभाल रहे वेंडर ओंकार नाथ ने इस कड़वी सच्चाई को स्वीकार किया है। उनके अनुसार, पिछले 48 घंटों से रसोई गैस की सप्लाई पूरी तरह ठप है।

  • वेंडर का पक्ष: ओंकार नाथ ने बताया कि गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं होने के कारण रसोई का काम बंद होने के कगार पर था। मरीजों को भूखा नहीं रखा जा सकता था, इसलिए आनन-फानन में अस्पताल परिसर के पीछे लकड़ी और कोयले के चूल्हे जलाए गए।

  • मैनेजमेंट को खबर: वेंडर का दावा है कि उन्होंने इस गंभीर संकट की जानकारी अस्पताल प्रबंधन को दे दी है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला।

धुएं का गुबार और मरीजों की जान पर जोखिम

अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर जहां ऑक्सीजन सिलेंडर और दवाइयां होती हैं, वहां खुले में लकड़ी जलाना किसी खतरे से कम नहीं है।

  1. स्वास्थ्य मानकों की अनदेखी: विशेषज्ञों का मानना है कि कोयले और लकड़ी के धुएं में तैयार भोजन मरीजों के लिए हानिकारक हो सकता है।

  2. वार्डों तक पहुँचता धुआं: अस्पताल के पीछे जल रहे चूल्हों का तीखा धुआं हवा के साथ मरीजों के वार्डों तक पहुँच रहा है, जिससे सांस के मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

  3. रसोइयों की बेबसी: खाना बनाने वाले कर्मचारी भी इस जहरीले धुएं के बीच काम करने को मजबूर हैं, जो उनके फेफड़ों के लिए भी घातक है।

खासमहल सदर अस्पताल और 'लालफीताशाही' का पुराना नाता

खासमहल सदर अस्पताल का निर्माण जमशेदपुर के मध्य वर्ग और ग्रामीण आबादी को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने के उद्देश्य से किया गया था।

  • आधुनिकीकरण का दावा: पिछले कुछ वर्षों में यहाँ करोड़ों रुपये की लागत से नई मशीनें और आधुनिक कैंटीन बनाई गई। लेकिन इतिहास गवाह है कि यहाँ अक्सर 'सप्लाई चेन' और 'बजट' के नाम पर बुनियादी सुविधाएं ठप हो जाती हैं।

  • अतीत की घटनाएं: इससे पहले भी सदर अस्पताल में दवाओं की कमी और एम्बुलेंस के लिए ईंधन न होने जैसी खबरें सुर्खियों में रही हैं। यह घटना एक बार फिर दर्शाती है कि कागजों पर 'स्मार्ट' दिखने वाले अस्पताल जमीनी स्तर पर प्रशासनिक लापरवाही का शिकार हैं।

स्थानीय लोगों में आक्रोश: जल्द समाधान की मांग

अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों ने इस अव्यवस्था पर कड़ा ऐतराज जताया है। उनका कहना है कि सरकारी अस्पताल में इस तरह की 'आदिम व्यवस्था' देखना शर्मनाक है।

  • बड़ी लापरवाही: मरीजों के परिजनों का सवाल है कि क्या प्रशासन के पास आपातकालीन स्थिति के लिए गैस का बैकअप (Backup) नहीं था?

  • जांच की मांग: स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों से इस मामले में हस्तक्षेप करने और लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की मांग की है।

खासमहल सदर अस्पताल की यह तस्वीर डिजिटल इंडिया के दौर में एक बड़ा मजाक है। लकड़ी और कोयले के चूल्हे पर पकता भोजन न केवल धुएं का गुबार पैदा कर रहा है, बल्कि यह अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर भी कालिख पोत रहा है। अब देखना यह होगा कि गैस की आपूर्ति कब तक बहाल होती है और मरीजों को इस धुएं से कब छुटकारा मिलता है।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।