Patna Training: संत नंदलाल स्मृति विद्या मंदिर में शिक्षकों के लिए खास सत्र, जानिए क्या रहा खास
पटना के संत नंदलाल स्मृति विद्या मंदिर में सीबीएसई द्वारा शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र का आयोजन। जानें इस कार्यक्रम की खास बातें और इसकी उपयोगिता।

शिक्षा जगत में नवाचार और शिक्षण की नई पद्धतियों को अपनाने के लिए संत नंदलाल स्मृति विद्या मंदिर, पटना में सीबीएसई द्वारा "क्षमता निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम" के तहत एक विशेष ऑफलाइन सत्र का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में लर्निंग आउटकम एवं पेडागोजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया।
इतिहास और संदर्भ
भारत में शिक्षा व्यवस्था लगातार परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। सीबीएसई (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) ने 21वीं सदी की शिक्षा पद्धतियों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों की शुरुआत की है। इस संदर्भ में लर्निंग आउटकम की अवधारणा बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि यह छात्रों की सीखने की क्षमता को मापने का एक प्रभावी तरीका है।
प्रशिक्षण सत्र का शुभारंभ
सत्र की शुरुआत विद्यालय की परंपरा के अनुसार संत नंदलाल स्मृति विद्या मंदिर के डॉ. प्रसेनजीत कर्मकार और शिक्षा क्षेत्र में अनुभवी श्रीमती सुलगना बसाक को सम्मान स्वरूप फलों की टोकरी भेंट कर की गई। इस अवसर पर विद्यालय की प्रशासिका श्रीमती शोभा गनेरीवाल और वेन्यू डायरेक्टर श्रीमती नीलकमल सिन्हा भी उपस्थित थीं।
प्रशिक्षण में क्या-क्या सिखाया गया?
इस विशेष प्रशिक्षण सत्र में लर्निंग आउटकम की परिभाषा, उद्देश्य और महत्व पर गहन चर्चा की गई। लर्निंग ऑब्जेक्टिव और लर्निंग आउटकम के अंतर को स्पष्ट करते हुए, शिक्षकों को ब्लूम्स टैक्सोनॉमी के आधुनिक प्रारूप के बारे में बताया गया।
प्रमुख विषय:
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लर्निंग आउटकम की परिभाषा और महत्व
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कक्षा-कक्ष में शिक्षण के दौरान आने वाली बाधाओं का समाधान
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ब्लूम्स टैक्सोनॉमी का आधुनिक प्रारूप और उसकी उपयोगिता
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21वीं सदी के शिक्षण कौशल (21st Century Competencies)
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शिक्षण की रणनीतियाँ और पाठ योजना निर्माण
शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी
इस दौरान शिक्षकों को अपने विषय से संबंधित पाठ योजनाएँ तैयार करने को कहा गया, जिसमें उन्होंने पूरी रुचि दिखाई। विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से 21वीं सदी की शिक्षण पद्धतियों के 7 प्रमुख आयामों को समझाया गया। इसके अलावा, ब्लूम्स टैक्सोनॉमी को ध्यान में रखकर शिक्षण योजना तैयार करने पर जोर दिया गया।
मूल्यांकन और निष्कर्ष
सत्र के अंत में शिक्षकों को बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से उनके ज्ञान का आकलन किया गया। उन्हें अपने विचार साझा करने का भी अवसर दिया गया, जिससे उनकी सहभागिता और अधिक प्रभावी हो गई।
सम्मान और समापन
कार्यक्रम के सफल समापन पर एनआर जिला सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस, सरायकेला और संत नंदलाल स्मृति विद्या मंदिर के लगभग 60 शिक्षक-शिक्षिकाओं ने भाग लिया।
विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती नीलकमल सिन्हा, श्री अनूप कुमार पटनायक और वरिष्ठ शिक्षिका श्रीमती संध्या मिश्रा ने दोनों संसाधकों को शॉल और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान
इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में श्रीमती नेहा मजूमदार, श्री सोमनाथ दे और श्रीमती गुरदीप कौर ने अहम भूमिका निभाई। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
सीबीएसई द्वारा आयोजित यह प्रशिक्षण सत्र शिक्षकों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर साबित हुआ। इस तरह के सत्र न केवल शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से अवगत कराते हैं, बल्कि उन्हें छात्रों को और अधिक प्रभावी ढंग से शिक्षित करने के लिए प्रेरित भी करते हैं।
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