Jamshedpur Devotion: मोहरदा बस्ती में गूंजा हरिनाम संकीर्तन, भक्ति में डूबे श्रद्धालु!
जमशेदपुर के मोहरदा बस्ती में श्री श्री राधा-कृष्ण अखंड हरिनाम संकीर्तन का आयोजन हुआ, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। झामुमो नेता प्रहलाद लोहरा ने भी भक्ति में भाग लिया। पढ़ें पूरी खबर!

जमशेदपुर, पूर्वी विधानसभा: बिरसानगर के मोहरदा बस्ती में श्री श्री सार्वजनिक राधा-कृष्ण अखंड हरिनाम संकीर्तन का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए। इस धार्मिक अनुष्ठान में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के वरिष्ठ नेता प्रहलाद लोहरा ने भी भाग लिया और भगवान राधा-कृष्ण की पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की।
हरिनाम संकीर्तन की ऐतिहासिक परंपरा
भारत में हरिनाम संकीर्तन की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है। संत चैतन्य महाप्रभु ने इसे आध्यात्मिक जागरूकता का सबसे सशक्त माध्यम माना था। बंगाल, उड़ीसा, झारखंड और बिहार में यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है, जहां गांव-गांव में संकीर्तन के आयोजन किए जाते हैं। मान्यता है कि भगवान का नाम जपने से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और जीवन में सकारात्मकता आती है।
भक्तों का उमड़ा जनसैलाब, हरिनाम में खोए श्रद्धालु
मोहरदा बस्ती में हुए इस अखंड संकीर्तन में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।
श्री राधा-कृष्ण की भव्य झांकी सजाई गई।
संपूर्ण क्षेत्र भजन-कीर्तन और मंत्रोच्चार से गूंज उठा।
श्रद्धालुओं ने नृत्य और भक्ति गीतों से संकीर्तन को और भव्य बनाया।
प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
झामुमो नेता प्रहलाद लोहरा ने क्या कहा?
झामुमो नेता प्रहलाद लोहरा ने श्रद्धालुओं के बीच पहुंचकर पूजा-अर्चना की और कहा:
"धर्म और आध्यात्मिकता समाज को जोड़ने का सबसे बड़ा माध्यम है। ऐसे धार्मिक आयोजनों से समाज में प्रेम, भाईचारा और शांति बनी रहती है।"
उन्होंने आयोजकों को धन्यवाद दिया और भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों का समर्थन करने का आश्वासन दिया।
संपूर्ण मोहरदा बस्ती बनी भक्ति का केंद्र
इस आयोजन को सफल बनाने में अभिलाष गौर, पवन प्रधान, काशीनाथ प्रधान, नारायण गौर, बादल गौर, परिचित प्रधान, डी. रवि राव और राजू भाई का विशेष योगदान रहा। बस्तीवासियों ने इसे अब तक का सबसे भव्य संकीर्तन बताया और हर साल इसे बड़े स्तर पर आयोजित करने की मांग की।
आध्यात्मिकता और समाज में एकता का संदेश
हरिनाम संकीर्तन से समाज में शांति और भाईचारे की भावना मजबूत होती है।
धार्मिक आयोजनों से लोगों को आध्यात्मिक शांति मिलती है और मानसिक तनाव कम होता है।
संकीर्तन और भजन-कीर्तन के माध्यम से युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ा जा सकता है।
धार्मिक आयोजनों से समाज में सकारात्मकता और सौहार्द बनाए रखने में मदद मिलती है।
भक्तों में दिखी अटूट आस्था, अगले साल और भव्य होगा आयोजन!
श्रद्धालुओं ने इस संकीर्तन को आध्यात्मिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण बताया और इसे हर साल आयोजित करने की अपील की। आयोजकों ने भी वादा किया कि अगले वर्ष यह कार्यक्रम और बड़े स्तर पर किया जाएगा।
भक्ति और भजन की इस रात ने पूरे क्षेत्र को भक्ति रस में सराबोर कर दिया!
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