Tata Founder: कैसे जमशेदजी टाटा ने भारत को दिया उद्योग जगत का 'सपना'!
जमशेदजी टाटा ने भारत में उद्योग और इस्पात क्रांति की नींव रखी। जानिए कैसे एक व्यापारी ने राष्ट्रनिर्माता बनकर आधुनिक भारत की दिशा बदल दी!

टाटा समूह का नाम सुनते ही हर भारतीय के मन में भरोसे, गुणवत्ता और सफलता की छवि उभरती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसकी नींव रखने वाले जमशेदजी नसरवानजी टाटा ने अपने दौर में कितनी मुश्किलें झेली थीं? गुजरात के नवसारी में 1839 में जन्मे जमशेदजी ने भारतीय उद्योग को एक नई दिशा दी और आधुनिक भारत की नींव रखी।
कैसे शुरू हुआ जमशेदजी टाटा का सफर?
उनके पिता नसरवानजी टाटा ने व्यवसाय की बारीकियां सिखाईं और बॉम्बे (अब मुंबई) में व्यापार शुरू किया। जमशेदजी ने एल्फिंस्टन संस्थान से स्नातक किया और 1859 में अपने पिता की कंपनी "नसरवानजी एंड कालियंदास" में शामिल हुए। जल्द ही उनकी प्रतिभा को पहचाना गया और उन्हें हांगकांग शाखा का सह-प्रबंधक बनाया गया।
व्यापार में पहली चुनौती और सीख
1860 के दशक में अमेरिकी गृहयुद्ध के कारण भारतीय कपास की मांग बढ़ी, जिससे कई व्यापारियों को फायदा हुआ। लेकिन 1865 में युद्ध समाप्त होते ही बाजार गिर गया और जमशेदजी का चीन में किया निवेश बेकार हो गया। इसके बावजूद उन्होंने पूरी ईमानदारी से हालात को संभाला और कंपनी के लिक्विडेटर बने।
कपड़ा उद्योग में एंट्री और एक बड़ी छलांग
1867 में इंग्लैंड यात्रा के दौरान उन्होंने ब्रिटिश कपड़ा उद्योग को बारीकी से समझा और 1869 में बॉम्बे में एक दिवालिया तेल मिल खरीदकर उसे कपड़ा मिल में बदला। कुछ सालों में उन्होंने नागपुर में 'एम्प्रेस मिल्स' स्थापित कर भारतीय कपड़ा उद्योग को ब्रिटिश व्यापार के मुकाबले खड़ा कर दिया।
आधुनिक भारत का सपना और राष्ट्र के लिए योगदान
जमशेदजी सिर्फ व्यापारी नहीं थे, बल्कि एक दूरदर्शी थे। उन्होंने उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 1892 में "जे.एन. टाटा एंडोमेंट" की शुरुआत की, जिससे कई भारतीय छात्रों को विदेश में पढ़ने का मौका मिला। उनका एक और बड़ा सपना इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) स्थापित करना था, जो उनकी मृत्यु के बाद 1911 में साकार हुआ।
इस्पात क्रांति और जमशेदपुर की स्थापना
भारत में इस्पात उद्योग लाने का उनका सपना 1912 में पूरा हुआ, जब पहली बार देश में इस्पात उत्पादन हुआ। ब्रिटिश अधिकारियों ने इसे असंभव बताया था, लेकिन जमशेदजी की सोच ने इतिहास बदल दिया। उन्होंने एक ऐसी इस्पात नगरी की कल्पना की, जहां श्रमिकों को बेहतर जीवन मिल सके। यही आज का जमशेदपुर है।
जमशेदजी टाटा की विरासत
जमशेदजी ने सिर्फ एक उद्योगपति के तौर पर नहीं, बल्कि एक राष्ट्रनिर्माता के रूप में भी अपनी पहचान बनाई। उनकी सोच, मेहनत और दूरदृष्टि ने भारत को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाई। आज टाटा समूह दुनिया भर में भारत की पहचान है, और इसका श्रेय उस शख्स को जाता है, जिसने कभी कहा था –
"जो राष्ट्र लोहे पर नियंत्रण कर लेता है, वह शीघ्र ही सोने पर भी नियंत्रण पा लेता है।"
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