Mango Water Crisis: सुभाष कॉलोनी में पानी के लिए हाहाकार, सरकार और नगर निगम से टूटी उम्मीदें
मानगो सुभाष कॉलोनी में पानी की विकराल समस्या से लोग त्रस्त! सरकार और नगर निगम से निराश जनता अब आपसी सहयोग और भिक्षाटन से समाधान निकालने की तैयारी में। आखिर क्यों नहीं हो रही जलापूर्ति? जानें पूरी खबर।

गर्मी के दस्तक देते ही झारखंड के मानगो सुभाष कॉलोनी में पानी का संकट गहराता जा रहा है। बोरिंग सूखने लगे हैं, सरकारी जलापूर्ति ठप है, और लोग बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि स्थानीय लोग अब भिक्षाटन और आपसी सहयोग से पानी का इंतजाम करने को मजबूर हो रहे हैं!
पिछले एक साल से मोहल्ले में पेयजल की सप्लाई पूरी तरह से बंद है। प्रशासन से की गई सैकड़ों शिकायतें और पत्राचार भी बेअसर साबित हुए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम और पेयजल स्वास्थ्य विभाग से अब कोई उम्मीद नहीं बची।
भाजपा नेता का अल्टीमेटम – अब होगा आंदोलन!
गंभीर होती समस्या को देखते हुए स्थानीय लोगों ने पूर्व भाजपा नेता विकास सिंह को बुलाकर अपनी पीड़ा साझा की। उन्होंने बताया कि एक साल से घरों में पानी नहीं आ रहा, लेकिन अधिकारी सिर्फ आश्वासन दे रहे हैं।
विकास सिंह ने लोगों की परेशानी को गंभीरता से लेते हुए पेयजल स्वच्छता विभाग के अधिकारियों को चेतावनी दी कि अब पत्राचार और गुहार लगाने का समय खत्म हो चुका है। यदि जल्द ही जलापूर्ति बहाल नहीं हुई, तो विभाग के कार्यालय में तालाबंदी कर उग्र आंदोलन होगा!
झूठे वादों की मार झेल रहे लोग!
स्थानीय निवासी ज्योति प्रकाश ने कहा कि विभाग कई वर्षों से नया मोटर और वाल्व लगाने का आश्वासन दे रहा है, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं हुआ।
लोगों को उम्मीद थी कि पायल सिनेमा के पास बनी नई पानी की टंकी चालू होने से समस्या हल हो जाएगी। लेकिन जब अधिकारियों से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि टंकी अभी अधूरी है और उसमें थ्री लेयर कोटिंग तथा पैनल रूम का निर्माण बाकी है।
समस्या की जड़ – प्रशासन की लापरवाही!
पानी की समस्या झेल रहे स्थानीय निवासी अजय चौबे, ज्योति प्रकाश, राजवीर चौधरी, मनोज गुप्ता, राजेश प्रसाद, राजू निगम, शेखर कुमार, योगेंद्र शर्मा, विजय निगम, महेंद्र पांडे, विजय तिवारी और मंटू शर्मा का कहना है कि टंकी के अधूरे होने के बावजूद उसका उद्घाटन कर दिया गया।
भाजपा नेता विकास सिंह ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह सिर्फ अधिकारियों, संवेदकों और जनप्रतिनिधियों के निजी स्वार्थ का नतीजा है। उन्हें सिर्फ उद्घाटन के नाम पर वाहवाही बटोरनी होती है, लेकिन आम जनता की समस्या से कोई सरोकार नहीं!
क्या होगा समाधान?
- आपसी सहयोग और भिक्षाटन से पानी का इंतजाम
- विभागीय कार्यालय में तालाबंदी की चेतावनी
- जन आंदोलन की तैयारी
अब सवाल ये है कि क्या सरकार और नगर निगम इस संकट का समाधान निकालेंगे या लोग खुद ही अपनी लड़ाई लड़ने को मजबूर रहेंगे?
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