Elephant Terror: पश्चिमी सिंहभूम में पागल दंतैल हाथी का खूनी तांडव, आधी रात को आधा दर्जन गांवों में मचाया कोहराम
पश्चिमी सिंहभूम के जगन्नाथपुर में पागल दंतैल हाथी द्वारा मचाई गई तबाही और ग्रामीणों के संघर्ष की पूरी रिपोर्ट यहाँ मौजूद है। आधी रात को छह गांवों में घुसे हाथी और वन विभाग की लाचारी का पूरा विवरण विस्तार से पढ़िए वरना आप इस गंभीर संकट की सबसे बड़ी अपडेट से चूक जाएंगे।
पश्चिमी सिंहभूम, 4 फरवरी 2026 – झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में पिछले डेढ़ महीने से मौत का एक विशाल साया मंडरा रहा है। झुंड से भटका एक पागल दंतैल हाथी क्षेत्र के लिए काल बन चुका है। झारखंड और ओडिशा की सीमा पर बसे दर्जनों गांवों में इस हाथी ने जो आतंक मचाया है, उसने हजारों लोगों की रातों की नींद और दिन का चैन छीन लिया है। मंगलवार की आधी रात को एक बार फिर इस दंतैल ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई और करीब दो घंटे तक आधा दर्जन गांवों में 'मौत का तांडव' किया। ग्रामीण अब मशालें जलाकर और पारंपरिक हथियार लेकर रात-रात भर पहरा देने को मजबूर हैं, क्योंकि वन विभाग की सुस्ती अब उनके सब्र का बांध तोड़ रही है।
आधी रात का 'ब्लैकआउट': गांवों में घुसा गजराज
जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र के तेंटूडी पोसी निवासी ग्रामीण डाकवा वीरेंद्र बालमुचू के अनुसार, मंगलवार रात करीब 12 बजे यह खूंखार हाथी बूढ़ा खमण जंगल की ओर से निकला। इसके बाद जो हुआ, वह किसी डरावनी फिल्म से कम नहीं था:
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निशाने पर गांव: हाथी ने एक के बाद एक डौडगुवा, चिगली, बाइहातू, कूदाहातु, सोसोपी, तेंटूडी पोसी, जोड़ापोखर और कुंटुझोर गांवों में घुसकर उत्पात मचाया।
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तबाही का मंजर: यह हाथी केवल फसलों को नहीं रौंद रहा, बल्कि घरों की दीवारें तोड़कर धान और चावल खा जा रहा है। सब्जी बागानों को इसने पूरी तरह बर्बाद कर दिया है।
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ग्रामीणों का मोर्चा: सूचना मिलते ही ग्रामीण एकजुट हुए। पारंपरिक हथियारों, मशालों के उजाले और शोरगुल के जरिए रात 2 बजे बड़ी मुश्किल से हाथी को महिलीमुरूम जंगल की ओर खदेड़ा गया।
वन विभाग के खिलाफ फूट रहा आक्रोश
ग्रामीणों का कहना है कि शाम ढलते ही यह हाथी इंसानी आबादी में घुस जाता है, लेकिन वन विभाग केवल मूकदर्शक बना हुआ है। लोग अब सवाल उठा रहे हैं कि क्या विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? गुस्साए ग्रामीणों ने अब विभाग को चेतावनी दी है कि यदि हाथी को जल्द ही ट्रेंकुलाइज (बेहोश) कर पकड़ा नहीं गया, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।
हाथी का आतंक: ताजा अपडेट (Elephant Attack Profile)
| विवरण | प्रमुख जानकारी (Key Details) |
| हाथी का प्रकार | पागल दंतैल (अकेला और भटका हुआ) |
| आतंक की अवधि | पिछले 45 दिनों (डेढ़ माह) से जारी |
| प्रभावित क्षेत्र | जगन्नाथपुर (झारखंड-ओडिशा सीमावर्ती इलाका) |
| नुकसान | आधा दर्जन गांवों के घर, फसल और अनाज भंडार |
| ग्रामीणों की मांग | हाथी को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाए |
खौफ के साये में बचपन और बुजुर्ग
हाथी के डर से बच्चों ने स्कूल जाना कम कर दिया है और बुजुर्ग रात में घरों के बाहर सोने से डरते हैं। ग्रामीणों ने जूटता का परिचय तो दिया है, लेकिन वे जानते हैं कि मशाल और शोरगुल इस 'पागल दंतैल' को ज्यादा दिनों तक नहीं रोक पाएंगे।
प्रशासन की चुप्पी खतरनाक
पश्चिमी सिंहभूम का यह दंतैल हाथी अब एक 'टिकिंग टाइम बम' बन चुका है। वन विभाग को तुरंत विशेषज्ञों की टीम बुलाकर इस पर काबू पाना चाहिए, वरना झारखंड-ओडिशा सीमा पर कभी भी बड़ा नरसंहार हो सकता है।
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