Chatra Fire : प्रतापपुर में जंगल की आग से धुआं-धुआं हुआ इलाका
चतरा के प्रतापपुर वन क्षेत्र में भीषण जंगल की आग, 11 हजार वोल्ट के तारों तक पहुंची लपटें, आसमान में काला धुआं। वन विभाग की टीम मौके पर जुटी, आग पर काबू पाने के प्रयास जारी।
चतरा : गुरुवार को चतरा के प्रतापपुर वन क्षेत्र में अचानक लगी आग ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया। भरही-केवलिया मुख्य सड़क के किनारे जंगल और झाड़ियों में लगी आग देखते ही देखते विकराल हो गई। आग इतनी तेज है कि आसमान में काला धुआं छा गया है और दूर से ही लपटें साफ नजर आ रही हैं। सबसे खतरनाक बात यह है कि आग की लपटें 11 हजार वोल्ट की हाई-टेंशन बिजली तारों तक पहुंच गई हैं। ग्रामीणों को डर है कि कहीं कोई बड़ा हादसा न हो जाए।
चतरा के जंगल : कभी शांति का प्रतीक, आग का गवाह
चतरा का प्रतापपुर वन क्षेत्र झारखंड के घने जंगलों में गिना जाता है। यहाँ कभी हरियाली और शांति अपना अलग ही रंग बिखेरती थी। लेकिन पिछले कुछ सालों में यहाँ जंगल में आग लगने की घटनाएँ बढ़ी हैं। 2019 में भी इसी इलाके में जंगल में आग लगी थी, जिसने करीब 20 एकड़ वन क्षेत्र को जलाकर राख कर दिया था। 2022 में फिर से यहाँ आग लगी, लेकिन उस बार वन विभाग ने समय रहते आग पर काबू पा लिया था। लेकिन इस बार हालात काफी गंभीर हैं। तेज हवा के कारण आग तेजी से फैल रही है और वन विभाग के लिए इसे रोकना मुश्किल होता जा रहा है।
कैसे लगी आग? क्या है पूरा मामला?
घटना गुरुवार की है। भरही-केवलिया मुख्य सड़क के किनारे अचानक झाड़ियों में आग की लपटें उठने लगीं। शुरुआत में स्थानीय लोगों ने सोचा कि कोई छोटी सी आग है, जो अपने आप बुझ जाएगी। लेकिन तेज हवा के कारण आग ने कुछ ही देर में विकराल रूप ले लिया।
देखते ही देखते आग जंगल के अंदरूनी हिस्सों की ओर बढ़ने लगी। झाड़ियाँ, सूखे पत्ते और पेड़ – सब कुछ जलने लगा। आसमान में काले धुएं का एक विशाल गुबार उठने लगा। दूर से ही लोग लपटों को देख सकते थे।
तेज हवा बनी आग की मददगार
स्थानीय लोगों का कहना है कि उस समय तेज हवा चल रही थी। इस तेज हवा ने आग को और भी भयानक बना दिया। जिधर हवा जा रही थी, आग उधर ही फैलती जा रही थी। लोगों ने मिलकर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन तेज लपटों के सामने कोई कुछ नहीं कर सका।
आग की चपेट में आकर कई पेड़-पौधे जलकर राख हो गए। वहीं कई छोटे जीव-जंतु भी इस आग की चपेट में आ गए। पक्षियों के घोंसले भी जलकर नष्ट हो गए।
हाई-टेंशन तारों पर खतरा, ग्रामीणों में दहशत
सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि आग की लपटें पास से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की हाई-टेंशन बिजली तारों तक पहुंच गई हैं। अगर तार गर्मी से टूटकर गिर गए तो बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों को डर है कि कहीं बिजली का तार फटने या गिरने से किसी की जान न चली जाए।
एक स्थानीय ग्रामीण ने बताया, "हम लोग बहुत डरे हुए हैं। आग इतनी तेज है कि कोई पास जाने की हिम्मत नहीं कर रहा। बिजली के तार बेहद खतरनाक स्थिति में हैं। अगर कुछ हुआ तो कई गांवों की बिजली चली जाएगी और कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है।"
वन संपदा और जीव-जंतुओं को भारी नुकसान की आशंका
प्रतापपुर वन क्षेत्र में कई प्रकार के औषधीय पौधे पाए जाते हैं। ये पौधे स्थानीय लोगों के लिए आयुष चिकित्सा का महत्वपूर्ण स्रोत थे। इस आग में ये सभी बहुमूल्य पौधे जलकर नष्ट हो गए हैं। इसके अलावा यहाँ रहने वाले कई छोटे जीव-जंतु, सरीसृप, और पक्षी भी इस आग का शिकार हो गए हैं।
वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि आग बुझने के बाद ही इससे हुए नुकसान का सही आकलन हो पाएगा। लेकिन प्रारंभिक अनुमान के अनुसार यहाँ कई एकड़ जंगल जलकर नष्ट हो चुका है।
वन विभाग की टीम मौके पर, आग बुझाने के प्रयास जारी
आग की सूचना मिलते ही प्रतापपुर के वनरक्षक अजय कुमार के नेतृत्व में वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई। टीम ने आग बुझाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। लेकिन तेज हवा के कारण राहत कार्य में काफी दिक्कतें आ रही हैं।
वनरक्षक अजय कुमार ने बताया, "हमारी टीम मौके पर है और आग पर काबू पाने के प्रयास जारी हैं। लेकिन तेज हवा हमारे काम में बाधा डाल रही है। हम कोशिश कर रहे हैं कि आग को और फैलने से रोका जा सके।"
उन्होंने यह भी बताया कि फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। विभाग इसकी जांच कराएगा।
कहीं यह आग तो नहीं लगाई गई जानबूझकर?
जंगलों में आग लगने की कई वजहें हो सकती हैं। कई बार लोग खेतों की झाड़ियाँ जलाने के चक्कर में जंगल में आग लगा देते हैं। तो कई बार यह गर्मी के कारण सूखे पत्तों में लगी चिंगारी से भी होता है। लेकिन कई बार जानबूझकर भी जंगलों में आग लगाई जाती है, ताकि उसके बाद उस जमीन पर कब्जा किया जा सके।
वन विभाग इस बात की भी जांच कर रहा है कि कहीं यह आग जानबूझकर तो नहीं लगाई गई। प्रारंभिक जांच में यह साफ नहीं हो पाया है। लेकिन विभाग ने इसे भी जांच के दायरे में रखा है।
क्या आपके आसपास के जंगल भी हैं खतरे में?
यह घटना हर उस व्यक्ति के लिए एक चेतावनी है जो जंगलों के पास रहता है। गर्मी के मौसम में जंगलों में आग लगने की संभावना बढ़ जाती है। सूखे पत्ते, तेज हवा और एक छोटी सी चिंगारी – ये तीनों मिलकर एक भीषण आग का रूप ले सकते हैं।
क्या आप जानते हैं कि आपके आसपास के जंगल कितने सुरक्षित हैं? क्या वन विभाग की टीम वहाँ समय पर पहुँच पाएगी? ये सवाल इस घटना के बाद हर किसी के मन में उठ रहे हैं।
अब क्या होगा? वन विभाग के आगे की योजना
वनरक्षक अजय कुमार ने बताया कि आग पर काबू पाने के लिए और अधिक कर्मियों को बुलाया जा रहा है। जल्द ही आग बुझाने के लिए विशेष उपकरणों का भी इस्तेमाल किया जाएगा।
उन्होंने ग्रामीणों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और वन विभाग का सहयोग करें। अगर कोई और आग की लपटें देखता है तो तुरंत वन विभाग को सूचना दे।
आग पर पूरी तरह से काबू पाने में अभी और समय लग सकता है। तब तक ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
चतरा के लोगों से अपील
प्रशासन ने चतरा के लोगों से अपील की है कि वे जंगलों के पास आग न लगाएं। सिगरेट, बीड़ी या माचिस के तिलक को जंगल में न फेंके। गर्मी के मौसम में एक छोटी सी लापरवाही पूरे जंगल को जला सकती है।
फिलहाल, चतरा के प्रतापपुर वन क्षेत्र में आग पर काबू पाने के प्रयास जारी हैं। वन विभाग की टीम दिन-रात काम कर रही है। जैसे ही इस मामले में कोई नया अपडेट आएगा, हम आपको सबसे पहले बताएंगे।
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